कविता, आज खाने में क्या बना रही हो- बिंदु जैन, लखनऊ-उत्तरप्रदेश 6 years ago आज खाने में क्या बना रही हो पूछने वाले बच्चे बस मैगी ही खाते हैं आजकल.... गरमागरम फूली रोटी खाने वाले.. सिर्फ खाते दाल और...
करवाचौथ का चाँद -विक्रम ‘अपना’, अहिवारा-छत्तीसगढ़ 6 years ago करवाचौथ का चाँद (हास्य रचना) चाँद को देखकर चाँद भी शरमाया था करवाचौथ का त्योहार जो आया था बीबी परेशान शौहर अनजान नाना पकवान खुशियाँ...
ग़ज़ल, संतोष झांझी- भिलाई-छत्तीसगढ़ 6 years ago तुझसे रिश्ता कोई पुराना है न ही कुछ खोना न ही पाना है तुझसे रिश्ता कोई पुराना है न ही कुछ खोना न ही पाना...
ग़ज़ल, रिश्ते नाते बहुमंजिले हैं सावधान! सब रेत के टीले हैं- परमेश्वर वैष्णव, भिलाई-छत्तीसगढ़ 6 years ago रिश्ते नाते बहु मंजिलें हैं सावधान ! सब रेत के टीले हैं स्वार्थ, गुमान के तूफान में कई बिछुड़े और कई मिले हैं हरा भरा...
ग़ज़ल -शुचि ‘भवि’, भिलाई-छत्तीसगढ़ 6 years ago है इश्क़ फ़क़त तुमसे,फ़साने नहीं आते सच बोलते हैं हमको बहाने नहीं आते है इश्क़ फ़कत तुमसे, फ़साने नहीं आते सच बोलते हैं हमको बहाने...
कविता, समस्या- सुरेश वाहने, कुम्हारी-छत्तीसगढ़ 6 years ago समस्या (कविता) बड़ी समस्या है कि समस्या को समस्या है समस्या की समस्या का समाधान है मगर समस्या है कि समस्या चाहती है कि समस्या...
कविता, शरद पूर्णिमा- गीता विश्वकर्मा ‘नेह’, कोरबा-छत्तीसगढ़ 6 years ago शरद पूर्णिमा का गीत चाँदनी छिटकी शरद की खिड़कियों से आ रही, मुग्ध है मन,दृष्टि को भी आह कितना भा रही । बह रही शीतल...
कविता, शरद का चाँद नटखट- सरोज तोमर, भिलाई-छत्तीसगढ़ 6 years ago शरद का चाँद नटखट ! शरद का चाँद नटखट ,हम अकेले । बड़ा सूना-सा पनघट ,हम अकेले । ये चुनर दूधिया है चाँदनी की ,...
ग़ज़ल, मैं समझी थी अक्सर वो आया करेंगे, पता था नहीं दिल दुखाया करेंगे- झरना मुख़र्जी, वाराणसी-उत्तरप्रदेश 6 years ago मैं समझी थी अक्सर वो आया करेंगे पता था नहीं दिल दुखा़या करेंगे। भले दूर कर दो निगाहों से अपने मगर हम तो दर पर...
शरद पूर्णिमा के अवसर पर विशेष- किशोर कुमार तिवारी 6 years ago आज शरद पूर्णिमा है आज चाँद निखरेगा आधी रात को अम्बर से अमृत बरसेगा । जो पी लिया तो समझो तकदीर वाला है जो ना...