- Home
- poetry
- Uncategorized
- ग़ज़ल- तारकनाथ चौधुरी
ग़ज़ल- तारकनाथ चौधुरी
6 years ago
351
0
जिसके सिर पे बुजुर्गों का साया है.
मकां को घर उसी ने उसी ने बनाया है.
●तारकनाथ चौधुरी
[ चरोदा,भिलाई-छत्तीसगढ़ ]
जिसके सिर पे बुजु़गों का साया है,
मकाँ को घर बस उसीने बनाया है।
बडा़ पाबंद है वक़्त का फिर क्यों
बेवक़्त खु़दा ने उसे बुलाया है।
अब उजालों से डर है लगता मुझे,
घर मेरे किसने चराग़ जलाया है।
जिसने उजाड़ दी हमारी बस्तियाँ,
घरों को उनके हमीं ने बनाया है।
आ गये राम भी शक़ के घेरे में,
पुल ये समंदर में किसने बनाया है।
सुना था बंदों के दिलों में रहते हो,
किसने फिर मंदिर-मस्जि़द बनाया है।
मुंडेर पे आने लगे फिर से परिंदे
मैंने “तारक” नया घरौंदा बनाया है।

●कवि संपर्क-
●8349408210
◆◆◆ ◆◆◆ ◆◆◆
chhattisgarhaaspaas
Next Post कहानी- डॉ. बलदाऊ राम साहू
विज्ञापन (Advertisement)