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- ■साहित्यिक आयोजन : हिन्दी साहित्य भारती छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में विमोचन,सम्मान,काव्य गोष्ठी.
■साहित्यिक आयोजन : हिन्दी साहित्य भारती छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में विमोचन,सम्मान,काव्य गोष्ठी.
♀ वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र का सम्मान.
♀ बलदाऊ राम साहू द्वारा संपादित पुस्तक ‘छ.ग.लोक गीतों का सामाजिक संदर्भ’

हिंदी साहित्य भारती छत्तीसगढ़ के तत्वाधान में यूनि क्लब यूनिहोम कॉलोनी भाठागांव में पुस्तक विमोचन ,सम्मान समारोह एवं काव्य गोष्ठी का कार्यक्रम संपन्न हुआ। बलदाऊ राम साहू द्वारा संपादित पुस्तक “छत्तीसगढ़ी लोक गीतों का सामाजिक संदर्भ” विमोचन मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि देश के लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार डॉ बुद्धिनाथ मिश्र तथा अध्यक्षता भाषा विद् डॉ. चितरंजन ने किया । विशिष्ट अतिथि के तौर पर डॉ.रमेन्द्र मिश्र एवं डॉ.माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ उपस्थित थे।
कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के समक्ष पूजन अर्चन एवं माल्यार्पण के पश्चात हिंदी साहित्य भारती द्वारा अतिथियों का सम्मान किया। अपने सारगर्भित उद्बोधन में डाॅ बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि कविता मन की शक्ति होती है। रचनाकार की भावनाओं में समय का जीवंत चित्रण दिखाई देता है।

वह अपने समय का साक्षी और प्रहरी होता है। उन्होंने अपने प्रतिनिधि गीत ” “एक बार और जाल फेंक रे मछेरे, जाने किस मछली में बंधन की चाह हो” को सुना कर खूब वाहवाही बटोरी। डाॅ चित्तरंजन कर ने लोक गीतों की सामाजिकता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि लोक गीत वाचिक परंपरा के माध्यम से पीढ़ी -दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती है। हम लोक को शास्त्रसे अलग नहीं कर सकते, सच कहा जाय तो लोक से ही शास्त्र है। हिंदी साहित्य भारती के प्रांताध्यक्ष बलदाऊ राम साहू ने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ में लोक गीतों की समृद्ध परंपरा है। इसे संरक्षित रखने की आवश्यकता है उन्होंने कहा है कि लोक में जीवन का सत्य समाहित है। हम गीतों के माध्यम से सत्य पहुंच पाते हैं। आयोजित काव्य गोष्ठी में बिलासपुर के बुधराम यादव, विजय तिवारी, शैलेन्द्र गुप्ता , डॉ. सुनीता मिश्रा , मयंक मणि, महासमुंद के अशोक शर्मा , रायपुर के रामेश्वर शर्मा, डॉ.माणिक विश्वकर्मा, राजेश जैन राही, डॉ.चित्तरंजन कर, स्वराज करूण,सीमा पांडे , देवयानी शर्मा , किशोर धनावत एवं दुर्ग के बलदाऊ राम साहू ने अपनी रोचक रचनाओं से श्रोताओं को देर तक बाँधे रखा। कार्यक्रम में विशेष रूप रामशरण सिंह, जी आर राणा, स्वराज करूण, विजय मिश्र, नर्मदा प्रसाद नरम, डाॅ महेन्द्र ठाकुर, अर्चना पाठक, शीलकांत पाठक, माधुरी कर, द्रौपदी साहू, दीनदयाल साहू, कोमल राठौर के अतिरिक्त बड़ी संख्या में विभिन्न जिलों से आए साहित्यकार उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ सुनीता मिश्र ने किया तथा आभार प्रदर्शन डाॅ.माणिक विश्वकर्मा’नवरंग’ने किया।
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