लेख : मैं और मेरी जिंदगी – साजिद अली सतरंगी 7 months ago ▪️ मैं और मेरी जिंदगी - साजिद अली सतरंगी [ मेरठ उत्तरप्रदेश ] चेहरे पर मायूसी ओर ऑंखों में अजीब सी चमक लिए वो बरामदे...
कवयित्री और कविता : विद्या गुप्ता [छत्तीसगढ़-दुर्ग] 7 months ago ▪️ समाज में फैलता है कैंसर कैंसर हो गया, यानी मरना तय हो गया...!! जो कि, तय है हर व्यक्ति के साथ शरीर के किसी...
साहित्यिक स्तम्भ ‘आरंभ’ : कवयित्री डॉ.संध्या श्रीवास्तव 7 months ago ▪️ मुझको उड़ जाने दो छोड जग की चिंता पीछे फेंक बेडियांॅ बंधन नीचे। कैसे उड़ते हैं अमन चैन से नीलांबर में ऊंॅचे ऊंॅचे।। ए...
उनवान : इंतज़ार की 15 मिनट – साजिद अली सतरंगी 8 months ago ❤ बस पंद्रह मिनट और - साजिद अली सतरंगी [ मेरठ-उत्तरप्रदेश ] वक़्त कभी इतना लंबा भी हो सकता है, ये मुझे उस शाम पता...
विशेष अवसर पर कविता- दोहा : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर 9 months ago ▪️ तुलसी विवाह इक्कीसा - ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] समय पुराने एक में, था जालन्धर क्रूर। शक्ति वान था अति जिसे,...
बाल ग़ज़ल : डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ 9 months ago अब क्या सोच रहे हो लल्ला ? किसको देख गये हो झल्ला। गेंद लिए गुमसुम बैठे हो, छोड़ कहाँ आए हो बल्ला । आज तुम्हें...
छठ पूजा पर्व पर विशेष : भावना संजीव ठाकुर 9 months ago ▪️ छठ पूजा-सूर्य, सत्य और संयम का महापर्व - भावना संजीव ठाकुर [ रायपुर-छत्तीसगढ़ ] भारतीय संस्कृति के असंख्य पर्वों में छठ पूजा अपनी अद्भुत...
साहित्य स्तम्भ ‘आरंभ’ के इस अंक में पढ़ें कुछ लघु कथाएँ : केंद्रीय विद्यालय में पदस्थ डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय की रचनाओं को 9 months ago 🟥 वक्त तुम नदी हो? लेखन सामान्यतः दो तरह से किया जाता है। पहला -आपके अन्दर कोई विचार अनायास कौंधे और आप कलम उठाने के...
विशेष अवसर पर विशेष कविता : अमृता मिश्रा 10 months ago ▪️ दशहरे की रात - अमृता मिश्रा [ अध्यापिका, दिल्ली पब्लिक स्कूल, भिलाई-छत्तीसगढ़ ] आज रात फिर रावण जला! हर- घर हर मन हर्षोल्लास पला।...
‘आरंभ’ श्रृंखला-2 : डॉ. प्रेम कुमार पाण्डेय 10 months ago [ • प्रगतिशील एवं जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था 'आरंभ'. साहित्य का कोई अंत नहीं होता,अंत ही प्रारंभ है और इसी उद्देश्य को लेकर हमने गठित...