रचना आसपास : तारक नाथ चौधुरी [चरोदा, जिला – दुर्ग, छत्तीसगढ़] 3 years ago { बालासोर रेल दुर्घटना का हृदय विदारक दृश्य और असम्पूर्ण प्रेम की लिखित गवाही देती रक्त रंजित डायरियां देख संवेदनाओं के ज्वार में जो कुछ...
कविता आसपास ; महेश राठौर ‘ मलय ‘ [जांजगीर, छत्तीसगढ़] 3 years ago •चिनारों को आसमान से आँख मिलाते घनी हरियाली को अपनी बाँहों में समेटे ऊँचे और विशाल तनों के साथ धरती पर मजबूती के साथ खड़े...
5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : बलदाऊ राम साहू 3 years ago •जीवन में खुशियाँ हम लाएं आओ घर-घर अलख जगाएँ सुंदर पर्यावरण बनाएँ। काट रहे हैं जो वृक्षों को उनको जाकर हम समझाएँ। व्यर्थ बहाए पानी...
5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : दिलशाद सैफी 3 years ago •हाँ मैं हूँ पेड़ हाँ मैं पेड़ हूँ....! विशाल बाहे फैलाये हुए करती स्वागत तुम्हारा मुस्कुरा कर.....,, देती जीवन दान तुम्हें, प्राण वायु बन मेरी...
5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष : डॉ. बीना सिंह ‘ रागी ‘ 3 years ago •पर्यावरण बचाओ आधुनिकता की यह कैसी रफ्तार है खड़ा है मानव जैसे मौत की कतार है जंगल वन पेड़ पौधे काटने छांटने की होड़ लगी...
5 जून विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : एन एल मौर्य ‘ प्रीतम ‘ 3 years ago •विरासत मरुस्थल में अकेला मानव जिसके चारो तरफ शवों का अम्बार लगा था कुल्हाड़ी से अपने ही सिर पर वार कर रहा था /पापी हूं,...
5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : प्रकाश चंद्र मण्डल 3 years ago •पौधे और बच्चे मैं ने--- बरसात के दिनों में बोया था एक छोटा सा पौधा न जाने कब वह पौधा पेड़ बन गया बहुत से...
5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : डॉ. नीलकंठ देवांगन 3 years ago •पेड़ लगावव दू चार पानी पवन दुनों जिनगी के सार जी के अधार ये गा संगी मन मं करव विचार मानो कहना हमार पेड़ लगावव...
5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : शुचि ‘ भवि ‘ 3 years ago •विश्व पर्यावरण दिवस सुनो चीत्कार तुम भी तो सुनो मैंने सुनी है वृक्ष की है अश्क,ज़ख़्म,फ़ुगां सब देखे आज मैंने उसके तुम भी तो देखो,,...
अंतरराष्ट्रीय साइकिल दिवस पर दो बाल कविता – बलदाऊ राम साहू 3 years ago •मेरी साइकिल मेरी साइकिल बड़ी निराली, रंग - बिरंगी, नीली - काली। चलती है वह सरपट, सर-सर, मैं दौड़ाऊँ इसे सड़क पर। इससे मेरी मीत...