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कविता

नारी बने कल्याणी -श्रीमती वंदना खरे, कोरबा-छत्तीसगढ़ नारी तो है गुणों की खान , आओ करते हम उसका बखान। दुर्गा, लक्ष्मी ,पार्वती सरस्वती के रूपों...

कविता

आदमी -सदानंद टोकेकर, पुणे-मुंबई क्यूं इतना ख़ुदगर्ज हो गया है आदमी पहले तो था इंसान, इंसान हो गया आदमी बातों-बातों में खेल बन जाता है...

गीत

प्यारी बेटियां -उज्ज्वल प्रसन्नो प्रेम के प्रकाश का जीवन के विकास का । अद्भुत अनुपम आधार बेटियाँ।। सृष्टि का आधार अनोखा दुख में संबल। सुख...

गज़ल

बेहद सहमा सा है आदमी आजकल -डॉ. प्रभा शर्मा 'सागर' बेहद सहमा सा है आदमी आजकल कोरोना की जानलेवा घड़ी आजकल याद परदेश में घर...

कविता – यशवन्त सिन्हा ‘कमल’

सामने नहीं आता अब कोई भीम जो करे रक्तपान दुशासन की छाती से चीर दे जांघ दुर्योधन की छेड़ दे युद्ध तुम्हारी अस्मिता की ख़ातिर...

बेटी -निधि सिन्हा

क्यों कभी निर्भया तो कभी मनीषा होती हैं बलात्कार का शिकार क्यों हवस पर शिकंजा नहीं, क्यों दुःशासन पर होता नहीं प्रहार. क्यों दब जाती...

कविता, पिता – संतोष झांझी

पिता आफिस की फाइलों में दबे फैक्टरी के शोर से थके डाँटते है पिता दोस्तों से गपियाते बेटे को वो देखकर आये हैं फाइल दबाये...

कविता – डॉ.सोनाली चक्रवर्ती

जो लोग दंगे करवाते हैं जो लोग मॉब लीँचिंग करते हैं जो लोग बेटियों को कोख में ही मार देते हैं प्रकृति से लड़ लेते...

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