गणतंत्र दिवस 6 years ago ●देखो ! आज़ गणतंत्र आया. -विजय पंडा देखो ! आज गणतंत्र आया! स्वर्ण मुकुट से सजा हुआ पहन कर वो फिर इठलाया परोसा शब्दों की...
बचपन आसपास 6 years ago ●सबसे प्रीत बढ़ाएँ -डॉ. बलदाऊ राम साहू आओ बच्चो एक सूर में जन,गण,मन हम गाएँ जय घोष का नाद करें और ध्वज अपना फहराएँ। छोड़े...
बचपन आसपास 6 years ago ●चारण बनकर गाएं -डॉ. बलदाऊ राम साहू आओ बच्चो हम सब मिलकर भारत का जय गान करें इसकी माटी चंदन जैसी झुककर इसे प्रणाम करें।...
नेताज़ी सुभाष चन्द्र बोस-किशोर कुमार तिवारी 6 years ago स्वतंत्रता की समरभूमि पर योद्धा तो कई एक हुए पर इतिहास के पन्नों पर नेताजी केवल एक हुए एक हुए और नेक हुए आजादी के...
बचपन आसपास -डॉ.माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ 6 years ago ●1.नानू मुझको भाते हैं देख मुझे तुतलाते हैं खेल नया सिखलाते हैं थक जाते हैं खुद लेकिन दिनभर ख़ूब खिलाते हैं करते हैं म्याऊँ म्याऊँ...
गीत 6 years ago ●अरमानों की चिता जलाकर, ●क्यों कर करना शोक -शुचि 'भवि' अरमानों की चिता जलाकर क्योंकर करना शोक राजनीति से कम मत समझो वर्तमान का प्रेम...
कविता 6 years ago ●यूं ही मिल जाना किसी मोड़ पर -दिलशाद सैफी तुम ढूंढो मुझे कभी और मैं ढूँढू तुम्हें यही कही आओ उन बीती स्वर्णिम यादों की...
कविता 6 years ago ●मन -श्रीमती अमृता मिश्रा आज मन के अहसास, परत दर परत स्वत: खुल रहे हैं। पौधों की नाजुक टहनी जैसे दिल यूँ कुछ धड़क रहे...
कविता 6 years ago ●आओ ! बंद कमरे में बैठें -विजय पंडा -घरघोड़ा, रायगढ़,छत्तीसगढ़ खुली जगह ,खुली मैदान में घुटन होने लगी। श्वासें भी जहरीली हो गयी, विश्वास की...
कविता 6 years ago ●ये जीवन की एक पहेली -श्रीमती अमृता मिश्रा जितना जानना चाहा इसे उतनी अंजान हो गई जिंदगी। जितना इसको सुलझाती हूँ उतनी और उलझती जाती, चाहे...