बचपन आसपास 5 years ago ●बसन्त के स्वागत में -डॉ. बलदाऊ राम साहू भँवरों का है गुंजार सखी बासंती रंग, बयार सखी. महुआ गंध बिखेर रहा है कर के सोलह...
गीत 5 years ago ● आओ । बैठ कर गीत लिखें -विजय पंडा आम्र बौर के नीचे आओ ! बैठ कर गीत लिखें ; हल्की - बहकी ठंड में...
बचपन आसपास 5 years ago ●हिंद की-युक्तिका ●धीरे से मुस्कुराती है -डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' धीरे से मुस्काती है फिर वो रोती-गाती है हर सामाँ को फैलाने पहले ख़ूब जमाती...
कविता, छेर छेरा आवत ह्रे- विजय पंडा 5 years ago ●कविता ●छेर छेरा आवत ह्रे छेरछेरा आवत हे कोठी धान में नहावत है ; हमर खेती के संगी साथी गइया बइला मन मस्त पगुरावत हैं।...
गणतंत्र दिवस 5 years ago ●देखो ! आज़ गणतंत्र आया. -विजय पंडा देखो ! आज गणतंत्र आया! स्वर्ण मुकुट से सजा हुआ पहन कर वो फिर इठलाया परोसा शब्दों की...
बचपन आसपास 5 years ago ●सबसे प्रीत बढ़ाएँ -डॉ. बलदाऊ राम साहू आओ बच्चो एक सूर में जन,गण,मन हम गाएँ जय घोष का नाद करें और ध्वज अपना फहराएँ। छोड़े...
बचपन आसपास 5 years ago ●चारण बनकर गाएं -डॉ. बलदाऊ राम साहू आओ बच्चो हम सब मिलकर भारत का जय गान करें इसकी माटी चंदन जैसी झुककर इसे प्रणाम करें।...
नेताज़ी सुभाष चन्द्र बोस-किशोर कुमार तिवारी 5 years ago स्वतंत्रता की समरभूमि पर योद्धा तो कई एक हुए पर इतिहास के पन्नों पर नेताजी केवल एक हुए एक हुए और नेक हुए आजादी के...
बचपन आसपास -डॉ.माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ 5 years ago ●1.नानू मुझको भाते हैं देख मुझे तुतलाते हैं खेल नया सिखलाते हैं थक जाते हैं खुद लेकिन दिनभर ख़ूब खिलाते हैं करते हैं म्याऊँ म्याऊँ...
गीत 5 years ago ●अरमानों की चिता जलाकर, ●क्यों कर करना शोक -शुचि 'भवि' अरमानों की चिता जलाकर क्योंकर करना शोक राजनीति से कम मत समझो वर्तमान का प्रेम...