गीत -शुचि ‘भवि’ 6 years ago बिन सूरज के जैसा होगा रोज़ यहाँ पर दिन मेरा भी जीवन वैसा ही मीत तुम्हारे बिन चिड़ियों का कलरव है ग़ायब मन ठहरा-ठहरा फ़लक...
देव उठनी, प्रबोधिनी एकादशी, तुलसी विवाह पर विशेष कविता -आलोक शर्मा 6 years ago जागेंगे आज जगतपति जागेंगे आज जगन्नाथ उठेंगे योगनिद्रा से जगत के पालनहार सोयी नहीं है सबकी प्रार्थना जागती रही है मनोकामना विनय के , हमारे...
जाड़ा आया- बलदाऊ राम साहू, दुर्ग-छत्तीसगढ़ 6 years ago शाल, स्वेटर, मफलर लेकर जाड़ा आया, जाड़ा आया। मुस्कुरा रही गरम रजाई गरमी की अब करो विदाई। धूप सुनहरी हँसते आई सुबह-सुबह यह है सुखदाई।...
तीन बाल गीत- डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’, कोरबा-छत्तीसगढ़ 6 years ago ■ 1 मिश्का रानी बड़ी सयानी करती है अपनी मनमानी देख रहे हैं मम्मी - पापा दादा-दादी , नाना -नानी उसके हँसने रोने पर भी...
कविता, कैसे भूलूँ ? -अंशुमन राय, इलाहाबाद-उत्तरप्रदेश 6 years ago कैसे भूलूँ? वह रात को टिमटिमाते तारे, जो आजकल शहरों में नहीं दिखते। कैसे भूलूँ? वह चांदनी रात और वह गोल चाँद, जो लाख कोशिश...
कविता, यकीन क्या राजनीति पर है ? देखो कार्य प्रगति पर है. -सुरेश वैष्णव, भिलाई-छत्तीसगढ़ 6 years ago यकीन क्या राजनीति पर है? देखो कार्य प्रगति पर है । कवि सुरेश वैष्णव भिलाई नगर मार्ग यहां खुदा, वहां खुदा है प्रदूषण में पर्यावरण...
बाल कविता, दादी हमें सुनाओ- बलदाऊ राम साहू, दुर्ग-छत्तीसगढ़ 6 years ago आओ, दादी हमें सुनाओ एक कहानी छोटी - सी जिसमें होवें राजा-रानी राज कुमारी मोटी -सी। आसमान से आएँ परियाँ लेकर लंबी लाल छड़ी जिनके...
विश्व पुरुष दिवस पर विशेष रचना- शुचि ‘भवि’ 6 years ago सुनो तुम पुरुष हो हर दिवस ही तुम्हारा है फिर क्यों दूँ भला बधाई तुम्हें "विश्व पुरुष दिवस की" क्या युगों के बदलाव ने कभी...
कविता, कुटुमसर की मछलियां- उर्मिला शुक्ल, रायपुर-छत्तीसगढ़ 6 years ago बस्तर के कुटुमसर गुफ़ा में तैरती अंधी मछलियां सैलानियों का कुतुहल जगाती उनका मन बहलाती मछलियां हो गयी हैं अब,बहुत व्वायकुल क्या वे आई हैं...
ददरिया -डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’, कोरबा-छत्तीसगढ़ 6 years ago ● आबे बिहनिया खवाहूँ बासी मोर मन के मँजूर तँय बारामासी ● ए फूलबासन जोहार ले ले पिरीत दे दे अपन अउ पियार ले ले...