कविता आसपास : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय, वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश] 3 years ago 🌸 सूरज अंधेरे से परेशान सूरज कल ही अपनी आभा खो बेचैन भागता हुआ थका-हारा चला गया था संध्या के साथ शयन कक्ष में चिंतन...
रचना आसपास : श्रीमती दीप्ति श्रीवास्तव 3 years ago 🌸 हास्य व्यंग्य : मुस्कुराने की वजह - दीप्ति श्रीवास्तव [ चौहान टाउन, जुनवानी भिलाई, जिला - दुर्ग, छत्तीसगढ़ ] अब क्या बतायें जनाब आज...
रचना आसपास : बलदाऊ राम साहू 3 years ago 🌸 मंजिल पाना है - बलदाऊ राम साहू [ आदर्श नगर, दुर्ग, छत्तीसगढ़ ] आगू-आगू चलके भइया मंज़िल पाना हे लेके सुग्घर भाव जगत मा...
कविता आसपास : डॉ. मंजुला पांडेय [हल्दवानी, जिला – नैनीताल, उत्तराखंड] 3 years ago 🌸 मेरे अपने भागता रहा जिंदगी भर तलाशता रहा सुकून चला गया दूर बहुत दूर छोड़कर शांत एकांत प्रकृति का साथ उड़ते घनेरे बादल हरे-भरे...
वर्षा ऋतु विशेष : मिलन की रूत आ गई है… – एन एल मौर्य ‘ प्रीतम ‘ [भिलाई, छत्तीसगढ़ ] 3 years ago 🌸 मिलन की रूत आ गई है... जेठ की तपन से बाग बगीचे झुलसे धरा बेचैन हो तड़फने लगी थी फहराती हुई गेसुएं काली घटा...
ईद पर विशेष : ग़ज़ल : नवेद रज़ा दुर्गवी 3 years ago 🌸 गिले शिकवे मिटे हम वो रुका इस ईद पर भेजे... - नवेद रज़ा दुर्गवी { केलाबाड़ी, दुर्ग, छत्तीसगढ़ } 1)गिले शिकवे मिटे हम वो...
विशेष : शादी की 32वीं सालगिरह पर पत्नी के नाम… डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय, वेंकटगिरी, आंध्रप्रदेश] 3 years ago प्रिये तुम मेरे कोट की बाईं ओर लगी अधखुली कली-सी परिणय के बाद आई थी जीवन में कल्पवृक्ष की तरह। मेरे सुख-दुख की संगी-साथी मेरी...
ग़ज़ल : तारक नाथ चौधुरी 3 years ago 🌸 जबसे तुम्हारे गीत मैं गुनगुनाने लगा... - तारक नाथ चौधुरी [चरोदा - भिलाई, जिला - दुर्ग, छत्तीसगढ़] जबसे तुम्हारे गीत मैं गुनगुनाने लगा। दुःख...
कविता आसपास : ओमवीर करन 3 years ago 🌸 उनसे शिकायत - ओमवीर करन [रिसाली सेक्टर, भिलाई, जिला - दुर्ग, छत्तीसगढ़] किसी ने अच्छा और समझदार कहा मुझे, मैं सच समझकर खो गया...
रचना आसपास : किसान और आत्महत्या विपरीत ध्रव – विद्या गुप्ता [दुर्ग छत्तीसगढ़] 3 years ago किसान और आत्महत्या विपरीत ध्रुव ..... अपने मृत्युलोक में किसान जलता, ठिठुरता, टूटता है टूट कर फिर जुड़ता है एक बार नहीं कई कई बार...