■कविता आसपास : सवि शर्मा. 5 years ago ♀ पाषाण ♀ सवि शर्मा [ देहरादून, उत्तराखंड ] बदल जाते है आयाम जीवन के यदि नही करते विवेचना जीवन के अर्थों की निर्विकार से...
■कविता आसपास ■तारक नाथ चौधुरी 5 years ago ♀ शीत-ऋतु की दो कविताएं ■1. ग्रीष्म गई जलते-भुनते और बरखा रोते-रोते। अब तो आ गई शीत ऋतु, चलो ओढ़ रजाई सोते।। * सूरज क्या...
■बाल मुक्तिका. ■डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’. 5 years ago ♀ मेरी मम्मी ♀ डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' [ जमनीपाली, जिला-कोरबा,छ. ग. ] हँसती और हँसाती है मेरा मन बहलाती है हार कभी ना मानेंगे...
■साहित्य आसपास : पूनम पाठक ‘बदायूँ’. 5 years ago ♀ कभी मौन भी ♀ पूनम पाठक 'बदायूँ' [ इस्लामनगर बदायूँ,उत्तरप्रदेश ] कभी मौन भी हो सकता है बेअसर भले स्वर अनोखा भाषा अलग मौन...
■बचपन आसपास ■डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’. 5 years ago ■कुल्फी खाते हैं. ■डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग'. [ जमनीपाली,जिला-कोरबा,छ. ग. ] डॉक्टर से घबराते हैं रोज़ दवाई लाते हैं बीपी सुगर है फिर भी नाना...
■बचपन आसपास. ■डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’. 5 years ago ♀ अनुकृति ● निश्छल ,कोमल ,अभिवृत्ति ईश्वर की अनुपम कृति हाथों में बेलून लिए खेल रही है अनुकृति ● श्वेत वस्त्र में अनुकृति लगती है...
■बचपन आसपास. ■डॉ. बलदाऊ राम साहू. 5 years ago ♀ मन करता है. ♀ डॉ. बलदाऊ राम साहू. [ आदर्श नगर,जिला-दुर्ग,छ. ग. ] मन करता है पंछी बनकर आसमान में उड़ जाऊँ तारों के...
■बचपन आसपास. ■तारकनाथ चौधुरी. 5 years ago ♀ कहाँ हैं नाना-नानी ? ♀ तारकनाथ चौधुरी. [ चरोदा-भिलाई,जिला-दुर्ग,छ. ग. ] कहाँ हैं मेरे दादा-दादी, कहाँ हैं नाना-नानी? कोई सुनाता नहीं है मुझको, परियों...
■बचपन आसपास. ■डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’. 5 years ago ♀ बाल हिंदकी-मिनी शिक्षिका ♀ डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' 【 जमनीपाली, जिला-कोरबा,छ. ग. 】 मिनी शिक्षिका आई है धीरे से मुसकाई है बच्चे ख़ुश हो...
■बाल कविता : डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’. 5 years ago ♀ तोता ♀ डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' [ जमनीपाली, जिला-कोरबा,छ. ग. ] ● हरे रंग का तोता है खड़े खड़े वह सोता है खाता है...