ग़ज़ल
6 years ago
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●एक ग़ज़ल – दिल से
-लतीफ़ खान ‘लतीफ़’
उन के ख़्वाबों में खो गईं आँखें!
दिल का दामन भिगो गईं आँखें!
सब ख़ज़ाने लुटा के अश्कों के,
एक मुफ़लिस सी हो गईं आँखें!
जब हुए हम जुदा तो पलकों पर,
बीज अश्कों के बो गईं आँखें!
देख कर रंग – ढंग दुनिया के,
ख़ून के आँसू रो गईं आँखें!
उम्र भर रतजगा किया औ’ फिर,
चैन की नीन्द सो गईं आँखें!
उन के आने की जब ख़बर आई,
कितनी बे – चैन हो गईं आँखें!
बे-नक़ाब उन को आज देखा तो,
मीठे ख़्वाबों में खो गईं आँखें!
जब चढ़ा प्यार का ख़ुमार ‘लतीफ़’,
शर्म से सुर्ख़ हो गईं आँखें!

●कवि संपर्क-
●77229 22819
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chhattisgarhaaspaas
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