■रचना आसपास : •डॉ. पीसी लाल यादव. 5 years ago ●धनबहार -डॉ. पीसी लाल यादव [ गंडई, छत्तीसगढ़ ] मुस्कावत हवय धनबहार, अंग भर ओरमाये घुंघरू। सोन-सोन के गहना पहिरे, का नई लागत होही गरु...
■मया के बोली भाखा : •दुर्गेश सिन्हा ‘दुलरवा’ 5 years ago ●मन मयूरा तड़पे बनके चिरइया -दुर्गेश सिन्हा 'दुलरवा' [ छुरिया बंजारी,छत्तीसगढ़ ] मन मयूरा तड़पे बनके चिरइया। अपने देश म रावण भेष म, घुमाथे नारी...
■कविता आसपास : •डॉ.अंजना श्रीवास्तव. 5 years ago ●शाश्वत सत्य -डॉ. अंजना श्रीवास्तव [ •भिलाई-छत्तीसगढ़ ] मृत्यु एक शाश्वत सत्य है कब कहाँ कैसे होगी मालूम नहीं । मौत तो आनी है अवश्य...
■कविता आसपास : •तारक नाथ चौधुरी. 5 years ago ●बेबस पेड़ -तारकनाथ चौधुरी [ चरोदा-भिलाई, छत्तीसगढ़ ] चिकित्सालय परिसर में, बरसों से तनकर खडा़ वो पेड़ अचानक भरभरा कर गिर पडा़..... उसके गिरने का...
■हिन्दकी-पीछे से वार करता है : •डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’. 5 years ago ●इल्तिज़ा बार-बार करता है. ●रोज़ पीछे से वार करता है. -डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' [ कोरबा-छत्तीसगढ़ ] इल्तिज़ा बार - बार करता है रोज़ पीछे...
माँ का कोई एक दिन नहीं होता,माँ वो है जिसके बिना कोई दिन नहीं होता ! मातृ दिवस के दिन मन के कुछ भाव समर्पित करती हुई-अमृता मिश्रा. 5 years ago ●तेरा मेरा रिश्ता -अमृता मिश्रा [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] मेरे हर दर्द की आहट तुम्हें महसूस हो जाती हैं, मेरी चाहतें तेरे आँचल के साये में...
■कविता आसपास : •कमल यशवंत सिन्हा. 5 years ago ●माँ -कमल यशवंत सिन्हा [ रायगढ़-छत्तीसगढ़ ] माँ सिर्फ़ माँ नहीं है माँ घर का स्वाद है माँ की चूड़ियाँ,माँ की बोली घर का संगीत...
■कविता आसपास : •वीरेंद्र पटनायक 5 years ago ●माँ -वीरेन्द्र पटनायक [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] माँ" एकाक्षरी शब्द ही नहीं अथाह कहानी है। स्वाद की जादूगरनी सलाहकार-सी डॉक्टरानी है।। "माँ" एकाक्षरी शब्द ही नहीं...
■माँ को समर्पित कविता : •संतोष कुमार सोनकर मंडल. 5 years ago ●माँ -संतोष कुमार सोनकर मंडल [ राजिम,जिला-गरियाबंद, छत्तीसगढ़ ] मां ममता है मां प्यार है। मां बच्चे की दुलार है।। मां रोली है मां रंगोली...
■कविता आसपास : •मयारू मोहन कुमार निषाद. 5 years ago ●अमर बस मानवता है. -मयारू मोहन कुमार निषाद [ लमती गांव, भाटापारा, जिला-बलौदाबाजार, छत्तीसगढ़ ] कुछ पाने की है चाह , कुछ खोने का है...