■छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल : •डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’.
5 years ago
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●अंधरा पोथी बाँचत हे
-डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’
[ कोरबा-छत्तीसगढ़ ]
अँधरा पोथी बाँचत हे
भैरा धुन मा नाचत हे
मंत्री अच्छा दिन आही
कहिके रोज़ लुभालत हे
खेत सुखा गे गरमी मा
बादर देख लुकावत हे
गाँव जगाए बर रतिहा
गूँगा हाँका पारत हे
डबरा के पानी पीके
जोखू प्यास बुझावत हे
पावत हे जेहा मौका
हमला आज भुनावत हे
देख कलपना चोला के
दूधमुंही टूरी हाँसत हे
●कवि संपर्क-
●79748-50694
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chhattisgarhaaspaas
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