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कविता- अभिव्यक्ति पाण्डेय

आज जहाँ बस सूखी धरती जल को तरसा करती है माँ कहती है कभी यहाँ, कश्ती तैरा करती थी हरे भरे जो जंगल गम हैं,बड़ी...

कविता – मां

डॉ. बीना सिंह मां तेरा साथ है तो .....................सुखद कहानी है मां तेरा साथ है तो .....................जीवन में रवानी है मां तेरा स्पर्श कराता .........................याद...

कविता : ” तलाशती निगाहें “

कवि - त्र्यम्बक राव साटकर "अम्बर" जरा सा झाँक लीजिए, कोविड में गिरफ्त, उस अपने को, जो आपका अपना है । दूर से,दूरभाष से ही...

कविता

कुछ मुट्ठी पर लड़कियां -सीता चौहान 'पवन',ग्वालियर   कुछ मुट्ठी भर लड़किया कुछ मुट्ठी भर लड़कियां हमेशा नही ढोती निराशाओं को अपने कंधो पर वह...
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