कविता, स्त्री -सुरेश वाहने 5 years ago स्त्री हो सकती है मछली शोभा बढा़ती एक्वेरियम में कैद स्त्री हो सकती है मछली नदी के धारा के विरूद्ध कुशल तैराक स्त्री हो सकती...
बाल गीत, प्यारी नानी- डॉ. बलदाऊ राम साहू 5 years ago गुस्सा छोड़ो प्यारी नानी कहो न तुम कथा-कहानी मेघ कहाँ से लाता होगा भर-भर कर इतना पानी। चंदा मामा दूर-दूर क्यों हमदम हमसे रहते हैं...
कविता- विद्या गुप्ता दुर्ग, छत्तीसगढ़ 5 years ago आतंकित हो धरती घूम रही है स्तब्ध सबके चेहरे पर चमक रही है दुर्योधन की आंखें हाथों में दुशासन सब ने पकड़ रखा है धरती...
बाल गीत, नन्हे राही -डॉ. बलदाऊ राम साहू 5 years ago पूछ रहा था मुझसे नानू चाँद कहाँ से आया होगा औ' सितारों को आसमाँ में जाने कौन फैलाया होगा। रोज सवेरे पूरब में ही सूरज...
कोरबा के महत्व एवं प्राकृतिक सौंदर्य पर- 5 years ago ●हिन्दकी-ऊर्जावान हूँ मैं -डॉ.माणिक विश्वकर्मा'नवरंग' -कोरबा, छत्तीसगढ़ हिंदकी - ऊर्जाधानी हूँ मैं कोयलांचल हूँ मैं , ऊर्जाधानी हूँ मैं राम के वन गमन की कहानी...
ग़ज़ल, महफूज़ हम रखेंगे अपनी ये ज़िदगी को- गीता विश्वकर्मा ‘नेह’ 5 years ago महफूज़ हम रखेंगे अपनी ये ज़िदगी को ये वायरस करोना निगले न आदमी को । खानाबदोश होकर रस्ते में फिर रहे हैं समझेगा कौन उसकी...
अनामिका चक्रवर्ती की कविताएं 5 years ago 1-- शायद और काश शायद और काश के बीच एक लंबी सँकरी गली होती है जिसके शुरू में शायद और आखिरी मुहाने पर काश होता...
बाल कविता, नन्ही गौरैय्या -डॉ. बलदाऊ राम साहू 5 years ago नन्ही गौरैया फिर आना चीं-चीं, चूँ-चूँ गीत सुनाना। फुर्र-फुर्र तुम उड़ जाती हो मुझको छोड़ चली जाती हो इस बार तुम रूक भी जाना चीं-चीं,...
कविता, इन दिनों बच्चे -पल्लवी मुखर्जी, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ 5 years ago फूलों को तो बस मुस्कुराना है खिलखिलाना है बेहयाई की भी हद है जबकि इन दिनों दुनिया के तमाम बच्चें नहीं जाते आकाश के नीचे...
बाल गीत, पम्पकिन खाओ -डॉ. बलदाऊ राम साहू 5 years ago कद्दू की जब बनती सब्जी मुन्नू भैया करे बहाना मुझको भूख नहीं है दादी खाना तुम मत आज बनाना। थोड़ी - सी मैगी खाई है...