ग़ज़ल 6 years ago कितनी चल ये चाल गया मुश्किल से ये साल गया ●शुचि 'भवि' कितनी चल ये चाल गया मुश्किल से ये साल गया साल नया अच्छा...
हिंद की युक्तिका 6 years ago ●नया वर्ष हूँ ●डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' स्वागत सत्कार करो मेरा नया वर्ष हूँ मैं ही आशा- निराशा, पीड़ा हूँ, हर्ष हूँ बीत चुके हैं...
कविता 6 years ago ●कैसे मनायेंगे नया साल ●दिलशाद सैफी ●रायपुर-छत्तीसगढ़ कैसे मनाये इस बार हम खुशी और उत्साह से ये "नया साल" इस बार तो हमें,न भरने वाला...
कविता 6 years ago ●कहाँ है गंतव्य ●संतोष झांझी बचपन के पांव से दौड़ी और दौड़ती ही रही बड़ी होने तक शायद किसी देखे अनदेखे गंतव्य के लिये वह...
बचपन आसपास 6 years ago ●अर्जुन ●डॉ. बलदाऊ राम साहू यह अर्जुन का पेड़ खड़ा है जैसे कोई योद्धा अड़ा है। विविध नाम से जाना जाता पार्थ, वीर, काहू कहलाता।...
बचपन आसपास 6 years ago ●जाएँ मेले -डॉ. बलदाऊ राम साहू चलो घूमने जाएँ मेले पर ना जाएँ कभी अकेले। साथ बड़े हों अपने भाई अपनी इसी में है भलाई।...
कविता 6 years ago ●तुम्हारी आँखें.... ●लाल देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव ●उत्तरप्रदेश तुम्हारी झील सी आँखों को देखकर.. सबसे पहले मुझे हुआ प्यार का एहसास.. जीवन के लिए जी उठी...
कविता, स्त्री -सुरेश वाहने 6 years ago स्त्री हो सकती है मछली शोभा बढा़ती एक्वेरियम में कैद स्त्री हो सकती है मछली नदी के धारा के विरूद्ध कुशल तैराक स्त्री हो सकती...
बाल गीत, प्यारी नानी- डॉ. बलदाऊ राम साहू 6 years ago गुस्सा छोड़ो प्यारी नानी कहो न तुम कथा-कहानी मेघ कहाँ से लाता होगा भर-भर कर इतना पानी। चंदा मामा दूर-दूर क्यों हमदम हमसे रहते हैं...
कविता- विद्या गुप्ता दुर्ग, छत्तीसगढ़ 6 years ago आतंकित हो धरती घूम रही है स्तब्ध सबके चेहरे पर चमक रही है दुर्योधन की आंखें हाथों में दुशासन सब ने पकड़ रखा है धरती...