नव गीत, शीत ऋतु मन झूम गाये -डॉ. मीता अग्रवाल ‘मधुर’, रायपुर-छत्तीसगढ़ 6 years ago शीत ऋतु मन झूम गाये सनन सन सन पवन डोले संग मेघों को उड़ा कर शीत ऋतु मन झूम गाये ओस बूंदो में नहाकर। शीत...
कविता, सिख रही हूँ- दिलशाद सैफी 6 years ago इन मौसमों को बदलना तो आसान नहीं है अब खुद को बदलने का हुनर सिख रही हूँ..! धूप से सिख लिया रंगों को चुराने की...
कविता, मन- डॉ. बीना सिंह 6 years ago राज की बात मैं आज बताती हूं मेरे अंदर भी एक समंदर उछलता है कभी इधर तो कभी उधर बच्चों सा नादान भोला भाला मन...
कविता, जीवन की परिभाषा- सरोज तोमर 6 years ago रात-रात भर चंदा करता, जग कर अवनि की रखवाली। लेकिन रूप सजाया करती, सूरज से धरती मतवाली । जीवन की परिभाषा हँस- हँस कर देना...
कविता, मुस्कुराना सीखो- उज्ज्वल प्रसन्नो 6 years ago फ़ूलों की तरह मुस्कुराना सीखो । ग़मज़दा हो तो फ़रमाना सीखो ।। खुशबू से मुहब्बतें महकाना सीखो । पंखुड़ियों से आपस मे जुड़ जाना सीखो...
प्रकाश पर्व पर विशेष भजन- शुचि ‘भवि’ 6 years ago सारी दुनिया में नानक की होती जय-जयकार है नमस्कार गुरु के चरणों में मेरा बारंबार है जात-पात को ख़त्म करे जो हर भूखे का पेट...
कविता, कब-तक यों चलते जायेंगे ? – डॉ.सुभद्रा खुराना, भोपाल-मध्यप्रदेश 6 years ago जीवन गतिशील है गति ही प्रगति देती है आशावान बने रहे कब तक यों चलते जायेंगे ? उभरेंगे चाँदी के तारक सिहरेंगे, ढलते जायेंगे। कब...
कविता, आख़िरी पन्ना – रमेश कुमार सोनी, बसना-छत्तीसगढ़ 6 years ago मैं पहाड़ों की श्रृंखलाओं में कुछ किताबें पढ़ने गया था, कुछ अच्छा सुनने की चाहत मुझे खींचकर ले गयी थी एक वृद्धाश्रम में हाँ,वहीं जहाँ...
लघुकथा, मीठी बोली- डॉ. सोनाली चक्रवर्ती 6 years ago -"अम्मा जी" बहू की आवाज कानों में पड़ी तो शांति देवी ने जल्दी से आंखें पोंछ ली और अपने कपड़ों को पलंग पर यूं ही...
ग़ज़ल -शुचि ‘भवि’ 6 years ago किसी ख़ुशी से इन्हें अब ख़ुशी नहीं मिलती किसी भी चेहरे की रंगत खिली नहीं मिलती लिखा था तुमने जो ख़त में हमारा नाम कभी...