कविता- गोपाल कृष्ण पटेल 5 years ago ■बहु भी मुस्कुराना चाहती है. -गोपाल कृष्ण पटेल [ रायपुर-छत्तीसगढ़ ] बहु भी किसी की बेटी है, फिर क्यों इतना कष्ट पाती है। छोड़कर आई...
कविता- संतोष झांझी 5 years ago •चोका जापानी कविता -संतोष झांझी [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] उसनें कभी कुछ भी नही कहा यह भी चुप कुछ कहा ही नही ये न कहेगी तुम...
कविता- सुधा वर्मा 5 years ago ●बादल -सुधा वर्मा [ रायपुर-छत्तीसगढ़ ] बादल का एक टुकड़ा घूमते घूमते दूर जंगल तक चला गया। करंज पीपल को निहारता रहा, करंज ने कहा...
कविता- सरोज तोमर 5 years ago ●फ़ागुन जैसा मन हुआ...! -सरोज तोमर [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] जा बैरिन पुरवाई तू ,चुनरी से मत खेल , रेत-घरौंदे को रहा ,बचपन अभी सकेल ।...
बाल कविता ●तारकनाथ चौधुरी 5 years ago ●दाऊ कहो न ! -तारकनाथ चौधुरी [ चरोदा-भिलाई-छत्तीसगढ़ ] चारों तरफ पत्थर के जंगल, जल-धाराएँ भी हैं ओझल बात तुम्हारी मान के दाऊ चाहूँ पौध...
कविता -विनीता सिंह चौहान 5 years ago ●ढाई आखर प्रेम के -विनीता सिंह चौहान [ इंदौर-मध्यप्रदेश ] एक दूजे को दिल से जोड़ें, प्रेम के ढाई आखर। दिल का रिश्ता बनता मधुर,...
बचपन आसपास, डॉ. बलदाऊ राम साहू 5 years ago पेड़ अगर फल-बीज़ न देते नदियां जल ना देतीं, कैसे बनते बाग-बगीचे, कैसी होती खेती. सोचो बच्चो ●डॉ. बलदाऊ राम साहू. [ ●दुर्ग-छत्तीसगढ़. ] पेड़...
छत्तीसगढ़ी गीत, डॉ. पीसी लाल यादव. 5 years ago मया-मउहा माह के फागुन म पिरीत-परसा दाह के फ़ागुन म होरी के रंग म भिंजे अंग-अंग, मन-चिरइया चाह के फ़ागुन म. -डॉ. पीसी लाल यादव...
ग़ज़ल, विनीता सिंह चौहान. 5 years ago अब क़लम क्या नया लिखे, अल्फाजों में वही दर्द दिखे. -विनीता सिंह चौहान [ इंदौर-मध्यप्रदेश ] अब कलम क्या नया लिखे। अल्फाजों में वही दर्द...
कविता 5 years ago धरा पर उतरो महेश्वर, औऱ जगत का दुःख हरो, शत्रु का विनाश करने, रुद्र रूप तुम धरो. ●तारकनाथ चौधुरी धरा पर उतरो महेश्वर और जगत...