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- ■कमरछठ के तिहार. ■प्रिया देवांगन ‘प्रियू’.
■कमरछठ के तिहार. ■प्रिया देवांगन ‘प्रियू’.
■कमरछठ के तिहार.
-प्रिया देवांगन ‘प्रियू’.
[ पंडरिया, जिला-कबीरधाम, छ. ग. ]
छत्तीसगढ़ ला धान के कटोरा कहे जाथे। हमर छत्तीसगढ़ मा धान के उत्पादन बहुत होथे।
छत्तीसगढ़ के मनखे ला हरियर – हरियर खेत – खार अउ हरियर-हरियर रुखराई ले जादा लगाव रहिथे।
छत्तीसगढ़िया मनखे मन हर खेती-किसानी से जुड़े हर तिहार ला धूम-धाम से मनाथे।
सावन महिना मा हरेली के बाद कई ठन तिहार आथे, अउ ओमा एक कमरछठ (हलषष्ठी)के तिहार भी मनाये जाथे।
काबर मनाये जाथे – ये दिन भगवान किशन कन्हैया के बड़े भाई बलदाऊ जी के जनम होये रिहिसे। ये तिहार ला भादो महीना के अँधियारी पाख के छठ के दिन मनाये जाथे।
कथा मा बताये जाथे कि दुवापर जुग मा माता देवकी हा अपन पुत्र किशन ला बचाये बर ये व्रत (उपवास) ला करत रिहिसे। काबर की कंस हा देवकी के सबो लइका ला मारत रिहिसे तब नारद जी आ के माता देवकी ला ये व्रत करे के सलाह , उपाय बताइस। माता देवकी हा जब व्रत रखिस त ओखर प्रभाव से किशन हा बाच गे। ओखर बाद किशन कन्हैया हा कंस ला मारिस,अउ विजय पाइस। ओखर कारन आज ये व्रत ला जम्मो नारी शक्ति मन अपन लइका के सुख समृद्धि अउ खुशहाली जीवन बर ये तिहार ला मनाथे।
ये व्रत ला विवाहित महिला मन ही करथें।
ये दिन जम्मो महिला मन हर बिहनिया ले उठ के महुआ पेड़ के टहनी (लकड़ी)के दतुवन करथे। गाँव-गाँव मा बिहनिया ले लाई, दूध, दही,घी,महुआ, दोना अउ पतरी बेचाये ला आथे।
ये दिन सिरिफ भँइस के दूध, दही, घींव ला उपयोग मा लाये जाथे अउ बिना हल चले वाला भोजन करे जाथे।
पूजा के समान – चना, गेहूँ, धान, महुआ, दूध,दही,घींव, नरियल, फूल -फल, लाई ,हरदीअउ पोती(हल्दी से भीगे छोटे से कपड़ा)।
जम्मो नारी सक्ति मन कोरान साड़ी ला पहिर के तैयार होथे। अउ परात मा पूजा के समान
जइसे- चना, मसूर, लाई,गेहूँ, धान,महुआ,दूध,दही,घींव, नरियल,फल-फूल,हरदी अउ पोती ला रख के मंदिर जाथे। मन्दिर मा जम्मो महिला मन सकलाथे अउ सगरी के आगू मा बइठ के महाराज के बताये अनुसार पूरा विधि-विधान से पूजा करथे। कथा ला सुनथे अउ अपन लोग-लइका के सुखी जीवन के कामना करथें।
घर मा आये के बाद जम्मो महिला भगवान ला भोग लगाथे, अउ पसहर चाऊंँर अउ छै परकार के भाजी ला बनाथे।भाजी ला घींव अउ अंग्रेजी मिर्चा मा बघारथे। आज के दिन अंग्रेजी मिर्चा हा चुरपुर नइ लागय। ये ला सिरिफ कमरछठ के दिन ही खाये जाथे।
लइका मन के आज के दिन स्कूल के जल्दी छुट्टी हो जाथे। लइका मन घर मा आथे ओखर बाद हमर दाई – माई (माँ) मन हर पोती (हल्दी से भीगे छोटे से कपड़ा)मार के आशीर्वाद देथे।
लइका मन खुशी-खुशी आशीर्वाद लेथे अउ परसाद खाये बर बइठ जाथे।
परसाद खाये के नियम – सब ले पहिली दाई-माई (माँ) मन हा छै ठन पतरी मा पसहर भात, दूध, दही,भाजी ला निकालथे अउ घर के दुवारी मा गाय,बछरु, चिरई-चिरगुन,कुकुर,बिलई मन बर रखथे।
ओखर बाद घर के जम्मो लइका सियान मन ये परसाद ला ग्रहण करथे।
लइका मन ला ये परसाद बहुत पसंद आथे।
खाये के बाद सबो दोना-पतरी ला धर के लइका मन हर तरिया, नदिया मा बोहा के आथे।
ये तिहार घर के सुख-सम्पत्ति अउ खुशहाली जीवन एकता के तिहार हरय। जेमा जम्मो परिवार मन मिल जुल के मनाथे, अउ भगवान से आशीर्वाद लेथे।
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