कविता आसपास 5 years ago ■नया देश बनाना है -उज्ज्वल प्रसन्नो [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] आह्वान है यह मेरा नया देश बनाना है। श्रम से,लगन से,भव्य नया देश बनाना है।। तन,...
रचना आसपास 5 years ago ■अप्प दीपो भव -अरुण कुमार निगम [ दुर्ग-छत्तीसगढ़ ] मशीखत के जहाँ जेवर वहाँ तेवर नहीं होते जमीं से जो जुड़े होते हैं उनके पर...
कविता आसपास 5 years ago ■रहनुमा -सरस्वती धानेश्वर 'सारा' अथाह पीड़ाओं का दंश अश्कों की गगरी हृदय का गहरा तल छिपे हुए कयी बीते पल अदृश्य सा उसका वजूद ओझल...
कविता 5 years ago ■शबरी -प्रिया देवांगन 'प्रियू' [ पंडरिया, जिला-कबीरधाम, छ. ग. ] राम राम की रटन लगाई। उम्र बिता तब दर्शन पाई।। प्रतिदिन राहे फूल बिछाती। राम...
कविता आसपास 5 years ago ■रीते पन से आक्रांत 'एकाकी लोग'. -कमल यशवंत सिन्हा रीतेपन से आक्रांत 'एकाकी लोग' सोशल मीडिया पर झूठी जिंदगी जी रहे 'एकाकी लोग' खुद से...
महुआई गंध 5 years ago ■पगडंडियों के आर-पार, ■बिखरे पलाश फूल. -डॉ. पीसी लाल यादव [ गंडई-छत्तीसगढ़ ] पगडंडियों के आर-पार, बिखरे पलाश फूल। जैसे सूखी नदी के - हों...
बाल ग़ज़ल 5 years ago बाल ग़ज़ल म्याऊँ म्याऊँ करती है ■डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग'. ■कोरबा-छत्तीसगढ़. म्याऊँ म्याऊँ करती है पर बिल्ली से डरती है जब भी घोड़ा आता है...
कवि औऱ कविता 5 years ago ■साईकिलों पर घर -रमेश कुमार सोनी कबीर नगर, रायपुर ,छत्तीसगढ़ अलग-अलग पगडंडियों से गाँवों के मजदूर अपनी जरूरतें मुँह पर चस्पा किए साइकिलों से खटते...
रचना आसपास 5 years ago ●नव सबेरा -विजय पंडा [ घरघोड़ा, रायगढ़, छत्तीसगढ़ ] शादी का निमंत्रण आया ; मन हर्षित तन पुलकित दौडते - भागते गुनगुनाते श्रीमती, बाल बच्चों...
डॉ. मीता अग्रवाल ‘मधुर’ की कविताएं 5 years ago ●इच्छा अनंत आकाश की ऊचाईयां हिरणी की तरह कुलाचे भरती इच्छाएं । भटकती मृगमरीचिका थक-हार बैठती हैं सोचते सोचते विशाल प्रांगन में विचरती ढूढ़ती उत्तर...