poetry

कविता, यकीन क्या राजनीति पर है ? देखो कार्य प्रगति पर है. -सुरेश वैष्णव, भिलाई-छत्तीसगढ़

यकीन क्या राजनीति पर है? देखो कार्य प्रगति पर है । कवि सुरेश वैष्णव भिलाई नगर मार्ग यहां खुदा, वहां खुदा है प्रदूषण में पर्यावरण...

कविता, कुटुमसर की मछलियां- उर्मिला शुक्ल, रायपुर-छत्तीसगढ़

बस्तर के कुटुमसर गुफ़ा में तैरती अंधी मछलियां सैलानियों का कुतुहल जगाती उनका मन बहलाती मछलियां हो गयी हैं अब,बहुत व्वायकुल क्या वे आई हैं...

कविता, देखा करूंगी अपना नाम आसमान पर लिखा हुआ- मेनका वर्मा

●कविता ●देखा करूंगी अपना नाम आसमान पर लिखा हुआ... -मेनका वर्मा मैं रेत पर लिखती रही समुंदर की लहरें मिटाती रही रफ़्तार बढ़ाती रही मैं...

ग़ज़ल – डॉ. संजय दानी

पेड़ों के बदन से कपड़े सारे उतर गये, बारिश के करिंदे दे कर दर्द गुज़र गये। कुछ मज़हबी आंधियां यूं आ रहीं नीचे से, के...

बाल कविता, उठो-उठो जी उठो-उठो हुआ सवेरा, उठो-उठो -बलदाऊ राम साहू

उठो-उठो जी उठो-उठो हुआ सवेरा, उठो-उठो। मुर्गे ने हैं बाँग लगाई उठो-उठो चिड़ियाँ भी हैं चीं-चीं गाईं उठो-उठो। कौंवे बन आये हलकारे उठो-उठो गुन-गुन,गाते भौंरे...
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