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- ⏭️ रक्षाबंधन विशेष : रक्षाबंधन में निहित मूल भावना – पौराणिक मान्यताएँ. ⏭️ डॉ.नीलकंठ देवांगन
⏭️ रक्षाबंधन विशेष : रक्षाबंधन में निहित मूल भावना – पौराणिक मान्यताएँ. ⏭️ डॉ.नीलकंठ देवांगन
बहनों का भाइयों से विशेष स्नेह होता है | बहनें भाइयों के कलाइयों में पवित्रता का एवं धर्म का बंधन बांधती हैं | सारे विश्व में पर्व परंपरा एवं संस्कृति में सबसे अनूठा, सबसे पवित्र भाई बहन के स्नेह का प्रतिक है – रक्षा बंधन जिसकी पृष्ठभूमि पौराणिक काल से संदर्भित है | स्नेह प्रेम का अनमोल रिश्ता है – रक्षा बंधन | भाई बहन के पावन स्नेहमयी रिश्ते की गरिमा को व्यक्त करता है – रक्षा बंधन पर्व | इससे जुड़ी पौराणिक मान्यताएं, ऐतिहासिक घटनाएं , इसमें निहित उदात्त भावना को प्रमाणित करती हैं |
ब्राह्मण पुरोहित भी यजमानों को यह बंधन बांधते हैं | उनके द्वारा रक्षा सूत्र का बांधा जाना श्रेष्ठ जीवन शैली एवं धर्म निष्ठा को दर्शाता है | श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह विशिष्ट त्यौहार न केवल रक्षा बल्कि कर्म के रूप में अनुबंध को दर्शाता है | जिम्मेदारी का अहसास दिलाता है |
शरीरिक नाते से इस बंधन को बांध कर उत्सव को पूरा हुआ मानना इस महान उत्सव के रहस्य को न जानना है | इसमें छिपे हुए निहित संदेश को जानना बांधने वाले एवं बंधवाने वाले के लिए अत्यंत आवश्यक है |
रक्षा बंधन का वास्तविक रहस्य – डोरों का बंधन तो केवल एक सूचक है | कलाई पर बांधा जाने वाला रक्षा सूत्र या राखी एक कच्चे सूत के धागे की हो सकती है, पर भावनाएं तो अनमोल होती हैं | धागों में समाई होती है – पवित्र प्रतिज्ञा | बहन अपने भाई के दीर्घायु और कल्याण की कामना करे और भाई हर स्थिति में अपने बहन के सुख, रक्षा और कल्याण के लिए सदैव कटिबद्ध रहे | साथ ही यह यह व्रत भी धारण करें कि आज से हम पवित्रता के बंधन में बंध गए हैं | हम मन वचन कर्म की पवितता की पूरी रक्षा करेंगे | कभी किसी विकारों के वशीभूत नहीं होंगे |
तिलक और मिठाई का रहस्य – राखी बांधते समय मस्तक में तिलक लगाया जाता है | आत्मा तक पहुंचने का साधन है – तिलक | तिलक आत्मीय स्मृति का प्रतीक है | पवित्रता की धारणा आत्मीय स्थिति में स्थित होकर ही की जा सकती है |
मुख मीठा करने का अर्थ – सदा मधुरता एवं मंगलमय जीवन से है | प्रेम में मिठास होती है | इस मिठास से सभी कड़ुवाहटें भुलाई जा सकती हैं |
पौराणिक मान्यताएं – इस पर्व के मूल में अनेक पौराणिक गाथाएँ प्रसिद्ध हैं | एक मान्यता है कि राजा इंद्र जब वृत्रासुर से युद्ध में हारकर लौटे तो बहुत उदास थे | तब इंद्राणी ने गुरु वृहस्पति द्वारा प्रेरित होकर दोबारा युद्ध में जाते समय इंद्र को रक्षा सूत्र बांधा और पति की विजय सुनिश्चित की | तब इंद्र को दैवी स्वराज्य मिला था |
पौराणिक काल में दैत्यराज बलि ने भगवान विष्णु के वामन अवतार से पाताल लोक का राज्य प्राप्त किया था | प्रसन्न होकर विष्णु ने बलि से वर मांगने कहा, जिस पर बलि ने भगवान से अपने राज्य का रक्षक बनने कहा | तब विष्णु बैकुंठ छोड़ कर पाताल लोक में उसकी सेवा में लग गए | लक्ष्मी को जब पता चला तो वे नाराज हुईं और राजा बलि के पास गईं | उसके हाथ में रक्षा सूत्र बांधा | तब भाई के नाते बलि ने विष्णु को सेवा से मुक्त कर उसके साथ भेजा |
द्वापर युग में शिशुपाल वध के बाद भगवान कृष्ण की उंगली में खून बहता देख द्रौपदी ने अपनी साड़ी से टुकड़ा फाड़कर रक्तरंजित स्थान पर बांधा और खून के प्रवाह को रोका | कृष्ण ने भाई का धर्म निभाते हुए दुशासन द्वारा चीर हरण के समय उसकी लज्जा रक्षा करते हुए वस्त्र संवर्धन कर बहन के मान को संरक्षित किया था |
यमुना ने अपने भाई यम को जब यह बंधन बांधा था तो उसने यह वरदान दिया था कि इस दिन जो बहन भाई रक्षा सूत्र में बंधेंगे, वे यम लोक के दंड से बच जायेंगे |
ऐतिहासिक संदर्भ – पोरस और सिकंदर के युद्ध के समय सिकंदर की पत्नि रोकसाना ने राजा पोरस को राखी बांधकर अपने पति को प्राण दंड से बचा लिया | पोरस ने तब राखी का मान रखा और बीच में ही युद्ध रोक दिया था |
चित्तोड़ की राजपूत रानी कर्मावती ने बहादुर शाह से स्वयं को बचाने मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजकर उसे सहायता के लिए बाध्य कर दिया था | हुमायूं तब बंगाल के विरुद्ध अभियान में था | राखी का मान रखने वह बंगाल से चित्तौड़ आया | तब तक देर हो चुकी थी |
रक्षा बंधन की पावनता, सांस्कृतिक विशेषता सबको एक सूत्र में बांधने की क्षमता रखती है | इसके उद्देश्य को समझें | निःस्वार्थ प्रेम, सुख दुख में साथ देने की भावना और पारस्परिक समझ से हर रिश्ते को सींचें | आज के संदर्भ में इसकी अहमियत को समझें और निभाएं | सबके साथ स्नेह, सहयोग और सम्मान भरा व्यवहार करें |
संपर्क –
84355 52828
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