कविता, इन दिनों बच्चे -पल्लवी मुखर्जी, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ 5 years ago फूलों को तो बस मुस्कुराना है खिलखिलाना है बेहयाई की भी हद है जबकि इन दिनों दुनिया के तमाम बच्चें नहीं जाते आकाश के नीचे...
बाल गीत, पम्पकिन खाओ -डॉ. बलदाऊ राम साहू 5 years ago कद्दू की जब बनती सब्जी मुन्नू भैया करे बहाना मुझको भूख नहीं है दादी खाना तुम मत आज बनाना। थोड़ी - सी मैगी खाई है...
18 दिसंबर, जयंती के पुनीत अवसर पर 5 years ago ●जय हो गुरु घासीदास -डॉ. माणिक विश्वकर्मा'नवरंग' सतनाम के बगराए प्रकाश जय हो,जय हो,गुरु घासीदास बाढ़त हे दुनिया में व्यभिचार चोरी हिंसा अउ अत्याचार तोर...
धमतरी ब्रेकिंग न्यूज़- भाजपा जिलाध्यक्ष ठाकुर शशि पवार ने की अनुशंसा 5 years ago ●भाजपा ने किया धान ख़रीदी केन्द्रों में निगरानी समिति का गठन धमतरी। धान खरीदी केंद्रों में किसान भाइयों को हो रही असुविधाओं को ध्यान में...
दो बाल गीत- संतोष झांझी 5 years ago ●आती है रेल आती है रेल जाती है रेल सामान से भरी ये पेलमपेल भरे हैं लोग यहाँ ठेलम ठेल बच्चों को फिर भी सूझे...
लघुकथा, मुहल्ला -दिलशाद सैफी 5 years ago सुबह का वक्त था "नत्थू चाय वाले"के दुकान पर रोज की तरह वहीं भीड़ नज़र आ रही थी। सामने से आ रहे "दीनदयाल बाबू" को...
कविता, चलते रहना ही जीवन है -दिलशाद सैफी, रायपुर, छत्तीसगढ़ 5 years ago धन भी दौलत भी जोश और जवानी कुछ भी नहीं रहता जीवन प्रयत्न जन्म भी शाश्वत मरन भी शाश्वत फिर भी नहीं रूकता जीवन चक्र...
कविता, गम के सारे में दुनिया 5 years ago मैंने दुनिया को बदलते देखा है मैंने समय को बदलते देखा है ●प्रकाश चंद्र मण्डल लोगों को चीखते चिल्लाते देखा है अपने को अपनों से...
छतीसगढ़ी गीत, ज़ादा तुम ला का समझाना -बलदाऊ राम साहू 5 years ago जादा तुम ला का समझाना सब ला एक्के बात बताना सच के नइ हे अब पैमाना। घेरी - बेरी का दुहराना झूठ ल सच के...
बाल गीत, पढ़ते-पढ़ते- संतोष झांझी 5 years ago क--कमल का ख--से खरल जीवन जीना नही सरल ग--से गमला घ--से घड़ा पढे लिखे का नाम बड़ा ङ--कभी कभी ही आता,मिलता जब संस्कृत का ज्ञाता...