• story
  • कहानी : ‘ पानी के लिए ‘ – उर्मिला शुक्ल

कहानी : ‘ पानी के लिए ‘ – उर्मिला शुक्ल

3 years ago
1406


पानी के लिए
-उर्मिला शुक्ल
[ रायपुर छत्तीसगढ़ ]

लगातर पानी बहने से लान से होकर सडक पर पानी रेला सा बह आया था | वे बेचैनी हो उठीं | उठकर उनके गेट तक गयीं | भीतर झाँक कर देखा कोई सुगबुग दिखे तो बता दे कि…..मगर भीतर कोई हलचल नहीं | हार कर लौट आई ;मगर पानी का बहना उन्हें इस कदर बेचैन कर रहा था कि फिर बाहर आ गयी | उस घर के सामने देर तक टहलती रही | फिर घंटी बजाई और इंतजार करती रहीं कि कोई बाहर आये ;मगर कोई नहीं आया | आता भी कैसे | वह एक अति आधुनिक परिवार था , जिसकी सुबह दोपहर बाद हुआ करती थी | सो वे प्रतीक्षा करती रहीं कि कोई इधर से गुजरे तो उससे ही वाल्व बंद करने को कहें | कुछ देर बाद चौकीदार दिखा | “सुनों ! जरा वो वाल्ब बंद कर दो | “
“ पर गेट में लाक है ? “
“हाँ तभी तो तुमसे कह रही हूँ | वरना मैं खुद बंद कर देती | “
“क्या मैडम ? आप भी न ? पानी ही तो है | कउनो आगि तो लाग नहीं है कि हम किसी के घर म कूद जाएँ | ”वह चलता बना |
वे उसे और उसकी उस बेपरवाही को देखती रह गयीं | ऐसे कह गया ‘पानी ही तो है , जैसे पानी कुछ है ही नहीं !
जब पानी का रेला और दूर तक बह चला ,तो उनकी बेचैनी और बढ़ गयी ;मगर उपाय कुछ न था | गेट इतना ऊँचा था कि उनके लिए उसे फाँदना भी संभव न था |
‘ शायद कलोनी के गेट पर कोई मिल जाय | ‘ सोचकर वे कालोनी के गेट की ओर बढ़ीं , मगर ऐसा कोई नजर नहीं आया जिससे ….| उन्हें अपनी असमर्थता पर हताशा हुई ,तभी अखबार वाला लड़का नजर आया | उसने उन्हें नमस्ते किया |
“सुनो ! “
“जी मैडम | “
“एक काम है | करोगे क्या ? “चौकीदार के उस जवाब से उनके स्वर में झिझक सी उतर आई थी |
“जरूर मैडम | कहिये न क्या करना है ? “
वो क्या है सामने वाले घर की टंकी बड़ी देर से ओवरफ्लो हो रही है | पानी की यूँ बर्बादी ….| सो उसे तुम बंद ..?” झिझकते हुए कहा |
“जी जरूर !” वह तत्काल उनके साथ चल पड़ा |
“उफ़ ! पानी की ऐसी बर्बादी ! ”सड़क पर बहते पनाले को देख उसने अफसोस किया और गेट फांदकर वाल्ब बंद कर दिया |
“थैंक्यू बेटा |”
“ थैंक्स तो आपको देना चाहिए | कम से कम आपने इतना सोचा तो ,वरना लोग पानी की कदर ही कहाँ करते हैं | वो देखिये कितना मोटा पाईप लगाकर गाड़ी धोयी जा रही है | जो काम आधी बाल्टी पानी में हो जाता ,उसके लिए पचासों बाल्टी का खर्च ? पानी की कीमत तो हम झुग्गी वाले जानते हैं | चौबीस घंटे में एक बार आता है नल ;वो भी सिर्फ एक घंटे के लिए | उसी एक घंटे में पूरी झुग्गी को पानी भरना होता है | दो बजे रात को उठकर अपनी ओसरी ( अपना बर्तन रखकर नम्बर लगाना ) लगाना | फिर बर्तन की रखवाली में अधरतिया से जागरण करना | “बिन पानी सब सून |”हम जानते हैं इसका मर्म | आप भी समझती हैं | सो आपको थैंक्स| “
वे भीतर जाने को मुड़ीं | कुछ शब्द उछल कर कानों के भीतर जा पहुँचे चौकीदार सबेरे की पाली वाले गार्ड से कह रहा था –
“ ई देखो ! ई पानी जैसी चीज के लिए किस कदर परेशान थीं कि दूसरा के घरवा में आदमी कुदाय दिया | ”
वे घर के भीतर घुस ही रही थीं कि –”पगला गयी हैं शाईद | “
यह वाक्य उनकी पीठ पर धप्प से लगा | फिर उन दोनों की हँसी का समवेत स्वर | उनकी हँसी कानों में ठहर गयी ‘ ये इलाहाबाद से हैं | वहाँ गंगा और यमुना का असीम जल है | सो ये क्या जानें कि पानी क्या है ? पहले मैं भी कहाँ जानती थीं ,तभी तो अम्मा से कुतर्क करती | ’
“पानी बहाये से धन कय नास होत है | दारिद्र आता है |“ वे कहतीं |
“का अम्मा तुम भी न ? पानी और धन का कोई मेल है क्या ? पानी से धन मिलता है भला ? “
तब पानी का बाजार नहीं पनपा था और पानी सहज सुलभ था | अम्मा पढ़ी लिखी नहीं थीं | उनके पास विज्ञान आधारित तर्क नहीं थे ;मगर अनुभव की थाती थी ? उन्होंने बाढ़ – सूखा सब देखा था | पानी की अहमियत जानती थीं | ‘ अब ? अब तो वक्त ने मुझे भी समझा दिया है कि पानी क्या है ? इसी पानी की खातिर तो …और उनकी आँखों में बीस साल पहले के दृश्य उतर आये ………..
पहली पोस्टिंग थी | महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सीमा से सटा गाँव निपनिया | उस गाँव के आस – पास का इलाका बहुत पथरीला था और वैसे ही पथरीले थे वहाँ के लोग | उसी गाँव में एक पहाड़ी पर बना था उनका स्कूल | स्कूल भवन तो था ;मगर बच्चे नदारद ? गाँव के लड़के दिनभर रेलवे लाइन के किनारे भटकते कि कोई माल गाड़ी रुके, तो माल चुराएँ और लडकियाँ ? या तो छोटे भाई बहनों को पोसने में जुटी रहतीं या माँ के साथ पानी जुगाड़तीं | फिर भी उन्होंने कोशिश की | गाँव में जाकर उनके माँ बाप से मिलीं ;पर किसी ने सीधे मुँह बात नहीं की | एक ने जवाब दिया –
“हो मी पढ़ने को भेजेगी | फेर मेरा घर वास्ते पानी तेरे कू लाना होयेगा | बोल लाएगी ? ”
वे चकित ! लोगों ने गाँव की सारी कल्पनाएँ ही ध्वस्त कर दीं | उस गाँव से दूर एक कस्बे में रहती थीं वे | सो उन्हें स्थितियों का अंदाजा ही नहीं था | अंदाजा होता भी नहीं ,अगर भास्कर से मुलाकात न होती –
ब्लाक आफिसर भास्कर | वह गाँव भी उनके एरिया में आता था | सो अक्सर उनसे मुलाकत हो जाती | बाद में तो वे साथ आने जाने लगे थे |
“ मैं सोच रही हूँ अपना तबादला करवा लूँ | ” उनकी नजरें शहर को जाती पगडंडी पर जा टिकीं |
“क्यों ?”
“ इस गाँव में रहने से कोई फायदा नहीं | इतनी कोशिश की ;मगर.. ? यहाँ के लोगों को पढ़ाई लिखाई से कोई वास्ता ही नहीं | लडकियाँ सारे दिन पानी ही भरती रहती हैं और लडके ? रेल लाइन के किनारे डोलते रहते हैं | “
“ आपको क्या लगता है ? पानी जरूरी नहीं है ? “
“जरूरी है ; मगर सारा दिन उसी के लिए ! “
वे उसे समझाना चाहते थे कि दो पहाड़ियों के बीच बसे इस गाँव का नाम यूँ ही निपनिया नहीं है | पानी का ऐसा आभाव है यहाँ कि आभाव शब्द भी बेमानी हो उठता है | जब जीवन का आधार पानी न मिले ,तब जीवन जीने के और साधन भी कहाँ मिलते हैं | सो इस गाँव में न तो खाने के लिए अन्न है और न पीने को पानी | फिर भी जी रहे हैं लोग | अगर वे यह सब उनसे कहते, तो उन्हें यकीन ही नहीं होता | सो –
“आप जानती हैं ये पानी कहाँ से लाती हैं ? नहीं न | चलिए मैं आपको दिखाता हूँ |”
मीलों मील पैदल चढ़ाई के बाद वे एक ऊँची पहाड़ी पर पहुँचे | वहाँ पहाड़ी से नीचे रेत की एक पतली सी रेखा नजर आ रही थी | वहाँ तक जाने के लिए कोई रास्ता नहीं था | फिर भी वहाँ भीड़ सी लगी थी | उस खड़ी उतराई से नीचे जाने की हिम्मत नहीं थी उनमें | सो वहीं ठिठक गयीं |
“क्यों हिम्मत पस्त हो गयी ? आप देख रहीं हैं न ? न तो यह उतराई आसान है ओर न ही चढ़ाई | और नीचे उतर कर भी पानी मिल ही जाय ये जरूरी नहीं है | यह एक बरसाती नदी है | साल में कुछ दिन ही पानी रहता है इसमें | बाकी समय रेत से पानी ओगारना होता है | आसान नहीं है रेत से पानी ओगारना ;मगर ये ओगारती हैं ,इस नदी में छोटे छोटे गड्ढे खोदकर | फिर कटोरी और कभी कभी तो चम्मच से उस पानी को मटकी में सहेजती हैं | फिर मटकी लेकर यह खड़ी चढ़ाई चढ़ना ? कई बार पानी ओगरने के इंतजार में यहीं रात बीतती है | बहुत सी लडकियाँ जानवरों का ग्रास भी बन जाती हैं और आप कहती हैं ….? “
“ सॉरी | मैंने तो कल्पना भी नहीं की थी कि पानी के लिए इतनी जद्दो जहद कि जिन्दगी तक दाँव पर ….| “
फिर गाँव के लोगों से उन्हें कोई शिकायत नहीं रह गयी | ऐसा नहीं था कि गाँव लोग बदल गये थे | वे अभी वैसे ही थे | उतने ही पथरीले ;मगर अब उनका नजरिया बदल गया था और बदल गया था तबादले का फैसला | उन्होंने नये सिरे से कोशिश शुरू की | अब दिन की जगह शाम को गाँव आतीं | रात को सब अपने अपने काम से निपट लेते , तब लोगों के घर जातीं ;मगर उनसे पढ़ाई की बात न करके, उनके सुख दुःख पूछतीं | धीरे धीरे मन की गाँठें खुलने लगीं | फिर उन्होंने पढ़ाई का महत्व समझाया | बताया पढ़ना भी जरूरी है | विश्वास दिलाया इसमें काम का अकाज नहीं होगा | वे बच्चों को रात में पढ़ायेंगी | बात समझ में आयी | वे राजी हो गये | रात को निर्जन पहाड़ी पर जाकर पढ़ाना तो संभव नहीं था | सो मुखिया की परछी (बरामदे )में क्लास लगने लगी |
वे खुश थीं | बच्चे स्कूल आने लगे थे | एक सपना सा पलने था उनकी आँखों में | उस सपने में था निपनिया गाँव | भास्कर का सपना भी तो यही था | सो उनके सपने करीब आते गये और वे भी | अपने सपने की चाँदनी में विचरते वे ,कहाँ जानते थे कि राहू ‘ काला बुखार ’का रूप धर उनके सपने को ऐसे ग्रसेगा कि …..
सर्दियों में सब ठीक ही रहता था | पानी की कठिनाई होती थी ;मगर काम चल जाता था ; पर गर्मी ? गर्मी आते ही कर्क रेखी सूरज ऐसा तपता कि ताप भी त्राही त्राही कर उठता | सो भास्कर ने कोशिश की कि पहाड़ी काटकर उस पार वाली नदी का पानी गाँव में लाया जाय ; मगर कामयाबी नहीं मिली | उनकी कोशिशें दो प्रान्तों के दफ्तरों में उलझकर रह गयीं | तब भास्कर ने योजना बनाई पहाड़ी के पास एक कुआँ खोदा जाय | उस पार बहती नदी ने उनका विश्वास बढ़ाया ,पर इसके लिए श्रम और पैसे दोनों की जरूरत थी | पैसे तो उन्हें जुगाड़ना था ;मगर श्रम ? सो उन्होंने गाँव वालों से बात की |
“का बाबू ! तू फत्थर से पानी निथारने का सपना देखता | ये सुक्खा पहाड़ में पानी है कहाँ |” सुखु बाई के ससुर ने कहा |
“काकू सहीच बोलता | ये पत्थर में पानी ? नको | हम लोग कितना दफा कोसिस किया | फेर सब ? “सखाराम ने कहा |
सखाराम गाँव का नेता जैसा था | सो सबने उसका समर्थन किया ; मगर नाउम्मीदी में उम्मीद भर देने का नाम ही तो भास्कर था | सो –
“ पहाड़ी के उस पार नदी है न ? “
“हव ! नदीं तो है | “
“नदी के तीर तखार की जमीन में पानी होता है न |”
सब ने हाँ में सर हिलाया | “ फिर पानी क्यों नहीं निकलेगा ? पानी जरूर निकलेगा | इस काम में जो भी पैसा लगेगा मैं लगाऊँगा और मेहनत हम सब करेंगे | ठीक है न ? “
नाउम्मीदी के अँधेरे में उम्मीद की एक किरण दिखी ,तो सबने हामी भर ली | पर उस बरस बरसात हुई ही नहीं | सो सर्दियों की जगह बरसात में ही काम शुरू कर लिया | गाँव के सब माई पिला पूरे उत्साह से जुट गये ,पर काम उतना आसान नहीं था ,जितना लगा था | पथरीली जमीन सब्बल और कुदाल की नोक को टेढ़ा कर उसे बेकार देती | फिर नयी कुदाल और सब्बल लाये जाते | काम अनुमान से बहुत अधिक खर्चीला हो उठा | भास्कर ने अपना पूरा पी. एफ. लगा दिया |
कई महीने की मेहनत के बाद कुछ नम मिटटी मिली, तो लगा कि अब मंजिल करीब है | सचमुच मंजिल करीब ही थी | कुछ दिन के बाद गीली मिटटी निकलने लगी | फिर एकदिन मिटटी के साथ कुछ पानी भी ओगरा ,तो लोग खुशी से नाच ही उठे | वह दिन एक उत्सव जैसा हो गया था | बिलकुल होली सा माहौल | लोग देर तक मटमैले जल को एक दूसरे पर उलीचते रहे | अब उनके दुःख के दिन दूर हो जायेंगे ,इस सोच ने उनमें एक नई शक्ति भर दी और वे दुगने उत्साह से खुदाई में जुट गये; मगर नियति ने तो कुछ और ही सोच रखा था | सो उसने भेजा – काला बुखार |
अस्पताल ,सड़क और पानी रहित गाँव के लिए, वह बुखार किसी महामारी से कम नहीं था ,उधर सूरज की तपिश ने गाँव का बचा कुचा पानी भी सोंख लिया | सो मृत्यु का ऐसा तांडव शुरू हुआ कि लगा मानों यमराज ने वहीं डेरा डाल लिया हो | भास्कर ने अपनी सारी ताकत झोंक कर दवाई की व्यवस्था की ;मगर उन लोगों को के लिए दवा से ज्यादा जरूरी था पानी | भास्कर ने पानी के सैकड़ों कैन खरीदे ; मगर प्यास तो सुरसा हो गयी थी | सुबह से शाम तक गाँव और कस्बे के बीच चकरघिन्नी सा चक्कर मारते रहे वे ;मगर बुखार से तपते लोगों की प्यास नहीं बुझी और काला बुखार लोगों को निगलता चला गया | सबसे त्रासद तो था वह क्षण जब सुखु बाई ने अपने ससुर को ….
अभी फागुन बीता भी नहीं था ;मगर सूरज की तपिश जेठ को मात कर रही थी | उसने कुँए का पानी सोंख कर उसे कीचड़ में बदल दिया था | दोपहर से पहले ही लू के थपेड़े चलने लगते | ऐसे में आदमी को भोजन भले न मिले ;मगर पानी ? पर पानी ? सो दोहरे ताप से तपते मरीजों की जुबान पर बस एक ही शब्द उभरता –पानी – पानी – पानी | सुखु बाई के ससुर की जुबाँ भी यही रट लगाये हुए थी |
“हव ! मी देती | अब्भी देती | “सुखु बाई ने कहा और उसकी नजरें ,शहर वाली पगडंडी पर जा ठहरीं |
पर पगडंडी तो सूनी थी | भास्कर पानी जुगाड़ने गये थे ;मगर कस्बे की दुकानों पर तो ताला लटका हुआ था | उस दिन कोई हड़ताल नहीं थी और न ही बंद का कोई एलान था | फिर भी पूरा कस्बा बंद था | कारण कोई बाबा आये हुए थे | सो कुछ ने अपनी मर्जी से दुकान बंद कर ली ,बाकी दुकानें बाबा के चेलों ने बंद करवा दीं | वे टोला मोहल्ला के सबको सकेल ले गये | ऐसे माँहौल में वे पानी कहाँ से खरीदते | सो बहुत भटकते के बाद एक घरनुमा दुकान से दो बाटल पानी मिला | फिर तो उनकी मोटर सायकल दौड़ पड़ी | उस बीहड़ की पथरीली राह पर भी उसकी रफ्तार लगातार बढ़ती जा रही थी ;मगर मौत ? मौत से आगे भला कौन निकल पाया है | वे पानी लेकर पहुँच पाते ,उससे पहले ही मौत आ पहुँची |
“पानी – पानी |”रटती जुबाँ के साथ जब आँख्ने पलटने लगीं ,तो सुखु से रहा नहीं गया और वह उस लोटे को उठा लाई | उसने लोटा टेढ़ा करके ससुर के मुँह से सटा दिया –“ घेव गंगाजल घेव | यहीच हमारा गंगाजल है | “
जब मुँह से लोटा हटाया , उन्हें मोक्ष मिल चुका था | अब सब कुछ शांत था | कोई प्यास नहीं ,कोई आवाज नहीं | सुखु बाई ने ओंठ के कोर तक पसर आये कीचड़ को पोछा और दहाड़ मार कर रो पड़ी |
उन्हें जोखू याद हो आया | ठाकुर का कुंआ वाला जोखू | सदियों का फासला ;मगर स्थितियाँ वैसी की वैसी | जोखू ने भी तो गंदा पानी पीकर जान गँवाई थी | उन्होंने भीगी आँखों से बाहर देखा ,झोपड़ी के द्वार पर भास्कर खड़े थे | उनकी आँखों में हताशा की राख थी |
उस अजार ने गाँव को लगभग खाली ही कर दिया | भास्कर ने फिर भी अपना हौसला नहीं छोड़ा | बचे हुए लोग और बचे हुए पैसे से फिर अपनी मुहीम में जुटे गये | पैसा कम पड़ा ,तो भास्कर ने कस्बे अपना वाला प्लाट बेच दिया | यह प्लाट अब मात्र जमीन का टुकड़ा ही नहीं था | उनके सपनों का आधार भी था | उसी प्लाट पर तो उनका स्वप्न नीड़ बनने वाला था ; मगर गाँव का यह सपना भी तो ,उन्होंने ही देखा था |
बहुत मशक्कत के बाद कुँए में पानी आया ; मगर कुआँ इतना गहरा हो चुका था कि उसे पक्का करना जरूरी था और करने के लिए लाखों रूपये की जरूरत थी | ये रूपये कहाँ से आयें ,यह एक बड़ी समस्या थी | सो अब उनकी बारी थी | उन्होंने अपना पी. एफ. निकालकर भास्कर को सौंप दिया | पैसे फिर भी पूरे नहीं हुए, तो भास्कर ने कसबे में जाकर चंदा माँगा | घड़ी ने टन्न टन्न टन्न , घंटा बजाया ,तो उनकी तंद्रा टूटी | तीन बज गये थे | नजरें घड़ी पर रहीं ,मगर मन ? वह फिर उसी गाँव में जा पहुँचा ……..
पैसे की व्यबस्था हुई ,तो काम ने फिर गति पकड़ी | उन्होंने अपना पैसा लगाया था ,तो गाँव वालों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी | उन लोगों ने भी अपनी पूरी शक्ति झोंक दी | सो कामयाबी तो मिलनी ही थी | वह मिली मगर ….
अगले दिन कुँए की पूजा होनी थी | उस गाँव में पूजा की सामग्री तो थी ही नहीं | वे उसे जुटाने गयी थीं | लौटकर आयीं ,तो कुँए के इर्द गिर्द भीड़ देख उन्हें लगा कि लोग पूजा के लिए इक्कठे हैं ;मगर सुखु बाई दौडकर आयी और –
“ये गो ताई सब्ब खतम हो गया रे | ये पापी कुँआ सब्ब लील गया रे | ”सुखू बाई बुक्का फाड़कर रो पड़ी |
सुखू बाई के रुदन के साथ ही औरतों का ऐसा रुदन उठा कि वे उधर देख न सकीं | उन्होंने तत्काल अपनी नजरें फेर लीं और भीड़ में भास्कर को तलाशने लगीं | वे दौडकर उनसे लिपट जाना चाहती थीं कि उनकी पीड़ा को उनका कँधा मिल जाय | उन्हें कहाँ मालूम था कि काँधा तो अब… | सो उनकी नजरें देर तक उन्हें तलाशती रहीं |फिर सोचा – ‘ वे कहीं गये होंगे | शायद कसबे तक | इस विपदा से निपटना भी तो उन्हें ही पड़ेगा |’ सोचा फिर मन कड़ा करके उस ओर देखा तो काठ ही मार गया | कठुआयी नजरों से देखती रहीं सब | पुलिस आई | फालिज के मारे सत्या ने पुलिस को बताया |
कुँए का काम पूरा हो चुका था | बस नीचे की तरफ का हिस्सा ही छूट गया था | उसके लिए चार लोग कुँए में उतरे थे | अब तक पानी का सोता भी अपनी पूरी गति पकड़ चुका था | सो उन्हें कामयाबी नहीं मिल रही थी | भास्कर ने समझाया कि इंटों का एंगल बदल लें ; मगर कुँए कि गहराई इतनी अधिक थी कि उनकी आवाज उन तक पहुँची ही नहीं | उस हिस्से में ईंटो को फंसाना जरूरी था | सो भास्कर कुँए में उतरे | उन्होंने इंटों को वांछित एंगल में फँसा दिया | काम पूरा हुआ | अब उन्हें रस्से के सहारे बाहर आना था | लोग चाह रहे थे कि पहले भास्कर को बाहर भेजें ;मगर भास्कर ने देखा पानी में डूबे रहने से तुका का हाल बेहाल हो रहा था | सो उन्होंने उसे पहले ऊपर भेजा | रस्से के सहारे वह ऊपर आने जाने लगा | ऊपर खड़े लोग उसका हौसला बढ़ाते रहे | तुका ऊपर पहुँचने ही वाला था कि दूसरे के छोर वाला हिस्सा भराकर नीचे गिरा और….. देखते ही देखते वे सब कुँए में बिला गये | लोगों ने काँटा डालकर कुँए को थहाया ; मगर किसी का कोई पता नहीं चला | उस गाँव में कोई भी ऐसा नहीं बचा था ,जो कसबे तक जाकर कोई और मदद ला पाता जिससे …|
पुलिस ने शवों का पंचनामा कर लिया | उनके कान सब सुन रहे थे ;मगर देह ? देह वैसी ही कठुआई सी खड़ी रही | लाशें पानी में फूल गयी थीं | सो जल्दी ही दफ़न कफन करना था | लोग शवों को गाँव ले गये | लोग भी चले गये ;मगर वे वैसी ही खड़ी थीं |
“ये बाई चल न | नइ तो दफन कफन को देरी होयेंगा |” सत्या की आजो ने कहा ;मगर वे वैसी ही खड़ी रहीं |
“ये पोरगी ?चल न रे ?”आजो ने उन्हें पकड़कर झिझोड़ा और जोर से रो पड़ीं |
उन्होंने उनकी ओर देखा | देर तक टकटकी लगाये उन्हें ही देखती रहीं | फिर रुदन का एक सोता सा फूटा और वे उनसे लिपट गयीं | उनका रुदन कलेजा चीरने लगा | भास्कर को पूरा गाँव चाहता था ;मगर आजो के लिए वे उनके सतिया से कम नहीं थे | बहुत चाहती थीं उन्हें | सो दोनों देर तक रोती रहीं | जी भर रो लेने के बाद वे गाँव पहुँची | गाँव वालों में शव को दफनाने की प्रथा थी | वहीं पास ही उनका कब्रिस्तान था | सो सबने तय किया पहले भास्कर की अंतयेष्ठी करके ,फिर बाकी शव दफनाये जाएँ | भास्कर की अर्थी तैयार थी | भास्कर का और कोई तो था नहीं | सो लोगों को उनकी ही प्रतीक्षा थी | उन्होंने देखा भास्कर के चेहरे पर गुलाल लगा हुआ था और उनके गले में पत्तियों की माला डली थी | यह इधर की परम्परा थी |
“सुनो ! हम अपना ब्याह इन्हीं तरह एकदम सादगी करेंगे | कोई ताम झाम नहीं | फूल की माला भी नहीं | बस सरइ (साल) के पत्तों की माला डाल कर एक दूसरे के हो जायेंगे | ”
“जब कोई ताम झाम नहीं करना है ,तो क्यों न आज ही…| ”
“चाहता तो मैं भी हूँ ;मगर पानी ? यह जिम्मेदारी …..? पर फिकर नको ? ये बरस सब हो जायेगा ? तुम देखना ये बरस सरइ में खूब हरियर पाना (पत्ते ) आयेगा | उससे मैं माला बनाऊंगा | दो माला समझी | ”
तभी लू का एक थपेड़ा लगा और यादों के शीतल झोंके बिखर गये | उनकी नजरें सत्या की दूवारी की ओर उठीं | देखा सरइ का पेड़ हरे हरे पत्तों से भरा हुआ था | मन में एक हूल सी उठी और आँखें बरस पड़ीं | फिर सरइ के मुलायम मुलायम पत्ते तोड़े | उन्हें आपस में गूँथकर माला बनाई और भास्कर के गले में डाल ,उनसे लिपट गयीं और बुक्का फाड़कर रो पड़ीं | आँसू रुक ही नहीं रहे थे ;मगर उन्हें बरबस रोका और उठकर अर्थी का एक बाँस थाम लिया |
अंत्येष्ठी के दसवें दिन ,उसी कुँए के किनारे नहान रखा गया | देखा पानी से भरे कई घड़े रखे थे | उन्होंने अंजली में जल भरा | उसे गंगाजल की तरह अपने उपर छिड़का और घड़े का सारा पानी कुँए में उड़ेल दिया था |
टन्न- टन्न घड़ी फिर बज उठी | उनकी नजरें भास्कर की तस्वीर पर जा ठहरीं ‘ पानी की कितनी बड़ी कीमत चुकाई है मैंने और लोग कहते हैं कि पानी जैसी चीज.. ! बदलनी ही होगी यह सोच | बदलने ही होंगे वो सारे मुहावरे जो पानी को यूँ ….| ’

• संपर्क –
ए/21, स्टील सिटी, अवंती विहार रायपुर छत्तीसगढ़
• 98932 94248

❤❤❤❤❤❤

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

छत्तीसगढ़ में इबोला की आहट: दुर्ग-भिलाई में मिले तीन संदिग्ध मरीज, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में इबोला की आहट: दुर्ग-भिलाई में मिले तीन संदिग्ध मरीज, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

छत्तीसगढ़ के पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 149 संविदा पदों पर होगी भर्ती, प्रोफेसर-असिस्टेंट प्रोफेसर और सीनियर रेजीडेंट्स की होगी नियुक्ति
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 149 संविदा पदों पर होगी भर्ती, प्रोफेसर-असिस्टेंट प्रोफेसर और सीनियर रेजीडेंट्स की होगी नियुक्ति

तेल संकट के बीच मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, ATF के के दाम स्थिर करने लिए 10000 करोड़ के फंड का किया ऐलान
breaking international

तेल संकट के बीच मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, ATF के के दाम स्थिर करने लिए 10000 करोड़ के फंड का किया ऐलान

नए शैक्षणिक सत्र से पहले सरकारी स्कूलों के छात्रों को बड़ी राहत, एक साथ मिलेंगे यूनिफॉर्म के दो सेट
breaking Chhattisgarh

नए शैक्षणिक सत्र से पहले सरकारी स्कूलों के छात्रों को बड़ी राहत, एक साथ मिलेंगे यूनिफॉर्म के दो सेट

खेती केवल आजीविका नहीं, हमारी संस्कृति और पहचान का आधार : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
breaking Chhattisgarh

खेती केवल आजीविका नहीं, हमारी संस्कृति और पहचान का आधार : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

कभी गोलियों की गूंज, अब बच्चों के सपनों की आवाज
breaking Chhattisgarh

कभी गोलियों की गूंज, अब बच्चों के सपनों की आवाज

मुख्यमंत्री ने बिहान की दीदियों को सौंपी आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के तहत टाटा मैजिक वाहन
breaking Chhattisgarh

मुख्यमंत्री ने बिहान की दीदियों को सौंपी आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के तहत टाटा मैजिक वाहन

तमिलनाडु में बंधक बने छत्तीसगढ़ के 50 श्रमिकों को मिली आजादी, जांजगीर-चांपा प्रशासन की तत्परता से हुई सुरक्षित घर वापसी
breaking Chhattisgarh

तमिलनाडु में बंधक बने छत्तीसगढ़ के 50 श्रमिकों को मिली आजादी, जांजगीर-चांपा प्रशासन की तत्परता से हुई सुरक्षित घर वापसी

छत्तीसगढ़ में फिर बढ़ेगी गर्मी, लेकिन बारिश-अंधड़ का भी अलर्ट… रायपुर समेत कई जिलों में बदलेगा मौसम
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में फिर बढ़ेगी गर्मी, लेकिन बारिश-अंधड़ का भी अलर्ट… रायपुर समेत कई जिलों में बदलेगा मौसम

छत्तीसगढ़ के पूर्व IAS अधिकारी बीकेएस रे का निधन, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के पूर्व IAS अधिकारी बीकेएस रे का निधन, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक

शासकीय योजनाओं का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचे, प्रशासन संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ करे कार्य : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
breaking Chhattisgarh

शासकीय योजनाओं का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचे, प्रशासन संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ करे कार्य : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

’गाँव के द्वार पहुँची डिजिटल सरकार: बड़ेकनेरा का ‘सेवा सेतु’ मॉडल बना ग्रामीण सुशासन की नई मिसाल – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय’
breaking Chhattisgarh

’गाँव के द्वार पहुँची डिजिटल सरकार: बड़ेकनेरा का ‘सेवा सेतु’ मॉडल बना ग्रामीण सुशासन की नई मिसाल – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय’

’महिला सशक्तिकरण और मातृ-शिशु कल्याण योजनाओं से बदल रही जिंदगी: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय’
breaking Chhattisgarh

’महिला सशक्तिकरण और मातृ-शिशु कल्याण योजनाओं से बदल रही जिंदगी: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय’

सुप्रीम कोर्ट को 5 नए जज मिले, जजों की संख्या अब 37 हुई, जानें इससे क्या फायदा होगा
breaking National

सुप्रीम कोर्ट को 5 नए जज मिले, जजों की संख्या अब 37 हुई, जानें इससे क्या फायदा होगा

10वीं-12वीं के टॉपर्स को मिलेंगे 2-2 लाख रुपये, शीर्ष 10 बच्चों की सूची तैयार
breaking Chhattisgarh

10वीं-12वीं के टॉपर्स को मिलेंगे 2-2 लाख रुपये, शीर्ष 10 बच्चों की सूची तैयार

जनता के प्रति संवेदनशीलता ही सुशासन की सबसे बड़ी कसौटी : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
breaking Chhattisgarh

जनता के प्रति संवेदनशीलता ही सुशासन की सबसे बड़ी कसौटी : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

म्यांमार में मचा मौत का ‘महातांडव’, विस्फोट में उड़ा 100 से ज्यादा घर, 55 लोगों की मौत
breaking Chhattisgarh

म्यांमार में मचा मौत का ‘महातांडव’, विस्फोट में उड़ा 100 से ज्यादा घर, 55 लोगों की मौत

जून की शुरुआत के साथ बदले कई बड़े नियम, LPG सिलेंडर से लेकर कार और UPI तक का सीधा असर आपकी जेब पर
breaking National

जून की शुरुआत के साथ बदले कई बड़े नियम, LPG सिलेंडर से लेकर कार और UPI तक का सीधा असर आपकी जेब पर

डॉ. रमन सिंह की नाराजगी पर मुख्यमंत्री साय ने दी प्रतिक्रिया, मामले की जांच के निर्देश देते हुए कही यह बात
breaking Chhattisgarh

डॉ. रमन सिंह की नाराजगी पर मुख्यमंत्री साय ने दी प्रतिक्रिया, मामले की जांच के निर्देश देते हुए कही यह बात

भाजपा नेता से अभद्र व्यवहार करना पड़ा भारी, दुर्ग जनपद पंचायत सीईओ रुपेश पांडे निलंबित, जानिए पूरा मामला
breaking Chhattisgarh

भाजपा नेता से अभद्र व्यवहार करना पड़ा भारी, दुर्ग जनपद पंचायत सीईओ रुपेश पांडे निलंबित, जानिए पूरा मामला

कविता

गीत – डॉ. दीक्षा चौबे
poetry

गीत – डॉ. दीक्षा चौबे

इस माह की नवाकुंर कवयित्री – सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

इस माह की नवाकुंर कवयित्री – सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

इस माह के बाल साहित्यकार : कमलेश चंद्राकर
poetry

इस माह के बाल साहित्यकार : कमलेश चंद्राकर

साहित्यनामा – अमृता मिश्रा
poetry

साहित्यनामा – अमृता मिश्रा

इस माह के ग़ज़लकार : शुभेंदु बागची ‘मुन्तज़िर’
poetry

इस माह के ग़ज़लकार : शुभेंदु बागची ‘मुन्तज़िर’

कवि और कविता : हरिप्रकाश गुप्ता ‘सरल’
poetry

कवि और कविता : हरिप्रकाश गुप्ता ‘सरल’

इस माह के कवि : प्रकाशचंद्र मण्डल
poetry

इस माह के कवि : प्रकाशचंद्र मण्डल

कवि और कविता : दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
poetry

कवि और कविता : दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

कवि और कविता : कमलेश चंद्राकर
poetry

कवि और कविता : कमलेश चंद्राकर

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

कविता श्रृंखला आरंभ : डॉ. शिरोमणि माथुर
poetry

कविता श्रृंखला आरंभ : डॉ. शिरोमणि माथुर

कविता श्रृंखला ‘आरंभ’ में : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

कविता श्रृंखला ‘आरंभ’ में : दीप्ति श्रीवास्तव

कृति आरंभ : कविता आसपास- दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

कृति आरंभ : कविता आसपास- दीप्ति श्रीवास्तव

स्तम्भ ‘आरंभ’ : इस माह की कवयित्री- दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

स्तम्भ ‘आरंभ’ : इस माह की कवयित्री- दीप्ति श्रीवास्तव

कविता आसपास स्तम्भ ‘आरंभ’ – संजय एम तरानेकर
poetry

कविता आसपास स्तम्भ ‘आरंभ’ – संजय एम तरानेकर

रचना और रचनाकार- पल्लव चटर्जी
poetry

रचना और रचनाकार- पल्लव चटर्जी

होली विशेष [दो फागुनी रचना यें] – तारकनाथ चौधुरी
poetry

होली विशेष [दो फागुनी रचना यें] – तारकनाथ चौधुरी

इस माह के कवि और कविता – महेश राठौर ‘मलय’
poetry

इस माह के कवि और कविता – महेश राठौर ‘मलय’

रंग पर्व पर विशेष- डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’
poetry

रंग पर्व पर विशेष- डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’

कहानी

लेख : कैलाश जैन बरमेचा
story

लेख : कैलाश जैन बरमेचा

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव
story

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय
story

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
story

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
story

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
story

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
story

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
story

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
story

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
story

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
story

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
story

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

story

रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

story

रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

story

कहानी : संतोष झांझी

story

कहानी : ‘ पानी के लिए ‘ – उर्मिला शुक्ल

लेख

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
Article

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

Article

तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

Article

लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
Article

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
Article

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
Article

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
Article

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
Article

🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
Article

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
Article

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
Article

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

Article

🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

Article

🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

Article

🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

⏩ 12 अगस्त-  भोजली पर्व पर विशेष
Article

⏩ 12 अगस्त- भोजली पर्व पर विशेष

Article

■पर्यावरण दिवस पर चिंतन : संजय मिश्रा [ शिवनाथ बचाओ आंदोलन के संयोजक एवं जनसुनवाई फाउंडेशन के छत्तीसगढ़ प्रमुख ]

Article

■पर्यावरण दिवस पर विशेष लघुकथा : महेश राजा.

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

Politics

भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

breaking Politics

भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

Politics

स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

Politics

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

breaking Politics

राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
Politics

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
Politics

मरवाही उपचुनाव

Politics

प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

Politics

ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

breaking Politics

अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
breaking National Politics

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

breaking Politics

हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

breaking Politics

पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन