poetry

ग़ज़ल, मैं समझी थी अक्सर वो आया करेंगे, पता था नहीं दिल दुखाया करेंगे- झरना मुख़र्जी, वाराणसी-उत्तरप्रदेश

मैं समझी थी अक्सर वो आया करेंगे पता था नहीं दिल दुखा़या करेंगे। भले दूर कर दो निगाहों से अपने मगर हम तो दर पर...

ग़ज़ल

जानें किस चीज़ की कमी है अभी, इन आँखों में क्यों नमी है अभी. -संतोष झांझी जानें किस चीज़ की कमी है अभी इन आँखों...

दिल दिया मैंने तुझे अब प्यार कर, आज मेरे हमसफ़र इक़रार कर

ग़ज़ल -अनन्या श्री कानपुर-उत्तरप्रदेश   दिल दिया मैंने तुझे अब प्यार कर। आज मेरे हमसफ़र इक़रार कर। रात बीतेगी सहर भी आएगी। इश्क़ का दरिया...

कविता, प्रियतम- भूषण चिपड़े

प्रियतम प्रियतम प्रियतम कहते कहते, प्रेमी मन मुस्काता है देख तुम्हारी सूरत को फिर, खाली मन भर जाता है सागर जैसी गहरी गहरी, आखों में...
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