मैनपाट- कविता की पृष्ठभूमि 6 years ago डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' कोरबा-छत्तीसगढ़ कविता की पृष्ठभूमि धरा का श्रृंगार है दृष्टि पड़ती है जिधर बहार ही बहार है प्रेम का अनन्य केन्द्र ये...
बाल कविता, उठो गुनगुन उठो-उठो – त्र्यम्बक राव साटकर “अम्बर 6 years ago उठो गुनगुन उठो-उठो । हुआ सबेरा उठो-उठो । चुनमुन देखो उठ गया । बिस्तर छोड़ बैठ गया । तुम भी बिस्तर छोड़ो । आँखें खोलो...
कविता, ऐसे मनाएं दीवाली -ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर’, राजनांदगांव-छत्तीसगढ़ 6 years ago ऐसे मनाएं दीवाली सूरज घोले ऐसी लाली, न आएं कभी रात काली. न हो किसी को गम, सबके जीवन में हो खुशहाली. आओ ऐसे मनाएं...
प्रेमानुभूति- किशोर कुमार तिवारी 6 years ago तेरी चाहत की खुशबू का एहसास है मैं यहाँ हूँ मगर दिल तेरे पास है तेरी चाहत की खुशबू का एहसास है । मैं यहाँ...
इन औरतों पर कोई कविता नहीं बनती- डॉ. सोनाली चक्रवर्ती 6 years ago ये औरतें जो सोचती रहती है सहमती है घिरती है हमेशा इसी चिंता में कोई नाराज तो नहीं आप नहीं मानते? वह देखिए तीज मिलन...
गीत- शुचि ‘भवि’, भिलाई-छत्तीसगढ़ 6 years ago प्रिये तुम्हीं से मिलकर मैंने जीवन को अनुपम बोला था नज़रों ने नज़रों को देखा दिल तक कुछ संदेशे आये इन संदेशों की आमद से...
कविता, कमियां हैं तो खूबियां भी होंगी- अंजली शर्मा, बिलासपुर (छ.ग.) 6 years ago *कमियाँ हैं तो खूबियाँ भी होंगी* " कमियाँ न गिना ऐ मुसाफिर, कमियाँ हैं तो कुछ खूबियाँ भी होंगी। खूबियाँ हैं तो कुछ कमियाँ भी...
कविता, निखरी चंदा की छबि आँगन में- डॉ. सुभद्रा खुराना भोपाल-मध्यप्रदेश 6 years ago ---निखरीचंदाकीछवि आँगनमें--- निखरी चंदा की छवि आँगन में, सुरभि साँस में, प्रीत नयन में। कानों में झंकृत पग-ध्वनि-स्वर, मधुर गन्ध भर उठता अन्तर, स्तुति हित...
ग़ज़ल, जब भी चाहा आज़माना क्या करें हर दफ़े चुका निशाना क्या करें- नीलम जायसवाल, भिलाई-छत्तीसगढ़ 6 years ago -- '' क्या करें '' -- जब भी' चाहा आजमाना क्या करें। हर दफे़ चूका निशाना क्या करें। हम सदा पिछड़े रहे संसार में- बढ़...