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ट्रंप का टैरिफ बम कितना खतरनाक? फार्मा से लेकर ऑटो तक हिल गए शेयर, निवेशकों के लिए अब कौन-सी होगी सही रणनीति?

US Tariff Impact on Pharma: शेयर बाजार में इन दिनों बेचैनी बढ़ी हुई है और इसकी सबसे बड़ी वजह है अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप का नया टैरिफ ऑर्डर. ट्रंप ने घोषणा की है कि ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा, जो 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी होगा. यह खबर भारतीय फार्मा सेक्टर के लिए किसी झटके से कम नहीं है. हालांकि, जिन कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स अमेरिका में हैं, उन्हें इस नियम से कुछ राहत मिल सकती है.
लेकिन यहीं कहानी खत्म नहीं होती. ट्रंप ने किचन कैबिनेट और बाथरूम वैनिटीज पर 50% टैरिफ और हेवी ट्रक इंपोर्ट पर 25% टैरिफ का भी ऐलान किया है. इसका सीधा असर उन भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा जो अमेरिका में एक्सपोर्ट-आधारित कारोबार करती हैं.
किन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा असर? (US Tariff Impact on Pharma)
- फार्मा: सन फार्मा, सिप्ला, डॉ. रेड्डी, ल्यूपिन और ऑरोबिंदो जैसी कंपनियां दबाव में आ सकती हैं.
- ऑटो और ऑटो पार्ट्स: भारत फोर्ज, मदरसन सूमी और सोना कॉमस्टार जैसी कंपनियों पर टैरिफ का असर साफ दिखेगा.
- टेक्सटाइल: हाल में आई रिलीफ रैली अब फीकी पड़ सकती है.
- आईटी: पहले से कमजोर हो रहे सेक्टर पर एक्सेंचर के नतीजों के बाद और दबाव दिख रहा है.
यानी, साफ संकेत हैं कि अमेरिका से जुड़ी कंपनियां आने वाले दिनों में अंडरपरफॉर्म करेंगी.
आज के बाजार संकेत (US Tariff Impact on Pharma)
- सुप्रीम कोर्ट में JSW स्टील-भूषण केस और वोडा-आइडिया केस पर सुनवाई बाजार के मूड को प्रभावित कर सकती है.
- विदेशी निवेशकों (FIIs) ने कैश मार्केट में 5000 करोड़ रुपये की बिकवाली की है, जो 29 अगस्त के बाद सबसे बड़ी सेलिंग है.
- पुट कॉल रेश्यो (PCR) 0.68 पर आ गया है, जो दर्शाता है कि बाजार बेहद ओवरसोल्ड है और यहां से रिकवरी संभव है.
निवेशकों के लिए नई रणनीति (US Tariff Impact on Pharma)
- अब वक्त है कि निवेशक अपनी रणनीति बदलें.
- एक्सपोर्ट-आधारित कंपनियों पर आंख बंद करके दांव लगाना खतरनाक साबित हो सकता है.
- ऐसे शेयर चुनें जो घरेलू अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं और टैरिफ से पूरी तरह अछूते हैं.
- डिफेंस, ऑटो (डोमेस्टिक), FMCG सेक्टर में लॉन्ग के अवसर तलाशें.
- आईटी और फार्मा से फिलहाल दूरी बनाना ही सुरक्षित विकल्प है.
PM मोदी ने भी साफ कहा है कि हमें आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ना होगा. इसलिए आने वाले समय में निवेशकों को घरेलू थीम पर आधारित कंपनियों पर फोकस करना चाहिए.
निफ्टी रणनीति (US Tariff Impact on Pharma)
सपोर्ट: 24,800-24,850 (61.8% रिट्रेसमेंट), इसके नीचे 24,750-24,800 (पुट राइटर्स का जोन)
रजिस्टेंस: 24,950-25,050 और बड़ा रजिस्टेंस 25,100-25,150
रिकवरी की स्थिति में शॉर्ट कवरिंग रैली देखने को मिल सकती है.
बैंक निफ्टी रणनीति (US Tariff Impact on Pharma)
सपोर्ट: 54,800-54,850 (100 DEMA), इसके नीचे 54,500-54,600 (ऑप्शन जोन)
रजिस्टेंस: 55,000-55,100 (10 और 20 DEMA) और 55,400-55,500 (ऑप्शन जोन)
54,800 के ऊपर टिके रहने पर खरीदारी करें, जबकि 55,100 से रिजेक्शन पर शॉर्ट का मौका बनेगा.
ट्रंप का यह टैरिफ केवल फार्मा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय बाजार की रणनीति को बदलने वाला कदम है. अब निवेशकों को तय करना होगा कि वे अमेरिकी टैरिफ के खतरे वाले शेयरों में फंसे रहेंगे या घरेलू ग्रोथ की कहानी पर दांव लगाएंगे.
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