कविता आसपास 6 years ago ■रीते पन से आक्रांत 'एकाकी लोग'. -कमल यशवंत सिन्हा रीतेपन से आक्रांत 'एकाकी लोग' सोशल मीडिया पर झूठी जिंदगी जी रहे 'एकाकी लोग' खुद से...
महुआई गंध 6 years ago ■पगडंडियों के आर-पार, ■बिखरे पलाश फूल. -डॉ. पीसी लाल यादव [ गंडई-छत्तीसगढ़ ] पगडंडियों के आर-पार, बिखरे पलाश फूल। जैसे सूखी नदी के - हों...
बाल ग़ज़ल 6 years ago बाल ग़ज़ल म्याऊँ म्याऊँ करती है ■डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग'. ■कोरबा-छत्तीसगढ़. म्याऊँ म्याऊँ करती है पर बिल्ली से डरती है जब भी घोड़ा आता है...
कवि औऱ कविता 6 years ago ■साईकिलों पर घर -रमेश कुमार सोनी कबीर नगर, रायपुर ,छत्तीसगढ़ अलग-अलग पगडंडियों से गाँवों के मजदूर अपनी जरूरतें मुँह पर चस्पा किए साइकिलों से खटते...
रचना आसपास 6 years ago ●नव सबेरा -विजय पंडा [ घरघोड़ा, रायगढ़, छत्तीसगढ़ ] शादी का निमंत्रण आया ; मन हर्षित तन पुलकित दौडते - भागते गुनगुनाते श्रीमती, बाल बच्चों...
डॉ. मीता अग्रवाल ‘मधुर’ की कविताएं 6 years ago ●इच्छा अनंत आकाश की ऊचाईयां हिरणी की तरह कुलाचे भरती इच्छाएं । भटकती मृगमरीचिका थक-हार बैठती हैं सोचते सोचते विशाल प्रांगन में विचरती ढूढ़ती उत्तर...
कविता 6 years ago बसन्त पंचमी -प्रिया देवांगन 'प्रियू' आता है जब पंचमी, पूजा करते लोग। हाथ जोड़ विनती करे, और लगाते भोग।। हरी भरी धरती दिखे, हरियाली चहुँओर।...
प्यार की पाती 6 years ago प्यार की पाती मिली,जवाब दिया नहीं. क्या जवाब देते,प्यार ही किया नहीं. -संतोष झांझी प्यार की पाती मिली, जवाब दिया नहीं क्या जवाब देते, प्यार...
ग़ज़ल 6 years ago ●एक ग़ज़ल - दिल से -लतीफ़ खान 'लतीफ़' उन के ख़्वाबों में खो गईं आँखें! दिल का दामन भिगो गईं आँखें! सब ख़ज़ाने लुटा के...
गीत 6 years ago ●बसंत के स्वागत में -डॉ.बलदाऊ राम साहू दुर्ग-छत्तीसगढ़ भौंरों का नव गुंजार सखी बासंती रंग, बयार सखी. महुआ गंध बिखेर रहा है कर के सोलह...