poetry

गीत -शुचि ‘भवि’

बिन सूरज के जैसा होगा रोज़ यहाँ पर दिन मेरा भी जीवन वैसा ही मीत तुम्हारे बिन चिड़ियों का कलरव है ग़ायब मन ठहरा-ठहरा फ़लक...

देव उठनी, प्रबोधिनी एकादशी, तुलसी विवाह पर विशेष कविता -आलोक शर्मा

जागेंगे आज जगतपति जागेंगे आज जगन्नाथ उठेंगे योगनिद्रा से जगत के पालनहार सोयी नहीं है सबकी प्रार्थना जागती रही है मनोकामना विनय के , हमारे...

कविता, यकीन क्या राजनीति पर है ? देखो कार्य प्रगति पर है. -सुरेश वैष्णव, भिलाई-छत्तीसगढ़

यकीन क्या राजनीति पर है? देखो कार्य प्रगति पर है । कवि सुरेश वैष्णव भिलाई नगर मार्ग यहां खुदा, वहां खुदा है प्रदूषण में पर्यावरण...

कविता, कुटुमसर की मछलियां- उर्मिला शुक्ल, रायपुर-छत्तीसगढ़

बस्तर के कुटुमसर गुफ़ा में तैरती अंधी मछलियां सैलानियों का कुतुहल जगाती उनका मन बहलाती मछलियां हो गयी हैं अब,बहुत व्वायकुल क्या वे आई हैं...
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