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क्या मरने के बाद भी भरना पड़ता है ITR? जानिए कौन करता है फाइल और क्या है प्रोसेस

ITR Filing After Death: अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है, अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए, तो क्या उसके नाम से भी आखिरी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना पड़ता है? और अगर हां, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
क्योंकि वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 15 सितंबर 2025 तय की गई है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आयकर विभाग ने इसके लिए कौन से नियम बनाए हैं.
नियम क्या कहता है? (ITR Filing After Death)
आयकर अधिनियम 1961 की धारा 159 के अनुसार: यदि किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है, लेकिन उस वित्त वर्ष में उसकी आय हुई है, तो उसका ITR फाइल करना जरूरी होता है.
यह जिम्मेदारी मृतक के कानूनी वारिस (Legal Heir) या नॉमिनी की होती है.
अगर मृतक ने वसीयत (Will) बनाई है, तो उसमें जिस व्यक्ति को अधिकार दिए गए हैं, वही आखिरी ITR फाइल करेगा.
सरल भाषा में कहें तो, जिसे मृतक की संपत्ति या इनकम का अधिकार मिलेगा, उसी पर टैक्स रिटर्न फाइल करने की जिम्मेदारी भी होगी.
कानूनी वारिस को क्या करना होगा? (ITR Filing After Death)
मृतक की जगह ITR फाइल करने के लिए वारिस को कुछ स्टेप्स पूरे करने होते हैं:
- सबसे पहले खुद को Representative Assessee के रूप में पंजीकृत करना होगा.
- इसके लिए इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करके ‘Register as Representative’ ऑप्शन चुनना होगा.
इसके बाद ये डॉक्यूमेंट्स जमा करने होंगे:
- मृतक का PAN कार्ड
- Death Certificate
- Legal Heir Certificate / उत्तराधिकार प्रमाण पत्र
- वारिस के बैंक अकाउंट डिटेल्स
उत्तराधिकारी साबित करने की प्रक्रिया (ITR Filing After Death)
- पोर्टल पर अकाउंट लॉगिन करें और ‘Register as Representative’ सेक्शन में जाएं.
- यहां Legal Heir का विकल्प चुनें.
- मांगी गई सभी जानकारी भरें और आवश्यक डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें.
- प्रक्रिया पूरी होने के बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके आवेदन को वेरिफाई करेगा.
- रजिस्ट्रेशन मंजूर होने के बाद ही आप मृतक व्यक्ति की ओर से ITR फाइल कर पाएंगे.
बैंक अकाउंट वेरिफिकेशन जरूरी (ITR Filing After Death)
ITR भरने के बाद यदि कोई रिफंड बनता है तो वह कानूनी वारिस को मिलेगा. इसके लिए जरूरी है कि वारिस का बैंक अकाउंट पहले से ही Income Tax Portal पर प्री-वैलिडेटेड (Pre-validated) हो.
किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसका आखिरी ITR फाइल करना अनिवार्य है. यह जिम्मेदारी उस व्यक्ति की होती है जो उसका कानूनी उत्तराधिकारी या नॉमिनी हो. यानी टैक्स की जिम्मेदारी मौत के साथ खत्म नहीं होती, बल्कि उसे पूरा करना वारिस का कर्तव्य बन जाता है.
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