■कविता आसपास : सुनीता अग्रवाल [ राँची ] 4 years ago ♀ सखियाँ मेरी सखियाँ मेरी सारी सखि मुझे लगती बड़ी प्यारी है॥ दुनियाँ में ये सखियाँ सबसे न्यारी हैं॥ नहीं बताते मन की व्यथा तो,जाने...
■कविता आसपास : वीणा [ झुमरी तिलैया, झारखंड ] 4 years ago ♀ मौन संवादों के बीच मौन संवादों के बीच सांझ के धुंधलके में खिड़की से राह तकती स्त्री निहारती है ससुराल की गलियाँ और मन...
■छोटी कविता : मुस्कान – परमेश्वर वैष्णव. 4 years ago मेरी कविता सुनकर वे अन्तस् से वे लोट पोट हो गए कहा प्लीज एक और कविता सुनाइये मैने कहा हंसी के आगे किसी की क्या...
■बुद्ध पूर्णिमा के उपलक्ष्य में विशेष : डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ [रायपुर छत्तीसगढ़] 4 years ago ♀ गौतम बुद्ध पर दोहे ◆ अष्टमार्ग अपनाइए , रखिए ख़ुद को शुद्ध। सांसारिक सुख छोड़िए , बन जाएंगे बुद्ध।। ◆ वश में इन्द्रिय हो...
■अपनी बात : पीयूष कुमार [रामचंद्रपुर छत्तीसगढ़] 4 years ago [ ●पीयूष कुमार,उच्च शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ शासन में हिंदी के सहायक अध्यापक हैं. ●आकाशवाणी और दूरदर्शन से आलेखों का प्रसारण. ●राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में नियमित लेखन...
■कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी [चरोदा-भिलाई, छत्तीसगढ़] 4 years ago ♀ गीत संग प्रियतम का पाकर जीवन को नया इक अर्थ मिला। गीत सजे अधरों पर और हर क्षण अँजुरि में हर्ष मिला।। ताल,छंद ,लय...
■साहित्य : डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ [रायपुर छत्तीसगढ़] 4 years ago ♀ ग़ज़ल-कब होता है कैसे बोलें कब होता है धीरे - धीरे सब होता है हो जाता है मन बेकाबू दर्द पुराना जब होता है...
■मातृव दिवस के अवसर पर माँ को समर्पित परमेश्वर वैष्णव की दो कविताएं. 4 years ago ♀ माँ के हाथों से बनी रोटियां माँ आवश्यकतानुसार महीन चिकने आटे लेकर ममता जल उसमें उढ़ेलकर मथती गुथती गोल गोल लोई अपनी सुकोल हथेलियों...
■रचना आसपास : परमेश्वर वैष्णव [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] 4 years ago ♀ नया दौर शब्दों ने मुंह ढाँक लिए वाक्य छिप रहे कटी नांक लिए तर्क हुए अपमानित कुतर्क हो रहे सम्मानित सार्थक अर्थ हुए अमान्य...
■कविता : विद्या गुप्ता [ दुर्ग छत्तीसगढ़] 4 years ago ♀ प्रेम की परिभाषा मैं प्रेम हूं बचा रहूंगा देह के बगैर देह के बाद भी तुम्हारे लिए बह रहा हूं सृष्टि की शिराओं में...