कविता- संतोष झांझी
6 years ago
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•चोका जापानी कविता
-संतोष झांझी
[ भिलाई-छत्तीसगढ़ ]
उसनें कभी
कुछ भी नही कहा
यह भी चुप
कुछ कहा ही नही
ये न कहेगी
तुम भी न कहोगे
दोनो चुप हैं
दोनों चुप रहेंगे
मुखर होना
पल भर का सुख
दुख अनंत
कुछ मत कहना
एहसास है
दोनों पास पास है
नजरों मे हैं
नजरों के पास है
कुछ खुश हैं
पर हैं उदास भी
पाकर खोने
जैसी उलझन है
मौन हल है
तुम जहाँ रहना
खुश रहना
खुश रहे वह भी
शायद कभी
न रहनें पर भी
तुम खुश रहना
[ ●प्रगतिशील विचारधारा की कवयित्री संतोष झांझी किसी परिचय की मोहताज़ नहीं. ●देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में निरन्तर छप रही हैं, मंचों में भी सक्रिय हैं.
●आज़ ‘चोका जापानी कविता’ प्रस्तुत है, कैसी लगी,लिखें. -संपादक ]
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chhattisgarhaaspaas
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