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- ■साहित्य : ‘मुक्तकंठ साहित्य समिति,मासिक बुलेटिन [नवम्बर-2021,अंक-3] लोकार्पित.
■साहित्य : ‘मुक्तकंठ साहित्य समिति,मासिक बुलेटिन [नवम्बर-2021,अंक-3] लोकार्पित.

■भिलाई

‘मुक्तकंठ साहित्य समिति’ द्वारा प्रकाशित मासिक बुलेटिन ‘मुक्तकंठ’ का लोकार्पण भिलाई निवास के ‘इंडियन कॉफ़ी हाउस’ में समिति के पूर्व अध्यक्ष रजनीकांत श्रीवास्तव के मुख्यअथिति, अध्य्क्ष गोविंद पाल के सभापतित्व औऱ समिति के संरक्षक प्रदीप भट्टाचार्य के विशिष्ट उपस्थिति में किया गया.

इस अंक में समिति द्वारा अक्टूबर माह की गतिविधियों के साथ-साथ अध्यक्ष गोविंद पाल ने अपनी विशेष टिप्पणी में ‘मतभेद को मनभेद न बनाएं’ कहा-जाति धर्म की राजनीति से परे हमें सोच में परिवर्तन की आवश्यकता है’●
दीपावली अंक के रूप में प्रकाशित इस अंक में ‘दीप से दीप जले’-गोविंद पाल, ‘दिवाली दिवाली हो गई दिवाली’-सुरेश पटवा, ‘ग़ज़ल’-शेख निज़ाम राही, ‘चलो मन दीप जलाएं’-राम सजीवन यादव दीपावली से सम्बंधित रचनाओं के अलावा,इनकी भी उत्कृष्ट रचनाओं को स्थान दिया गया- ‘बच्चों की दुनियां’ श्रीमती मधु तिवारी, ‘मंजिल कहां मुश्किल’ द्रौपदी साहू, ‘मैं मुक्तकंठ’ विक्रम अपना, ‘भाई दूज’ अनिता मंदिलवार सपना, ‘देश की पहचान है-हिंदी’ डॉ. नीलकंठ देवांगन, ‘चिर सत्य’ प्रकाश चंद्र मण्डल, ‘कर्म’ श्रीमती मधु तिवारी, ‘ग़ज़ल’ लतीफ़ खान ‘लतीफ़’●
8 पेज़ की संग्रहणीय ‘मुक्तकंठ’ में संपादक दुलाल समद्दार ने अपनी संपादकीय में कहा- ‘चिठ्ठी आई है.. आई है..चिट्ठी आई है.. बड़े दिनों के बाद..’ ग़ज़ल गायक पंकज उधास के गाये पंक्तियों को लेकर बीते जमाने के पोस्टकार्ड का उल्लेख बखूबी से किया है●
कुल मिलाकर ‘नवंबर-2021,अंक-3’ पठनीय बन पड़ा है●
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