poetry

गीत, आज़ तिमिर फ़िर हारा- अमित सिंगारपुरिया, भाटापारा-छत्तीसगढ़

दीप जले जब जगमग-जगमग, ज्योतिर्मय उजियारा। मिट्टी के नन्हे दीपक से, आज तिमिर फिर हारा।। अंधकार में अनुपम आभा, सुंदर सपन सलोना। बाहर भीतर ऊपर...

बचपन -डॉ. बलदाऊ राम साहू

नन्हे - नन्हे बच्चे सारे आसमान के लगते तारे। मन के होते भोले -भाले पर मस्ती में बड़े निराले। कोमल होता है इनका मन जैसे...

मैनपाट- कविता की पृष्ठभूमि

डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' कोरबा-छत्तीसगढ़ कविता की पृष्ठभूमि धरा का श्रृंगार है दृष्टि पड़ती है जिधर बहार ही बहार है प्रेम का अनन्य केन्द्र ये...
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