■पर्यावरण दिवस पर विशेष छत्तीसगढ़ी रचना : दुर्गा प्रसाद पारकर. 4 years ago ♀ किरिया खा लव लगाये बर रुख जमीन म जंगल रही तभे हरियाही जगंल नइ रेहे ले जिनगी छरियाही जंगल के रेहे ले पानी जादा...
■पर्यावरण दिवस पर विशेष बाल ग़ज़ल : डॉ. बलदाऊ राम साहू. 4 years ago ♀ नन्हा-सा पौधा लगाना रिंकू-मिंकू, रीजू-सीजू जल्दी आना दूर कहीं बैठी है मुनिया उसे बुलाना। काट रहे हैं जंगल के सब पेड़ घनेरे रोपेंगे हम...
■पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : अनंत थवाईत. 4 years ago ♀ वृक्ष लगाएं जीवन बचाएं प्रकृति पर्व का वदंन करें शत शत करें प्रणाम आलस्य का त्याग करें गढ़ें नया आयाम विकास के रफ्तार में...
■पर्यावरण दिवस पर विशेष कविता : सुनीता अग्रवाल. 4 years ago ♀ वृक्षारोपण कर्तव्य है सबका यह अधिक से अधिक हम करें वृक्षारोपण॥ अपनी धरती को बचाए। मिल कर हम सभी अपनी धरती को हरीतिमा युक्त...
■पर्यावरण दिवस पर विशेष कविता : वंदना गोपाल शर्मा ‘शैली’. 4 years ago ♀ कविता चारों ओर से घिरी इमारतें., हवा से अब नहीं होती बातें, कभी-कभी घुटन होती है... नहीं होती गौरैयां से बातें। न जाने कहाँ...
■धूम्रपान निषेध दिवस पर विशेष दो लघुकथाएं : महेश राजा [महासमुंद छत्तीसगढ़] 4 years ago ■निःशब्द हिल व्यू पार्क के सामने रेसिडेंशियल ईलाका है। खूब हरा-भरा।जगह जगह पेड़-पौधे। उसी जगह सामने कुछ दुकानें बनी है।जरूरत का सामान मिलता है।फिर एक...
■ग़ज़ल : डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ 4 years ago ♀ राजधानी प्यादों में बटने लगी है राजधानी पहरा देते हैं यहाँ अब राजा रानी स्वार्थ की बू आ रही है हर तरफ से शर्म...
■ग़ज़ल : डॉ. बलदाऊ राम साहू. 4 years ago गिर-गिर कर तू उठता जा आगे-आगे बढ़ता जा -बलदाऊ राम साहू गिर-गिर कर तू उठता जा, आगे - आगे बढ़ता जा। असफलता जीवन कुंजी, कोशिश...
■कविता आसपास : सुनीता अग्रवाल [ राँची ] 4 years ago ♀ सखियाँ मेरी सखियाँ मेरी सारी सखि मुझे लगती बड़ी प्यारी है॥ दुनियाँ में ये सखियाँ सबसे न्यारी हैं॥ नहीं बताते मन की व्यथा तो,जाने...
■कविता आसपास : वीणा [ झुमरी तिलैया, झारखंड ] 4 years ago ♀ मौन संवादों के बीच मौन संवादों के बीच सांझ के धुंधलके में खिड़की से राह तकती स्त्री निहारती है ससुराल की गलियाँ और मन...