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■डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’.
♀ 67वें जन्मदिवस पर विशेष
♀ 7 फरवरी
7 फरवरी जन्मदिन पर विशेष-
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आज प्रदेश ही नहीं देश के लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार डॉ.माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ का जन्मदिन है। आप आसपास पत्रिका के नियमित लेखक होने के साथ ही मार्गदर्शक भी हैं। हम पत्रिका परिवार की ओर से उनके अच्छे स्वास्थ्य एवं दीर्घायु होने की कामना करते है। अपने पाठकों के लिए आज हम प्रस्तुत कर रहे हैं उनके जीवन एवं काव्य यात्रा का संक्षिप्त विवरण एवं कुछ फोटोग्राफ्स —
संक्षिप्त परिचय
नाम – डॉ.माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’
जन्मतिथि – 07.02.1955
जन्मस्थान – डोंगरगढ़ , जिला-राजनांदगाँव (छ.ग.)
शिक्षा – एम.एस.सी (रसायन शास्त्र) , विद्या वाचस्पति
संप्रति – भू.उपमहाप्रबंधक(पर्यावरण प्रबंधन),एनटीपीसी,कोरबा, छ.ग.
– भू. जिला पर्यावरण विशेषज्ञ(डीईआईएए),जिला-कोरबा(छ.ग.)MoEFके अधीन , भू. आब्जर्वर इंजीनियरिंग कॉलेज ,कोरबा ।
वर्तमान – स्वतंत्र लेखन ।
डाक का पता – क्वा.नं.- ए.एस.14, पावरसिटी, अयोध्यापुरी, जमनीपाली, जिला-कोरबा (छत्तीसगढ़) 495450
चलभाष – 9424141875 एवं 7974850694
ईमेल – vskm_manik@rediffmail.com
प्रकाशित कृतियाँ –
(1) तेरे शहर में (ग़ज़ल संग्रह)
(2) माँ बम्लेश्वरी (संक्षिप्त इतिहास)
(3) यादों की मीनारें (ग़ज़ल संग्रह)
(4) सर्पदंश (ग़ज़ल संग्रह)
(5) हरे पेड़ की सूखी टहनी (गीत संग्रह)
(6) पसंगा (ग़ज़ल संग्रह)
(7) लंबे दिन लंबी रातें (गीत संग्रह)
(8) मन के विपरीत (ग़ज़ल संग्रह)
(9) द्विविध ( दोहा एवं मुक्तक संग्रह)
(10) पुन्नी के चंदा ( 36 गढ़ी गीत संग्रह)
(11) साहित्य के माणिक नवरंग (एकाग्र)
(12) नवरंग की कुंडलियाँ
(13) रिश्ते टूट गए (नवगीत संग्रह)
(14) गाँव के हो गए (हिन्दी ग़ज़ल संग्रह – हिंदकी)
प्रकाशनाधीन –
प्रचलित छंद एवं नवछंद विधान हिंदकी
संपादन –
(1)संकेत (हिन्दी काव्य संग्रह)
(2) कोरबा के कवि (हिन्दी काव्य संग्रह)
(3) गुड़ेरिया ( छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह)
(4) मन का अंतरजाल (हिन्दी काव्य संग्रह) एवं
(5) हिंदकी (हिन्दी ग़ज़ल संग्रह)
विभिन्न ग्रन्थों में रचनाएँ, आलेख एवं परिचय संग्रहीत –
• उपलब्धि-2009 (अंतर्राष्ट्रीय काव्यसंग्रह)
• धूम्र ज्योति (काव्य संग्रह )
• भारत के श्रेष्ठ हिन्दी कवि एवं कवयित्रियाँ (काव्य संग्रह )
• श्रेष्ठ काव्य माला (काव्य संग्रह )
• इक्कीसवीं सदी के श्रेष्ठ हिन्दी कवि एवं कवयित्रियाँ (काव्य संग्रह )
• समकालीन गीत कोश ( वृहद समकालीन गीत संग्रह )
• बांदा का योगी – केदारनाथ ( आलेख संग्रह )
• छत्तीसगढ़ के सरस स्वर (काव्य संग्रह )
• छत्तीसगढ़ कविता के सौ साल (काव्य संग्रह )
• राष्ट्रीय बाल साहित्य ग्रंथ
• अंतरराष्ट्रीय लघुकथा संग्रह
• वृहद हिन्दी साहित्यकार संदर्भ कोश ( संक्षिप्त परिचय)
• शामियाना ( ग़ज़ल संग्रह )
• आँसू ( ग़ज़ल संग्रह )
• एक तू ही ( हंदिया काव्य संग्रह )
• वीणा ( नवगीत संग्रह )
• साहित्य त्रिवेणी ( नवगीत संग्रह )
• कई फूल कई रंग (काव्य संग्रह )
• गुफ़्तगू – नात संग्रह
• रौशनी इधर भी है (काव्य संग्रह )
• संत कबीर का छत्तीसगढ़ ( आलेख संग्रह )
• सदी के मशहूर ग़ज़लकार (ग़ज़ल संग्रह )
• छत्तीसगढ़ का सम्पूर्ण व्याकरण एवं
• छत्तीसगढ़ विशिष्ट आध्यन – तृतीय संस्करण 2021
• मंज़र ( ग़ज़ल संग्रह )
• साहित्यायन (काव्य संग्रह)
• गीत पुरुष मीत पुरुष ( आलेख संग्रह )
• अहसास (काव्य संग्रह )
• हिन्दी विमर्श के विविध आयाम ( आलेख संग्रह )
• कला परंपरा साहित्य बिरदारी ( संक्षिप्त परिचय)
• नवगीत परिचय कोश ( संक्षिप्त परिचय)
प्रकाशन – अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय प्रमुख पत्र, पत्रिकाओं, विशेषांकों एवं काव्य संग्रहों में नियमित प्रकाशन ।
समाचार पत्र – देशबंधु, अमृत संदेश, नवभारत, हरिभूमि, दैनिक भास्कर, प्रखर समाचार, पत्रिका, दक्षिण भारत राष्टमत, नेशनल एक्सप्रेस, सवेरा संकेत, अपडेट न्यूज, चैनल इंडिया, बालको समाचार, सवेरा संकेत, इतवारी अखबार, लोक कला दर्पण,रचनाकार पत्रिका, एवं मालव समाचार आदि।
पत्रिकाएँ एवं काव्य संग्रह – मंथन (सन 1975) ,वीणा, हंस , साप्ताहिक हिंदुस्तान, सरिता, साहित्य अमृत, पाखी ,माधुरी, हरियाणा संवाद, त्रिवेणी, मन्वन्तर , आसपास , विंध्यसंदेश, अंत्योदय, आमंत्रण, विद्युत स्वर, विंध्यवीणा, युगधर्म, जनपक्ष, मयारूमाटी, सरस्वती सुमन, अभिनव प्रयास, अक्षरपर्व, विचारवीथी, किस्सा कोताह, अदबनामा , छत्तीसगढ़ मित्र, अंतर्राष्ट्रीय ब्राह्मण समाचार, प्रज्ञातंत्र, अट्टहास, गुफ़्तगू, शोध प्रभांजलि, शब्द प्रवाह, अदबनामा, अर्बाबे कलम, हिंदुस्तानी भाषा भारती, कला परंपरा, विजन टूडे, भारत भारती, स्वर्णप्रभा, सृजनसुमन, जनपक्ष मध्य वार्ता, अरुणिमा ,तख़्तो ताज, ग़ज़ल के बहाने, जर्जर कश्ती, शोधदिशा, उजाला, छत्तीसगढ़ आसपास , अंतहीन, लोकसुर, जंगलबुक, सर्वहारा पथ, ठेंगे पर मार दिया,काव्य वाटिका,कोशिश, प्रगतिसमाचार, लोकस्वर, नूतन कहानियाँ ,नव साहित्य त्रिवेणी, मरु नवकिरण , जन आकांक्षा ,सृजन महोत्सव , आदित्य संस्कृति, स्पर्श , वार्षिकांक – उजाला (1990 से अभीतक नियमित रूप से), अमृतसंदेश एवं नवभारत दीपावली विशेषांक आदि)।
सम्मान एवं अलंकरण – 100 से अधिक (आंचलिक,प्रांतीय एवं राष्ट्रीय) जिसमें डॉ.रमन सिंह, मुख्य मंत्री छत्तीसगढ़ शासन के हाथों कबीर साहित्य रत्न सम्मान 1.12.2007 , विधान सभा अध्यक्ष छ.ग.के हाथों प्रदत्त दिनकर सम्मान -2016 एवं गृहमंत्री छ.ग.शासन द्वारा विवेकानंद भवन दुर्ग में प्रदत्त साहित्य सम्मान एवं शिक्षा मंत्री छ.ग. शासन के हाथों शिवनाथ स्वाभिमान सम्मान 2021 शामिल है)
( कुछ प्रमुख – छत्तीसगढ़ साहित्य रत्न 1989, हस्ताक्षर सम्मान – 2003, साहित्य शिरोमणि मानद उपाधि- 2004 , राष्ट्रभाषा सम्मान-2004, कृति भूषण सम्मान-2006,साहित्य सम्मान-2006, बैरिस्टर छेदीलाल स्मृति सम्मान-2007, अग्र साहित्य सम्मान-2008, साहित्य सुदर्शन मानद उपाधि-2008, राष्ट्र भाषा अलंकरण-2010, हिन्दी विद्यारत्न भारती सम्मान-2010, शब्द भूषण एवं अखिल भारतीय सम्मान-2010 , विद्या वाचस्पति मानद उपाधि-19.12.2010 , भारतीय भाषा रत्न एवं कवि शिरोमणि मानद उपाधि-2011, श्रेष्ठ ग़ज़ल साधक सम्मान-2012 , एनटीपीसी कोरबा द्वारा स्वतन्त्रता दिवस समारोह में नागरिक अभिनंदन एवं सम्मान, कौमी एकता अवार्ड-2012, कौमी एकता अवार्ड-2012, अखिल भारतीय हिन्दी सेवी संस्थान द्वारा राष्ट्र भाषा गौरव सम्मान-2012 ,हिन्दी दिवस सम्मान -2013 नवोदय विद्यालय कतघोरा द्वारा, हिन्दी में उत्कृष्ट कार्य के लिये रोलिंग ट्रॉफी 2014, एनटीपीसी के क्षेत्रीय निर्देशक के हाथों विश्व हिन्दी दिवस पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में विश्व हिन्दी दिवस 2014 को अभिनंदन एवं सम्मान, 15.3,2015 को रामपुर में नागरिक अभिनंदन एवं सम्मान,राष्ट्रकवि दिनकर सम्मान 2016 , हिन्दी दिवस 2017 को बालको-वेदांता द्वारा आयोजित परिचर्चा में हिन्दी सेवा सम्मान, निखिल शिखर सम्मान 2018, नवरंग साहित्य विभूति सम्मान 2018, हिन्दी काव्य भूषण सम्मान 2019 ,विश्वकर्मा कुलरत्न 2020 , अनमोल मणि सम्मान 2020 , डॉ.अन्नपूर्णा भदौरिया साहित्य सम्मान 2020, शिवनाथ स्वाभिमान सम्मान 2021 , एनटीपीसी द्वारा हिन्दी दिवस 2021 सम्मान व अभिनंदन , अक़बर इलाहाबादी स्मृति सम्मान 2021 एवं कला परंपरा साहित्य रत्न सम्मान 2021 )
● पिछले 44 वर्षों से आंचलिक एवं अ.भा.मंचों से काव्य पाठ।
सहभागिता – प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित साहित्य सम्मेलन, परिचर्चा एवं कवि सम्मेलन ।
● भोपाल में आयोजित दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में सहभागिता।
प्रसारण – दूरदर्शन (डीडी -1, आजतक, आईबीएन-7, ई-टीवी, ज़ी-छ.ग,गुंबर टीवी एवं एसीएन) तथा आकाशवाणी केंद्रों (रायपुर, नागपुर, इंदौर, रींवा एवं बिलासपुर ) से रचनाएँ प्रसारित (सन 1980 से)
साहित्य संपादन – एसीएन टीवी चैनल कोरबा(छ.ग.)
चयन समिति – किस्सा कोताह (साहित्यिक पत्रिका), ग्वालियर ।
समीक्षा – 100 से अधिक समीक्षाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित ।
शोध कार्य – हिन्दी ग़ज़ल का इतिहास एवं ‘नव छंद विधान हिंदकी’ के प्रवर्तक के रूप में राष्ट्रीय ख्याति।
व्यक्तित्व एवं कृतित्व की विशेषताएँ – डॉ. माणिक विश्वकर्मा नवरंग का रचना संसार विशाल एवं बहुआयामी है। उनकी भाषा सरल,सुबोश,आकर्षक एवं ललित है। उनकी रचनाएँ – रचना कौशल ,भाषा शैली, अर्थ विश्लेषण एवं विवेचना की हर कसौटी में खरी उतरती है। उनकी अभिव्यक्ति की सहजता हृदय स्पर्शी है। प्रकृति एवं वर्तमान के सारे उपदान समाहित होने के कारण उनकी रचनाओं में भाव सम्पदा एवं कला शौष्ठव का अद्भुत मार्मिक संयोजन देखने को मिलता है। उनकी रचनाएँ मानव मूल्यों को संपूर्णता प्रदान करती हैं। रचनाओं में नयापन,नयी बानगी,नयी रवानगी,एवं नित नये प्रतीक-बिंबों का प्रयोग उन्हें अन्य रचनाकारों से अलग पहचान दिलाता है। यही उनकी ख़ूबी भी है। डॉ.माणिक विश्वकर्मा नवरंग के व्यक्तित्व एवं कृतित्व में कबीर जैसी दबंगता,दुष्यंत जैसा तटकापन,एवं नज़ीर जैसी लोक चेतना दिखाई देती है।उनके जैसा बेलागी एवं बेबाकी से लिखने वाले छत्तीसगढ़ में बहुत कम होंगे। आम आदमी की लड़ाई हो या पर्यावरण संरक्षण की बात उन्होंने इस अभियान में हरदम बढ़कर हिस्सा लिया है।तीस वर्षों तक पर्यावरण प्रबंधन एवं प्रदूषण नियंत्रण का कार्य देखते हुये उन्होंने हजारों पेड़ लगवाया है। वे साहित्य जगत में अपने विशिष्ट लेखन शैली एवं प्रस्तुतीकरण के लिये जाने हैं।आज वे मंच, प्रकाशन , प्रसारण एवं व्याख्यान के क्षेत्र में समान रूप से सक्रिय हैं। मानव मूल्यों के पक्षधर कवि के रूप में भी उन्हें ख्याति मिली है।डॉ. माणिक विश्वकर्मा नवरंग छत्तीसगढ़ एवं छत्तीसगढ़ियों के प्रति मन में अथाह सम्मान एवं प्रेम की भावना रखते हैं। मित्रों के एवं विरोधियों के बीच समान रूप से लोकप्रिय नवरंग की गणना छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने वाले प्रमुख साहित्यकारों में होती है। आज भी वे व्यावसायिकता से दूरी बनाते हुए पूरी ईमानदारी के साथ साहित्य सृजन एवं लेखन में जुटे हैं। वे राष्ट्र भाषा हिन्दी एवं राजभाषा छत्तीसगढ़ी की सेवा करने को पुनीत कार्य मानते हैं।
हिन्दी भाषा के उन्नयन एवं विकास हेतु किए गए विशेष कार्य का विवरण –
डॉ.माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ ने हिन्दी ग़ज़लों एवं हिन्दी भाषा के उन्नयन एवं विकास हेतु नव छंद विधान हिंदकी का निर्माण किया है जिसका प्रकाशन देश की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं एवं अखबार में हो चुका है। विभिन्न लोगों ने इस छंद के विषय में सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ दीं हैं हिंदकी के प्रचार प्रसार हेतु उनके द्वारा कार्यशाला एवं प्रकाशन के माध्यम से किए गए प्रयास एवं इस कार्य हेतु प्राप्त सम्मान का विवरण निम्नानुसार है
● दिनांक 21.9.2014 को संस्कार भारती बाल्कोनगर कोरबा द्वारा आयोजित ग़ज़ल लेखन कार्यशाला में हिन्दी , उर्दू विधान के अलावा नवछन्द विधान हिंदकी संबन्धित प्रस्तुतीकरण.
● दिनांक 20.3.2016 को राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर द्वारा छ.ग. संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित ग़ज़ल लेखन कार्यशाला में हिन्दी , उर्दू विधान के अलावा नवछन्द विधान हिंदकी संबन्धित प्रस्तुतीकरण.
● दिनांक 17.9.2016 को राष्ट्रीय कवि संगम द्वारा रायपुर में आयोजित राष्ट्र कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’जयंती समारोह एवं प्रांतीय अधिवेशन में पर्यावरण प्रबंधन,सामाजिक सरोकार को सार्थक मार्गदर्शन देने एवं नयी पीढ़ी को छंद विधान एवं ग़ज़ल की बारीकियों से परिचित कराने का अभियान संचालित करने के लिये विधानसभा अध्यक्ष छत्तीसगढ़ शासन के हाथों राष्ट्र कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ सम्मान प्रदान किया गया.
● दिनांक 20.11.2016 को छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित अखबार अमृत संदेश के रविवारीय कवर पेज में हिन्दी ग़ज़ल का इतिहास एवं नवछन्द विधान हिंदकी आलेख प्रकाशित.
● दिनांक 3.12.2016 को राष्ट्रीय कवि संगम कोरबा द्वारा पं.मुकुटधर पाण्डेय साहित्य भवन™ कोरबा में आयोजित हिन्दी व्याकरण,ग़ज़ल लेखन एवं नवछन्द विधान हिंदकी संबन्धित प्रस्तुतीकरण.
● साहित्य कला एवं संस्कृति की त्रैमासिक पत्रिका विचार वीथी (फरवरी,मार्च,अप्रेल-2017अंक) में शोध आलेख हिन्दी ग़ज़ल का इतिहास एवं नवछन्द विधान हिंदकी प्रकाशित.
● दिनांक 1.2.2017 को बसंत पंचमी के उपलक्ष्य में पं.मुकुटधर पाण्डेय साहित्य भवन कोरबा में आयोजित सरस्वती पूजन के पश्चात अंचल के साहित्यकारों की उपस्थिति में नवछन्द विधान हिंदकी की हिन्दी ग़ज़ल लेखन में भूमिका विषय पर चर्चा एवं हिंदकी छंद को सार्वजनिक करने की घोषणा.
● मार्च -2017 को सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक पत्रिका – ब्राह्मण अंतर्राष्ट्रीय समाचार में आलेख हिन्दी ग़ज़ल का इतिहास एवं नवछन्द विधान हिंदकी आलेख प्रकाशित.
● अप्रैल -2017 को केंद्रीय हिन्दी निदेशालय भारत सरकार द्वारा नामित ग्रंथलयों के लिए स्वीकृत एवं पं.माधव राव सप्रे साहित्य शोध केंद्र से रचनात्मक सहयोग प्राप्त पत्रिका छत्तीसगढ़ मित्र में हिन्दी ग़ज़ल का इतिहास एवं नवछन्द विधान हिंदकी आलेख प्रकाशित.
● साहित्यिक,सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक चेतना का संदेश वाहक प्रज्ञातंत्र के अप्रेल,मई ,जून -2017 अंक में हिन्दी ग़ज़ल का इतिहास एवं नवछन्द विधान हिंदकी आलेख प्रकाशित.
● भारतीय भाषाओं के प्रचार प्रसार और संवर्धन को समर्पित संस्था हिंदुस्तानी भाषा अकादमी की हिंदुस्तानी भाषा भारती त्रैमासिक पत्रिका के अप्रेल-जून 2017 अंक में आलेख हिन्दी ग़ज़ल का इतिहास एवं नवछन्द विधान हिंदकी प्रकाशित.
● दिनांक 17.5.2017 को मैत्रयी उजास साहित्य पटल एवं दिनांक 4.7.2017 को पत्रिका समिति साहित्य पटल पर हिन्दी ग़ज़ल का इतिहास एवं नवछन्द विधान हिंदकी विषय पर विस्तार से चर्चा.
● किस्सा कोताह हिन्दी त्रैमासिकी, अप्रेल-जून 2018 अंक में आलेख हिन्दी ग़ज़ल का इतिहास एवं नवछन्द विधान हिंदकी प्रकाशित.
● हिन्दी ग़ज़ल का इतिहास एवं नवछन्द विधान हिंदकी पर कई साहित्यिक व्हाट्सएप समूह में विस्तार से चर्चा भी आयोजित की गई । प्रतिकृया व्यक्त करने वाले साहित्यकारों के सकारात्मक विचारों से इनके इस अभियान को तीव्र गति मिली यथा –
• डॉ.माणिक विश्वकर्मा का महत्वपूर्ण आलेख : अशोक असफल
•आलेख पढ़कर स्वयं को समृद्ध किया : मनोज जैन ‘मधुर ‘
•हिन्दी ग़ज़ल पर डॉ.माणिक विश्वकर्मा का लेख अच्छा लगा इसमें ग़ज़ल विधा की पृष्ठभूमि तो है ही उसके आगामी विकास के कई सूत्र भी पेश किए गए हैं : डॉ. बजरंग बिहारी तिवारी
•आलेख डायरी में नोट किया ताकि मुझ जैसे नवोदित भी हिन्दी ग़ज़ल सीख सकें : नवीन जैन अकेला
•आ.माणिक विश्वकर्मा जी का हिन्दी ग़ज़ल का इतिहास पढ़ने को मिला ,निः संदेह ज्ञानवर्धक एवं आज की पीढ़ी के लिए धरोहर स्वरूप है । माणिक सर को हार्दिक बधाई एवं नमन : डॉ.शिव सिंग
•विचारणीय ज्ञानवर्धक लेख. सहमत हूँ कि हिन्दी में ग़ज़ल के अपने मापदंड होने चाहिए।माणिक जी ने काफी मेहनत से लिखा. संग्रहणीय. आभार. : खुदेज़ा ख़ान
•आ.माणिक विश्वकर्मा जी का हिन्दी ग़ज़ल संबंधी आलेख पढ़कर मन को सांत्वना मिली। निः संदेह आपके इस आलेख से मन में नयी आशा का संचार हुआ है जिससे सृजनात्मकता को सहयोग मिलेगा और हिन्दी ग़ज़ल को जीवित रखने में यह आलेख मील का पत्थर साबित होगा .इसके लिए माणिक विश्वकर्मा जी को हृदय से धन्यवाद एवं आभार : सी.पी.सिंह ‘जादौन’
•आदरणीय नवरंग जी को एक सार्थक और उद्देश्यपूर्ण आलेख के लिए हार्दिक बधाई. उनके इस श्रमसाध्य कार्य के फलीभूत होने के लिए शुभकामनाएँ : सत्य प्रसन्न
•हिंदकी जन्म की बहुत बधाई . अभिनव प्रयास के अभियान में हम साथ हैं . सनातनी सुरक्षा के लिए प्राण भी हाजिर: सुनीता जैन मैत्रयी
• सार्थक एवं तथ्यपरक जानकारी. आभार डॉ.माणिक भाई का. – ज्योति खरे
• श्रीयुत नवरंग जी का हिन्दी ग़ज़ल के संबंध में विस्तार से शोधपूर्वक तथ्य पढ़कर बहुत सारी जानकारी मिली. बहुत अच्छा आलेख है : जय राम ‘जय’
• परिवर्तन की दिशा में सार्थक पहल. आपने जो कहा समझ में आया। कोशिश करेंगे हम भी कुछ लिखने की: नीलिमा करैया
• वाकई माणिक जी बेहतरीन लेख है आपका: चित्रा
• हिन्दी ग़ज़ल का संक्षिप्त इतिहास निश्चित ही सभी ग़ज़ल प्रेमियों के लिए उपयोगी है. नवछन्द विधान पर दृष्टिपात कर उसे गहराई से समझना भी उतना ही आवश्यक है. डॉ.माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ जी को शुभकामनाएँ : ज्योति गजभिये
• आदरणीय माणिक जी का ज्ञानवर्धक आलेख पढ़ा . अच्छी जानकारी मिली. धन्यवाद माणिक सर : पी.एल.दुबे
• नवरंग जी आपने अच्छी जानकारी दी धन्यवाद: धर्मराज देशराज
• इस सार्थक लेख हेतु बहुत बहुत बधाई। यह ग़ज़ल को समझने में सहायक सिद्ध होगा : भावना तिवारी
• डॉ.नवरंग जी ,बहुत उपयोगी जानकारी व आपका सरहनीय प्रयास. बहुत बधाई : राजेंद्र श्रीवास्तव
• वाह,बहुत ही सुंदर जानकारी : विनोद सागर
• हिंदकी (हिन्दी ग़ज़ल संग्रह) के प्रकाशन को इसी शृंखला की एक कड़ी के रूप में लिया जाना तर्क संगत होगा छत्तीसगढ़ में हिन्दी ग़ज़ल सम्राट के नाम से विख्यात डॉ.माणिक विश्वकर्मा’नवरंग’ को मैं चार दशकों जानता हूँ. उनकी भाषा की सरलता,विचार-गर्भिता, हृदयस्पर्शी भाव ,किसी भी बात को परखने की सूक्ष्म दृष्टि एवं स्पष्टवादिता ने हिन्दी गज़लों को नया स्वरूप प्रदान किया है.उनके कहने का अंदाज़ क़ाबिले तारीफ़ है. उनके द्वारा निर्मित हिंदकी छंद ,हिन्दी ग़ज़ल ही नहीं विभिन्न भाषाओं में लिखी जा रहीं ग़ज़लों के लिए भी उपयोगी है।नए लिखने वालों के लिए तो संजीवनी है : युनूस दानियालपुरी

सामाजिक योगदान –
डॉ.माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ द्वारा किए गए साहित्यिक एवं सामाजिक कार्यों का संक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है –
• हिन्दी ग़ज़लों एवं हिन्दी भाषा के उन्नयन एवं विकास हेतु नव छंद विधान हिंदकी का निर्माण किया है जिसका प्रकाशन देश की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं एवं अखबार में हो चुका है।इससे हिन्दी ग़ज़ल लेखन की गति को बढ़ावा मिल रहा है।
• राष्ट्रीय संस्कार भारती एवं राष्ट्रीय कवि संगम के बैनर तले पर्यावरण प्रबंधन,सामाजिक सरोकार को सार्थक मार्गदर्शन देने एवं नयी पीढ़ी को छंद विधान एवं ग़ज़ल की बारीकियों से परिचित कराने के लिए अब तक तीन कार्यशालायें लगा चुके हैं इसका लाभ नई पीढ़ी के लोगों को मिल रहा है ।
• कोरबा में शासन के सहयोग से पंडित मुकुटधर पाण्डेय साहित्य भवन के निर्माण में इनकी महती भूमिका रही है इसका लाभ सैकड़ों वर्षों तक आने वाली पीढ़ियों को मिलता रहेगा ।
• सामाजिक विसंगतियों एवं विद्रूपताओं के विरुद्ध राष्ट्रीय एकता,समरसता एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए लेखन तथा व्यक्तिगत संपर्क के माध्यम से सतत प्रयत्नशील हैं विभिन्न विद्यालयीन कार्यक्रमों में बच्चों के बीच शिक्षा के अतिरिक्त नैतिक मूल्यों के महत्व के संबंध में जानकारी देत रहे हैं ताकि आदर्श समाज की स्थापना हो सके ।
• नारी उत्पीड़न एवं दहेज के विरुद्ध सामाजिक बैठकों में निरंतर आवाज़ बुलंद करते हैं ताकि नारियों को समाज में उचित स्थान एवं सम्मान मिल सके । वेउद्देश्य, नियति और कर्तव्य के सहारे भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु सतत प्रयत्नशील हैं।

■65 वर्ष
…

■प्रदीप भट्टाचार्य
■संपादक
[ ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ प्रिंट एवं वेबसाइट वेब पोर्टल, न्यूज़ ग्रुप समूह,छत्तीसगढ़]
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chhattisgarhaaspaas
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