पिता दिवस पर विशेष : पिता उवाच – अरुण कुमार निगम [दुर्ग छत्तीसगढ़] 3 years ago मैं क्या जानूँ गंगा-जमुना, सरस्वती है मेरे मन में मैं ही जानूँ कब बहती है, यह अन्तस् के सूने वन में।। पारस हूँ, पाषाण समझ...
पिता दिवस पर विशेष : पिता पर दोहे – डॉ. अशोक आकाश [बालोद छत्तीसगढ़] 3 years ago पिता घरों का नींव है, पिता हमारी शान। कड़वा रुखवा नीम का, इसमें सबकी जान।। 1 ।। कर्म करे जैसा पिता, संतति रंगता रंग। डोरी...
कविता आसपास : तेजनारायण राय [जिला – दुमका, झारखंड] 3 years ago •अनपढ़ पिता का अपने बेटे को लेकर सपना... ▪️▪️▪️▪️▪️ •संपर्क - •62075 86995 🟥🟥🟥
कविता आसपास : नरेंद्र देवांगन ‘ देव ‘ {मिनाक्षी नगर, दुर्ग, छत्तीसगढ़} 3 years ago ▪️ परिवर्तन प्रकृति की प्यास यूँ ही नहीं आते पतझड़ों के मौसम, लेके आती है अपने संग, कुटिल मुस्कानों वाली जलन की चुभन, यूं ही...
कविता आसपास : उज्ज्वल पांडेय [धनबाद झारखंड] 3 years ago •शातिर कॉरपोरेट वे आए और पत्थर काट कर ले गए हमारे झारखंड से कोयला ले गए अभ्रक ले गए बॉक्साइट ले गए ग्रेफाईट ले गए...
रचना आसपास : तारक नाथ चौधुरी [चरोदा, जिला – दुर्ग, छत्तीसगढ़] 3 years ago { बालासोर रेल दुर्घटना का हृदय विदारक दृश्य और असम्पूर्ण प्रेम की लिखित गवाही देती रक्त रंजित डायरियां देख संवेदनाओं के ज्वार में जो कुछ...
कविता आसपास ; महेश राठौर ‘ मलय ‘ [जांजगीर, छत्तीसगढ़] 3 years ago •चिनारों को आसमान से आँख मिलाते घनी हरियाली को अपनी बाँहों में समेटे ऊँचे और विशाल तनों के साथ धरती पर मजबूती के साथ खड़े...
5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : बलदाऊ राम साहू 3 years ago •जीवन में खुशियाँ हम लाएं आओ घर-घर अलख जगाएँ सुंदर पर्यावरण बनाएँ। काट रहे हैं जो वृक्षों को उनको जाकर हम समझाएँ। व्यर्थ बहाए पानी...
5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : दिलशाद सैफी 3 years ago •हाँ मैं हूँ पेड़ हाँ मैं पेड़ हूँ....! विशाल बाहे फैलाये हुए करती स्वागत तुम्हारा मुस्कुरा कर.....,, देती जीवन दान तुम्हें, प्राण वायु बन मेरी...
5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष : डॉ. बीना सिंह ‘ रागी ‘ 3 years ago •पर्यावरण बचाओ आधुनिकता की यह कैसी रफ्तार है खड़ा है मानव जैसे मौत की कतार है जंगल वन पेड़ पौधे काटने छांटने की होड़ लगी...