poetry

कविता, कुटुमसर की मछलियां- उर्मिला शुक्ल, रायपुर-छत्तीसगढ़

बस्तर के कुटुमसर गुफ़ा में तैरती अंधी मछलियां सैलानियों का कुतुहल जगाती उनका मन बहलाती मछलियां हो गयी हैं अब,बहुत व्वायकुल क्या वे आई हैं...

कविता, देखा करूंगी अपना नाम आसमान पर लिखा हुआ- मेनका वर्मा

●कविता ●देखा करूंगी अपना नाम आसमान पर लिखा हुआ... -मेनका वर्मा मैं रेत पर लिखती रही समुंदर की लहरें मिटाती रही रफ़्तार बढ़ाती रही मैं...

ग़ज़ल – डॉ. संजय दानी

पेड़ों के बदन से कपड़े सारे उतर गये, बारिश के करिंदे दे कर दर्द गुज़र गये। कुछ मज़हबी आंधियां यूं आ रहीं नीचे से, के...

बाल कविता, उठो-उठो जी उठो-उठो हुआ सवेरा, उठो-उठो -बलदाऊ राम साहू

उठो-उठो जी उठो-उठो हुआ सवेरा, उठो-उठो। मुर्गे ने हैं बाँग लगाई उठो-उठो चिड़ियाँ भी हैं चीं-चीं गाईं उठो-उठो। कौंवे बन आये हलकारे उठो-उठो गुन-गुन,गाते भौंरे...

ग़ज़ल, पिया के साथ जो सपना सजाया मिले हम तो हकीकत हो गयी है – डॉ. मधु त्रिवेदी, आगरा-उत्तरप्रदेश

पिया के साथ जो सपना सजाया मिले हम तो हकीकत हो गयी है रखे हम व्रत करवाचौथ का जब मुहब्बत की नफ़ासत हो गई है...
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