कवि और कविता : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]
🌸 नशा मुक्ति के इश्तहार निकले... करार जिन्हें,संगी समझ बैठा था। वो तो बस, दरिया की धार निकले।। रफ़्ता-रफ्ता, दिलों को रौंदते हुए। सुकून के...