होली आगमन पर विशेष- विनीता सिंह चौहान 6 years ago लग गई लगन फ़ागुन की ! आ गई होली शगुन की ! -विनीता सिंह चौहान. [ इंदौर-मध्यप्रदेश ] लग गई लगन फागुन की ! आ...
ग़ज़ल- तारकनाथ चौधुरी 6 years ago जिसके सिर पे बुजुर्गों का साया है. मकां को घर उसी ने उसी ने बनाया है. ●तारकनाथ चौधुरी [ चरोदा,भिलाई-छत्तीसगढ़ ] जिसके सिर पे बुजु़गों...
कविता- कमल यशवंत सिन्हा 6 years ago संसार की सबसे सुंदर प्रेम कविताएं, लिखी ही नहीं जा सकी... यह कवि का प्रतिशोध है नियति से, जिसने अधूरा कर दिया उसे आजीवन... ●कमल...
नवरंग के बाल मुक्तक- डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ 6 years ago नवरंग के बाल मुक्तक 1. बंदर छत के ऊपर आया बंदर सबको नाच नचाया बंदर मिश्का बाहर खेल रही थी देख उसे मुस्काया बंदर 2.डॉगी...
कविता- श्रीमती संतोष झांझी 6 years ago ●कविता की तलाश -श्रीमती संतोष झांझी सुबह सुबह जब सूरज अपनी किरणें धरती पर लाये साँझ पड़े हो लाल शरम से क्षितिज के पीछे छुप...
कविता- डॉ. बीना सिंह 6 years ago •वो भिखारन• -डॉ. बीना सिंह हां हां वह सच में भिखारन थी ना जाने किस मां की अभागन थी अल सुबह रोज भीख मांगने आया...
कविता- सरस्वती धानेश्वर 6 years ago •मेरी कविताओं की उन्मुक्त उड़ान• -सरस्वती धानेश्वर मैं भी हूं तुम भी हो ना मुझ बिन तुम, ना तुम बिन मैं। अपरिमित है हमारे प्रेम...
कविता- कमल यशवंत सिन्हा ‘तिलसमानी’ 6 years ago मैं अपनी कविताओं से/ धरती की सतह पर एक जोरदार धक्का लगाना चाहता हूँ धक्का इतना प्रभावी,बलशाली और तेज हो कि विकृति उत्पन्न हो जाएं/...
कविता- विजय पंडा 6 years ago ●सिमटी टाटपट्टी -विजय पंडा [ घरगोड़ा,रायगढ़, छत्तीसगढ़ ] सिमटी टाटपट्टी किनारे में अपने को समेटे जीर्णावस्था में पुरानी हो गयी है। असंख्य तारो ने ,सुकुमारों...
कविता- आलोक शर्मा 6 years ago •कहना है कुछ...बस यूं ही...! •आलोक शर्मा [ ख्यातिलब्ध मंचीय कवि आलोक शर्मा, देश के कई मंचों से अपनी हास्य रचनाओं के माध्यम से निरन्तर...