poetry

असहाय कविता

●उड़ान भरती है मेरी कविता -गोविन्द पाल विचारों के द्वंद्व को साथ लेकर कल्पनाओं की पंख फैलाकर उड़ान भरती है कविता, जीवन के धुंध और...

छंद

■राजिम मेला -प्रिया देवांगन 'प्रियू' [ पंडरिया,कबीरधाम, छत्तीसगढ़] छन्न पकैया छन्न पकैया, आगे राजिम मेला। चारो कोती बगरे हावय, किसम किसम के ठेला।। छन्न पकैया...

नज़्म- तारकनाथ चौधुरी

अजीब जंग सी छिडी़ है दर्द और हौसलों के दरम्याँ... जाने कब उसकी शातिराना चाल ने डाल दी बेडि़याँ मेरे पाँव में, रुक सी गई...

कविता आसपास

■तुम वैसी ही हो मेरे लिए. -तारकनाथ चौधरी तुम वैसी ही हो मेरे लिए जैसे देह में आग,कंठ में गान, सरित में नीर,तूफां में तीर,...

शरद कोकास [ दो लम्बी कविताएं ‘देह’ औऱ ‘पुरातत्ववेत्ता’ के कवि ]

■छत्तीसगढ़ के सु-प्रसिद्ध कवि शरद कोकास ने 'एक अच्छी ख़बर' को मित्रों के साथ शेयर किया,जिसे हम अपने पाठकों,वीवर्स के लिए हु-ब-हु प्रकाशित कर रहे...

छत्तीसगढ़ी आसपास

■आगे पहुना बसंत -डॉ. पीसी लाल यादव [ गंडई-छत्तीसगढ़ ] पिरीत के पानी म मया के रंग घोरे, आगे पहुना बसंत देख तो रे ।...

कविता आसपास

■नया देश बनाना है -उज्ज्वल प्रसन्नो [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] आह्वान है यह मेरा नया देश बनाना है। श्रम से,लगन से,भव्य नया देश बनाना है।। तन,...

रचना आसपास

■अप्प दीपो भव -अरुण कुमार निगम [ दुर्ग-छत्तीसगढ़ ] मशीखत के जहाँ जेवर वहाँ तेवर नहीं होते जमीं से जो जुड़े होते हैं उनके पर...

कविता आसपास

■रहनुमा -सरस्वती धानेश्वर 'सारा' अथाह पीड़ाओं का दंश अश्कों की गगरी हृदय का गहरा तल छिपे हुए कयी बीते पल अदृश्य सा उसका वजूद ओझल...

कविता

■शबरी -प्रिया देवांगन 'प्रियू' [ पंडरिया, जिला-कबीरधाम, छ. ग. ] राम राम की रटन लगाई। उम्र बिता तब दर्शन पाई।। प्रतिदिन राहे फूल बिछाती। राम...
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