poetry

कविता : तारकनाथ चौधुरी

▪️ संग दोष - तारकनाथ चौधुरी [ चरोदा-भिलाई, जिला-दुर्ग, छत्तीसगढ़ ] रात भर जागकर बारी-बारी से सातों घरों की पहरेदारी करने वाले कालू की आर्तनाद...

शिक्षक दिवस पर विशेष रचना : ‘मैं शिक्षक हूँ’ – गीता ज़ुन्जानी

गुमनामी में रह कर हँसता छात्रों के भविष्य को गढ़ता रातों को भी जागता रहता मैं शिक्षक हूँ राह दिखाता गुरु-शिष्य परम्परा का निर्वाह मैं...

साहित्यिक पत्रिका कवितायन में छत्तीसगढ़ [चरोदा-जिला दुर्ग] के सेवानिवृत्त व्याख्याता तारक नाथ चौधुरी

▪️ जीवन यात्रा भूमिष्ठ होते ही चल पडी़ थी मेरे जीवन की रेल शयनायनयुक्त,वातानुकूलित सर्वसुविधासज्जित नहीं बल्कि साधारण यात्री गाडी़ पर ही ठूँस दिया गया...

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

▪️ कुछ भी तो नहीं बदला कुछ भी नहीं बदला... मानव के प्रति मानव का आक्रोश सभ्यता के आँगन की सीमा लाँघकर सब कुछ युद्ध...

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी

▪️ स्वगत [SOLILOQUY] देवताओं के देश में रहता हूँ, राक्षसों से लड़ता रहता हूँ आहत-पराजित होकर देवालयों पर लोटता हूँ। चुप रहकर ,चुप रहने वाले...

छत्तीसगढ़ आसपास साहित्य : कवि- पल्लव चटर्जी : बांग्ला में अनुवाद- तारकनाथ चौधुरी

▪️ नींव - मूल कवि- पल्लव चटर्जी - अनुवाद- तारकनाथ चौधुरी तुम सभी की मनोकामनायें पूर्ण हों,मूर्त रुप धरें,गगन छुएँ इसलिए चुपचाप स्वीकार लिया मैंने...
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