होली विशेष : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल 3 years ago दोहा हिरण्यकश्यप असुर ने, पाया ढेरों वरदान । देय विष्णु पूजा नही, करने का फरमान ।। जलने बैठी आग में, भाव रखे ...
होली विशेष : डॉ. दीक्षा चौबे 3 years ago 🌸 होली गीत - डॉ. दीक्षा चौबे [ दुर्ग छत्तीसगढ़ ] मस्ती में निकले हुरियारे , सजकर आए टोली में । एक-दूजे को रंग डालें...
कविता आसपास : अनुवादित रचना : पल्लव चटर्जी 3 years ago •गणतंत्र की मंत्रणा •कवि : पल्लव चटर्जी •अनुवाद : तारकनाथ चौधुरी [बांग्ला से हिंदी में अनुवाद] पारदर्शी काँच से घिरा रेस्तराँ करीने से सजे डाइनिंग...
कवि और कविता : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश] 3 years ago 🌸 नशा मुक्ति के इश्तहार निकले... करार जिन्हें,संगी समझ बैठा था। वो तो बस, दरिया की धार निकले।। रफ़्ता-रफ्ता, दिलों को रौंदते हुए। सुकून के...
कवि और कविता : रमाकांत छत्रसाल बडारया. 3 years ago 🌸 स्वस्थ रहने की करो तैयारी - दुर्ग [छत्तीसगढ़] स्वास्थ्य पर दूषित प्रदूषित वायु का पड़ता गहरा असर है क्या तुमको इसकी खबर है आज...
कवि और कविता : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [ केंद्रीय विद्यालय, वेंकटगिरी,आंध्रप्रदेश ] 3 years ago 🌸 कमसिन उमर में ही... कमसिन उमर में ही,वो मर चुका था| उम्रदराज होने पर, सुपुर्दे खाक हुआ|| वो शहर से बाहर, गलीज़ चीजें सहेजता...
कवि और कविता : संध्या श्रीवास्तव [भिलाई : छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 संध्या सिंदूरी संध्या सिंदूरी आँचल समेट निकल पड़ी संध्यांचल की ओर लेकिन मुझे तो जाना था उस ओर जहां मैं प्रार्थना के अंतिम स्वर...
ग़ज़ल : दशरथ सिंह भुवाल [भिलाई छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 इस तरह आपसे जो मुलाकात थी... इस तरह आपसे जो मुलाकात थी यूँ कहें इश्क ही की शुरूआत थी हम मिले और यूँ राह...
कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी. 3 years ago 🌸 बीसे का वेलेंटाइन डे बीसे मरकर भूत हो गया, फाँसी दे गत मास, सुना है इमली की शाख पे करता अब वो निवास। आज...
कविता आसपास : दिलशाद सैफी [रायपुर छत्तीसगढ़ ] 3 years ago 🌸 सीलन दीवारों पे लगे सीलन सा है मेरा प्रेम जो एक बार चढ़ गया तो फिर चढ़ गया ख़ामोशी के साथ घुसपैठ किया है...