विश्व पुरुष दिवस पर विशेष रचना- शुचि ‘भवि’ 6 years ago सुनो तुम पुरुष हो हर दिवस ही तुम्हारा है फिर क्यों दूँ भला बधाई तुम्हें "विश्व पुरुष दिवस की" क्या युगों के बदलाव ने कभी...
कविता, कुटुमसर की मछलियां- उर्मिला शुक्ल, रायपुर-छत्तीसगढ़ 6 years ago बस्तर के कुटुमसर गुफ़ा में तैरती अंधी मछलियां सैलानियों का कुतुहल जगाती उनका मन बहलाती मछलियां हो गयी हैं अब,बहुत व्वायकुल क्या वे आई हैं...
ददरिया -डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’, कोरबा-छत्तीसगढ़ 6 years ago ● आबे बिहनिया खवाहूँ बासी मोर मन के मँजूर तँय बारामासी ● ए फूलबासन जोहार ले ले पिरीत दे दे अपन अउ पियार ले ले...
गीत, सूरज नया उगाना है- बलदाऊ राम साहू 6 years ago सूरज नया उगाना है नया युग है सूरज हमको नया उगाना है पथ से जो भटके हैं राही राह दिखाना है । आराम नहीं प्रतिपल...
कविता, देखा करूंगी अपना नाम आसमान पर लिखा हुआ- मेनका वर्मा 6 years ago ●कविता ●देखा करूंगी अपना नाम आसमान पर लिखा हुआ... -मेनका वर्मा मैं रेत पर लिखती रही समुंदर की लहरें मिटाती रही रफ़्तार बढ़ाती रही मैं...
बाल कविता, आओ खेलें, छुपन-छुपाई- बलदाऊ राम साहू 6 years ago गिल्ली-डंडा, कंचे लेकर जल्दी से तुम आओ मुन्नू, रीमा, सीमा को भी साथ-साथ ले लाओ खेलेंगे डंडा-पचरंगा हम सब मिलकर भाई आओ खेलें छुपन-छुपाई। खो,...
ग़ज़ल – डॉ. संजय दानी 6 years ago पेड़ों के बदन से कपड़े सारे उतर गये, बारिश के करिंदे दे कर दर्द गुज़र गये। कुछ मज़हबी आंधियां यूं आ रहीं नीचे से, के...
बाल कविता, उठो-उठो जी उठो-उठो हुआ सवेरा, उठो-उठो -बलदाऊ राम साहू 6 years ago उठो-उठो जी उठो-उठो हुआ सवेरा, उठो-उठो। मुर्गे ने हैं बाँग लगाई उठो-उठो चिड़ियाँ भी हैं चीं-चीं गाईं उठो-उठो। कौंवे बन आये हलकारे उठो-उठो गुन-गुन,गाते भौंरे...
ग़ज़ल, पिया के साथ जो सपना सजाया मिले हम तो हकीकत हो गयी है – डॉ. मधु त्रिवेदी, आगरा-उत्तरप्रदेश 6 years ago पिया के साथ जो सपना सजाया मिले हम तो हकीकत हो गयी है रखे हम व्रत करवाचौथ का जब मुहब्बत की नफ़ासत हो गई है...
बाल कविता, जंगल जाएँ -बलदाऊ राम साहू 6 years ago नाचे कुत्ता बिल्ली आकर गीत सुनाएँ कोयल गाकर। उधम मचाए बंदर भैया भोली- भाली धौरी गैया। बड़े अनोखे भालू भैया गदहे जी हैं बड़े गवैया।...