कविता : तारकनाथ चौधुरी 9 months ago ▪️ संग दोष - तारकनाथ चौधुरी [ चरोदा-भिलाई, जिला-दुर्ग, छत्तीसगढ़ ] रात भर जागकर बारी-बारी से सातों घरों की पहरेदारी करने वाले कालू की आर्तनाद...
शिक्षक दिवस पर विशेष रचना : ‘मैं शिक्षक हूँ’ – गीता ज़ुन्जानी 9 months ago गुमनामी में रह कर हँसता छात्रों के भविष्य को गढ़ता रातों को भी जागता रहता मैं शिक्षक हूँ राह दिखाता गुरु-शिष्य परम्परा का निर्वाह मैं...
साहित्यिक पत्रिका कवितायन में छत्तीसगढ़ [चरोदा-जिला दुर्ग] के सेवानिवृत्त व्याख्याता तारक नाथ चौधुरी 9 months ago ▪️ जीवन यात्रा भूमिष्ठ होते ही चल पडी़ थी मेरे जीवन की रेल शयनायनयुक्त,वातानुकूलित सर्वसुविधासज्जित नहीं बल्कि साधारण यात्री गाडी़ पर ही ठूँस दिया गया...
कवि और कविता : पल्लव चटर्जी 9 months ago ▪️ कुछ भी तो नहीं बदला कुछ भी नहीं बदला... मानव के प्रति मानव का आक्रोश सभ्यता के आँगन की सीमा लाँघकर सब कुछ युद्ध...
इस माह के कवि : डॉ. प्रेम कुमार पाण्डेय 10 months ago ▪️ खुशी दिन में एक बार बूढ़े पिता बेचैन होते हैं इंतजार करते हैं पूरी शिद्दत के साथ फोन का उधर से पूछता है बेटा...
कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी 10 months ago ▪️ स्वगत [SOLILOQUY] देवताओं के देश में रहता हूँ, राक्षसों से लड़ता रहता हूँ आहत-पराजित होकर देवालयों पर लोटता हूँ। चुप रहकर ,चुप रहने वाले...
कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी 11 months ago ▪️ सशंकित मैं इस अपरिचित शहर में रहना तो तय कर लिया है किंतु मन में एक अनिश्चितता की कचोट लिए कि विपद में किसे...
छत्तीसगढ़ आसपास साहित्य : कवि- पल्लव चटर्जी : बांग्ला में अनुवाद- तारकनाथ चौधुरी 11 months ago ▪️ नींव - मूल कवि- पल्लव चटर्जी - अनुवाद- तारकनाथ चौधुरी तुम सभी की मनोकामनायें पूर्ण हों,मूर्त रुप धरें,गगन छुएँ इसलिए चुपचाप स्वीकार लिया मैंने...
इस माह के कवि और कविता : प्रकाशचंद्र मण्डल 11 months ago ▪️ माँ माँ ज्वाला है जलकर कठोर हो जाती है. माँ मोम है आँच में भी पिघल जाती है. माँ प्यार की मूरत है जिसे...
रचना आसपास : नुरूस्सबाह खान ‘सबा’ 12 months ago ❤ ग़ज़ल काम जिनके भी यहां हमने हैं काले देखे मुंह में उनके ही तो सोने के निवाले देखे जब भी रिश्तों पे पड़े परदे...