प्रकाश पर्व पर विशेष भजन- शुचि ‘भवि’ 6 years ago सारी दुनिया में नानक की होती जय-जयकार है नमस्कार गुरु के चरणों में मेरा बारंबार है जात-पात को ख़त्म करे जो हर भूखे का पेट...
कविता, कब-तक यों चलते जायेंगे ? – डॉ.सुभद्रा खुराना, भोपाल-मध्यप्रदेश 6 years ago जीवन गतिशील है गति ही प्रगति देती है आशावान बने रहे कब तक यों चलते जायेंगे ? उभरेंगे चाँदी के तारक सिहरेंगे, ढलते जायेंगे। कब...
कविता, आख़िरी पन्ना – रमेश कुमार सोनी, बसना-छत्तीसगढ़ 6 years ago मैं पहाड़ों की श्रृंखलाओं में कुछ किताबें पढ़ने गया था, कुछ अच्छा सुनने की चाहत मुझे खींचकर ले गयी थी एक वृद्धाश्रम में हाँ,वहीं जहाँ...
लघुकथा, मीठी बोली- डॉ. सोनाली चक्रवर्ती 6 years ago -"अम्मा जी" बहू की आवाज कानों में पड़ी तो शांति देवी ने जल्दी से आंखें पोंछ ली और अपने कपड़ों को पलंग पर यूं ही...
ग़ज़ल -शुचि ‘भवि’ 6 years ago किसी ख़ुशी से इन्हें अब ख़ुशी नहीं मिलती किसी भी चेहरे की रंगत खिली नहीं मिलती लिखा था तुमने जो ख़त में हमारा नाम कभी...
गीत -शुचि ‘भवि’ 6 years ago बिन सूरज के जैसा होगा रोज़ यहाँ पर दिन मेरा भी जीवन वैसा ही मीत तुम्हारे बिन चिड़ियों का कलरव है ग़ायब मन ठहरा-ठहरा फ़लक...
देव उठनी, प्रबोधिनी एकादशी, तुलसी विवाह पर विशेष कविता -आलोक शर्मा 6 years ago जागेंगे आज जगतपति जागेंगे आज जगन्नाथ उठेंगे योगनिद्रा से जगत के पालनहार सोयी नहीं है सबकी प्रार्थना जागती रही है मनोकामना विनय के , हमारे...
जाड़ा आया- बलदाऊ राम साहू, दुर्ग-छत्तीसगढ़ 6 years ago शाल, स्वेटर, मफलर लेकर जाड़ा आया, जाड़ा आया। मुस्कुरा रही गरम रजाई गरमी की अब करो विदाई। धूप सुनहरी हँसते आई सुबह-सुबह यह है सुखदाई।...
तीन बाल गीत- डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’, कोरबा-छत्तीसगढ़ 6 years ago ■ 1 मिश्का रानी बड़ी सयानी करती है अपनी मनमानी देख रहे हैं मम्मी - पापा दादा-दादी , नाना -नानी उसके हँसने रोने पर भी...
कविता, कैसे भूलूँ ? -अंशुमन राय, इलाहाबाद-उत्तरप्रदेश 6 years ago कैसे भूलूँ? वह रात को टिमटिमाते तारे, जो आजकल शहरों में नहीं दिखते। कैसे भूलूँ? वह चांदनी रात और वह गोल चाँद, जो लाख कोशिश...