• Chhattisgarh
  • मीलाॅर्ड ❗नोटबंदी कानूनी हो सकती है, पर सही नहीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

मीलाॅर्ड ❗नोटबंदी कानूनी हो सकती है, पर सही नहीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

3 years ago
165

चाहे तो मोदी सरकार इसे अपने लिए सुप्रीम कोर्ट का नव वर्ष का उपहार मान सकती है। 2016 के 8 नवंबर को नरेंद्र मोदी ने, रात 8 बजे राष्ट्र को संबोधित करते हुए, चार घंटे बाद ही, मध्य रात्रि से पांच सौ रुपए तथा हजार रुपए के नोटों का चलन बंद हो जाने का जो ऐलान किया था, उसकी कानूनी वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सर्वोच्च न्यायालय ने आखिरकार खारिज कर दिया है। पूरे छ: साल के बाद, 2023 के दूसरे ही दिन सुनाए गए फैसले में, पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने, एक असहमति के खिलाफ चार न्यायाधीशों के बहुमत से, नोटबंदी के मोदी सरकार के फैसले को ‘वैध’ माना है, जबकि न्यायमूर्ति नागरत्ना ने इस फैसले से अहमति दर्ज कराते हुए, इसे एक ‘अवैध’ निर्णय बताया है।

मोदी सरकार और उसके समर्थकों के सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटबंदी को सही ठहराए जाने के दावों के विपरीत, सुप्रीम कोर्ट ने बहुत ही सचेत तरीके से और स्पष्ट रूप से, नोटबंदी के कदम के सही या गलत होने के सवाल से, खुद को पूरी तरह से दूर ही रखा है। वास्तव में, संविधान पीठ ने साफ तौर पर कहा है कि अनेक याचिकाकर्ताओं की दलीलों के विपरीत, उसके लिए तो यह सवाल ही अप्रासांगिक था कि, नोटबंदी करते हुए सरकार की ओर से इसके जो भी लक्ष्य घोषित किए गए थे, उनमें से कोई लक्ष्य हासिल भी हुए या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने सार-रूप में इस निर्णय की कानूनी प्रक्रियागत वैधता पर ही विचार ही किया था— क्या इस मामले में जो प्रक्रिया अपनाई गई, वह संबंधित निर्णय को अवैध बनाती है या नहीं? बहुमत का निर्णय है—नहीं।

वास्तव में इस कानूनी प्रक्रियागत निर्णय का नुक्ता इससे भी सीमित है। उसका प्रश्न तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया कानून की धारा-26 (2) के अंतर्गत, नोटबंदी के निर्णय वैधता तक सीमित है। याद रहे कि न्यायमूर्ति नागरत्ना के असहमति के फैसले से यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि अदालत के विचार का विषय यह भी नहीं था कि निर्वाचित सरकार को, नोटबंदी करने यानी खास श्रेणी के नोटों का चलन रोकने का अधिकार है या नहीं है। उल्टे असहमति के अपने निर्णय में उन्होंने स्पष्ट रूप से सुझाया है कि अगर सरकार ने नोटबंदी का फैसला करने का मन बना ही लिया था, तो उसे यह काम संसद के कानून के जरिए करना चाहिए था, जो कि इससे पहले हुए नोटबंदी के दो प्रकरणों में किया भी गया था। यहां तक कि उन्होंने यह भी सुझाया है कि अगर संबंधित निर्णय के लिए गोपनीयता अपरिहार्य थी और संसद के कानून बनवाने की प्रक्रिया का सहारा लेने की सूरत में गोपनीयता की रक्षा नहीं की जा सकती थी, तो सरकार इसके लिए अध्यादेश का भी सहारा ले सकती थी।

असहमति के फैसले में, बहुमत के फैसले के विपरीत, नोटबंदी के निर्णय को ठीक इसीलिए ‘अवैध’ करार दिया गया है कि कार्यपालिका ने उक्त फैसले के जरिए, संसद को धता बताकर, अपनी मनमर्जी को सीधे देश पर थोप दिया था! और आरबीआई कानून की धारा-26 (2) के अंतर्गत, जो सरकार को रिजर्व बैंक (बोर्ड) के परामर्श से ऐसा कोई निर्णय लेने का अधिकार देती है, मोदी सरकार के इस निर्णय को इसलिए वैध नहीं माना जा सकता है कि वास्तव में नोटबंदी के निर्णय के मामले में जो हुआ था, उसे ‘रिजर्व बैंक के परामर्श से निर्णय’ नहींं माना जा सकता है।

असहमति के निर्णय में इस सिलसिले में तीन निर्विवाद तथ्यों को रेखांकित किया गया है। पहला, नोटबंदी, रिजर्व बैंक के सुझाव पर नहीं, मोदी सरकार के फैसले से की गई थी। दूसरे, सरकार की मांग पर, 24 घंटे के अंदर-अंदर रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के निर्णय पर, अपने अनुमोदन की मोहर लगा दी थी। तीसरे, रिजर्व बैंक ने स्वतंत्र रूप से इस मामले में अपने विवेक का व्यवहार ही नहीं किया था!

संक्षेप में यह कि चूंकि नोटबंदी का फैसला सरकार का ही फैसला था, न कि रिजर्व बैंक का अपना फैसला, इसलिए उसकी वैधता के लिए संसदीय अनुमोदन का रास्ता अपनाया जाना जरूरी था। इससे बचने के लिए, सरकार ने रिजर्व बैंक कानून की धारा 26 (2) की आड़ लेने की कोशिश की थी, जो नोटबंदी के फैसले को अवैध बना देता है। अल्पमत का निर्णय, याचिकाकर्ताओं की इस अपील से सहमति जताता है कि रिजर्व बैंक के परामर्श से निर्णय की उक्त व्यवस्था का सहारा वैध रूप से तभी लिया जा सकता था, जब रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड ने स्वतंत्र रूप से नोटबंदी की सिफारिश की होती, न कि सरकार की मांग या सलाह पर उससे ताबड़तोड़, अपने विवेक का उपयोग किए बिना ही, हामी भरवा ली गई होती, जैसा कि साफ तौर पर इस मामले में हुआ था।

बहरहाल, बैंच के बहुमत की राय में सरकार के निर्णय के लिए, रिजर्व बैंक कानून की उक्त धारा का बचाव हासिल होने के लिए, इतना ही काफी था कि सरकार ने रिजर्व बैंक से राय ली थी। बहुमत के तर्क के अनुसार, रिजर्व बैंक कानून की उक्त धारा की शर्त पूरी करने के लिए यह जरूरी नहीं है कि निर्णय उसकी ओर से ही आए, बल्कि निर्णय सरकार की ओर से भी आ सकता है। इसके अलावा, बहुमत के फैसले में इसका भी उल्लेख किया गया है कि इस प्रश्न पर रिजर्व बैंक और सरकार के बीच, छ: महीने से चर्चा चल रही थी!

बेशक, इस पर तो बहस हो सकती है कि इस तरह के निर्णय के लिए हमारे देश के कानून में, सरकार के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक के परामर्श से निर्णय लेने की जो शर्त लगाई गई है, उसकी संबंधित बैंच के बहुमत की व्याख्या में, बैंच के अल्पमत की इस व्याख्या की तुलना में वाकई ज्यादा कानूनी वजन है या नहीं कि ऐसा सुझाव, रिजर्व बैंक के बोर्ड की ओर से ही आना चाहिए था। सरकार के सुझाव पर रिजर्व बैंक का हामी भरना, इस शर्त को पूरा करने के लिए काफी नहीं है, जो कि संक्षेप में जस्टिस नागरत्ना की दलील है। बहरहाल, इससे शायद ही कोई विवेकवान व्यक्ति असहमत होगा कि संबंधित प्रावधान की उक्त व्याख्या, बहुत ही संकुचित है। वास्तव में रिजर्व बैंक कानून की उक्त व्याख्या इतनी संकुचित है कि यह संबंधित व्यवस्था को एक निरर्थक, कानूनी खाना-पूर्ति ही बनाकर रख देती है।

यह समझना कोई मुश्किल नहीं है कि जनतांत्रिक शासन व्यवस्था में इस तरह के किसी भी परामर्श की अनिवार्यता का एक ही अर्थ है— निर्वाचित कार्यपालिका के मनमाने निर्णयों के खिलाफ संबंधित क्षेत्र में बचाव मुहैया कराना। वास्तव में संविधान पीठ के बहुमत के निर्णय में भी कार्यपालिका के मनमाने निर्णयों से इस तरह के बचाव या सेफगार्ड्स की जरूरत माना गया है तथा उसका उल्लेख भी किया गया है।

लेकिन, बहुमत का निर्णय वास्तव में उक्त प्रावधान के बचाव की ठीक ऐसी व्यवस्था के रूप में काम करने की ही जड़ें काटता है। कहने की जरूरत नहीं है कि चुनी हुई सरकार, जिसके हाथ में रिजर्व बैंक बोर्ड में नियुक्ति तथा उससे हटाया जाना, दोनों ही होते हैं, जब अपनी ओर से तय कर के, रिजर्व बैंक जैसी किसी संस्था से, तुरंत अनुमोदन करने का तकाजा करती है, तो तय है कि उसे अपने निर्णय पर हामी ही सुनने को मिलेगी, न कि संबंधित संस्था की विशेषज्ञतापूर्ण स्वतंत्र राय! वास्तव में, ऐसी स्थिति से बचने के लिए ही कानून में उक्त व्यवस्था रखी गई है, वरना ऐसे कानून की और रिजर्व बैंक के बोर्ड की भी जरूरत ही क्या है? निर्वाचित सरकार कुछ भी तय कर सकती है!

विशेषज्ञतापूर्ण स्वतंत्र राय के अंकुश से पूरी तरह से बरी होकर कार्यपालिका, निर्वाचित होते हुए भी निरंकुश हो सकती है। यही इस समय देश में हो रहा है। नोटबंदी को कानूनी ठहराने का सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला, इसी प्रवृत्ति को बल देगा।

लेकिन, क्या यह इस प्रकार के कानूनी अनुमोदन के सामाजिक रूप से बहुत कम उपयोगी होने, बल्कि अनुपयोगी ही होने का ही सबूत नहीं है कि कानूनी वैधता का यह फैसला, इसकी ओर से पूरी तरह से आंखें बंद कर के लेना पड़ रहा है कि सरकार के नोटबंदी के फैसले से, करोड़ों आम नागरिेकों को कैसी मुसीबतें झेलनी पड़ी थीं और इसके बावजूद, यह फैसला अपने सभी घोषित लक्ष्यों को हासिल करने में पूरी तरह से विफल ही रहा है।

बेशक, यह कहा जा सकता है कि जनतांत्रिक व्यवस्था में, अंतत: जनता ही सरकार के गलत-सही निर्णयों पर अपना फैसला सुनाती है। लेकिन, जनतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचित कार्यपालिका के अलावा, दूसरी अनेकानेक संवैधानिक व कानूनी स्वतंत्र संस्थाओं, निकायों का ताना-बाना इसीलिए निर्मित किया जाता है कि अपने-अपने क्षेत्र मेें अपनी स्वतंत्र या स्वायत्त सत्ताओं के व्यवहार के जरिए, यह ताना-बाना पूरी व्यवस्था को, कार्यपालिका की मनमानी की ही व्यवस्था बनने से बचाए।

विभिन्न संस्थाओं की यही स्वतंत्रता है, जो कार्यपालिका को नोटबंदी जैसे आत्मघाती कदमों के रास्ते पर बढ़ने से रोक सकती है, जिसे भारत की ऊंची वृद्घि दर को बैठा ही देने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार माना जाता है और जिससे एक अनुमान के अनुसार जीडीपी का करीब 15 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। दसियों करोड़ लोगों को नोट बदलवाने के लिए घंटों लंबी-लंबी लाइनों में लगना पड़ा था और अनेक लाइनों में लगे हुए मौत का ग्रास बनने वालों समेत, खबरों के अनुसार कम से कम 85 लोगों की इस नोटबंदी की ही वजह से जान गई थी। और इतनी भारी कीमत चुकाने के बाद भी देश को इस नोटबंदी से क्या मिला—हर लिहाज से बड़ा सा शून्य! और तो और, अर्थव्यवस्था में चलन में नकदी भी नोटबंदी के बाद से घटनेे के बजाय पूरे 71.84 फीसद बढ़ गई है और नोटबंदी से पहले के 17.7 लाख करोड़ रुपए के स्तर से बढ़कर, अब 30.38 लाख करोड़ रुपए तक पहुंंच चुकी है!

दुर्भाग्य से शीर्ष न्यायपालिका, कानून की संकीर्ण तकनीकी व्याख्याओं की आड़ में, कार्यपालिका की ऐसी सत्यानाशी मनमानी पर अंकुश लगाने की अपनी वैध भूमिका से ज्यादा से ज्यादा हाथ खड़े कर रही है। और यह तब है, जबकि मौजूदा शासन ने इसमें किसी शक की गुंजाइश नहीं छोड़ी है कि उसकी मंशा, अब शीर्ष न्यायपालिका की भी स्वतंत्रता छीनकर, संविधान के अंतर्गत उसे दी गई संवैधानिक समीक्षा की जिम्मेदारी को ही बेमानी बनाने की है।

•राजेंद्र शर्मा
[ लेखक ‘ लोकलहर ‘ के संपादक हैं ]

🟥🟥🟥

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

महतारी वंदन योजना से मातृशक्ति को मिला आर्थिक संबल : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
breaking Chhattisgarh

महतारी वंदन योजना से मातृशक्ति को मिला आर्थिक संबल : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

महापुरुषों के जीवन और विचारों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ेगी नई पीढ़ी : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
breaking Chhattisgarh

महापुरुषों के जीवन और विचारों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ेगी नई पीढ़ी : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

अवैध अफीम खेती मामले में अब बड़ा एक्शन, भाजपा नेता के फसल पर चला बुलडोजर
breaking Chhattisgarh

अवैध अफीम खेती मामले में अब बड़ा एक्शन, भाजपा नेता के फसल पर चला बुलडोजर

भारत ने समंदर के भीतर पनुडुब्बियों का अभेद्य किला बना रखा हैं, पाकिस्तान और चीन छू भी नहीं पाएंगे
breaking international

भारत ने समंदर के भीतर पनुडुब्बियों का अभेद्य किला बना रखा हैं, पाकिस्तान और चीन छू भी नहीं पाएंगे

25 मार्च से 06 अप्रैल तक होगा ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़-2026’ का होगा आयोजन
breaking Chhattisgarh

25 मार्च से 06 अप्रैल तक होगा ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़-2026’ का होगा आयोजन

छत्तीसगढ़ की वैभवी अग्रवाल ने UPSC 2025 में हासिल किया AIR 35, मुख्यमंत्री साय और व्यापार प्रकोष्ठ के सह-संयोजक नितिन अग्रवाल ने दी बधाई
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ की वैभवी अग्रवाल ने UPSC 2025 में हासिल किया AIR 35, मुख्यमंत्री साय और व्यापार प्रकोष्ठ के सह-संयोजक नितिन अग्रवाल ने दी बधाई

धान की बोरियों में पानी डालने का खेल उजागर,समिति के 4 कर्मचारी बर्खास्त
breaking Chhattisgarh

धान की बोरियों में पानी डालने का खेल उजागर,समिति के 4 कर्मचारी बर्खास्त

सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं, लापरवाही पर ठेकेदार होंगे ब्लैकलिस्ट, सीएम विष्णु देव साय की सीधी चेतावनी
breaking Chhattisgarh

सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं, लापरवाही पर ठेकेदार होंगे ब्लैकलिस्ट, सीएम विष्णु देव साय की सीधी चेतावनी

सुनहरा मौका: आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर भर्ती शुरू, जानिए सबकुछ
breaking Chhattisgarh

सुनहरा मौका: आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर भर्ती शुरू, जानिए सबकुछ

सावधान! शहर की सड़कों पर पुलिस बनकर घूम रहे लुटेरे, ट्रेलर रोककर लूटने वाले दो आरोपी गिरफ्तार
breaking Chhattisgarh

सावधान! शहर की सड़कों पर पुलिस बनकर घूम रहे लुटेरे, ट्रेलर रोककर लूटने वाले दो आरोपी गिरफ्तार

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने बैगा-बिरहोर आदिवासियों की संस्कृति को सहेजने की दी सीख
breaking Chhattisgarh

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने बैगा-बिरहोर आदिवासियों की संस्कृति को सहेजने की दी सीख

राज्यसभा के कांग्रेस प्रत्याशी फूलो देवी नेताम ने भरा नामांकन, कई बड़े नेता रहे मौजूद
breaking Chhattisgarh

राज्यसभा के कांग्रेस प्रत्याशी फूलो देवी नेताम ने भरा नामांकन, कई बड़े नेता रहे मौजूद

राज्यसभा के लिए लक्ष्मी वर्मा ने भरा नामांकन; CM साय बोले- यह प्रदेश की नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक
breaking Chhattisgarh

राज्यसभा के लिए लक्ष्मी वर्मा ने भरा नामांकन; CM साय बोले- यह प्रदेश की नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक

राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने संभाला पदभार, सीएम साय ने दी शुभकामनाएँ
breaking Chhattisgarh

राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने संभाला पदभार, सीएम साय ने दी शुभकामनाएँ

होली खुशियों और जुड़ाव का अवसर, किसानों की समृद्धि से बढ़ा उत्साह – मुख्यमंत्री श्री साय
breaking Chhattisgarh

होली खुशियों और जुड़ाव का अवसर, किसानों की समृद्धि से बढ़ा उत्साह – मुख्यमंत्री श्री साय

कलयुगी बेटे ने धारदार हथियार से की पिता की हत्या, खून के रिश्ते का खौफनाक अंत
breaking Chhattisgarh

कलयुगी बेटे ने धारदार हथियार से की पिता की हत्या, खून के रिश्ते का खौफनाक अंत

ईरान संकट बीच कच्चा तेल की कीमते 100 डॉलर के पार जा सकती हैं! कितना महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
breaking international

ईरान संकट बीच कच्चा तेल की कीमते 100 डॉलर के पार जा सकती हैं! कितना महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

जाना था कुवैत, पहुंच गए पाकिस्तान… एयर अरेबिया की फ्लाइट में 8 भारतीय फंसे, केरल के 3 यात्री शामिल
breaking international

जाना था कुवैत, पहुंच गए पाकिस्तान… एयर अरेबिया की फ्लाइट में 8 भारतीय फंसे, केरल के 3 यात्री शामिल

धान की अंतर राशि पर सियासत : कांग्रेस ने भेदभाव का लगाया आरोप, लाभार्थियों की मांगी सूची, मंत्री टंकराम ने कहा – ‘सबका साथ सबका विकास’ के सिद्धांत पर काम कर रही सरकार
breaking Chhattisgarh

धान की अंतर राशि पर सियासत : कांग्रेस ने भेदभाव का लगाया आरोप, लाभार्थियों की मांगी सूची, मंत्री टंकराम ने कहा – ‘सबका साथ सबका विकास’ के सिद्धांत पर काम कर रही सरकार

हॉस्टल में 10वीं के छात्र ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, मचा हड़कंप
breaking Chhattisgarh

हॉस्टल में 10वीं के छात्र ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, मचा हड़कंप

कविता

रचना और रचनाकार- पल्लव चटर्जी
poetry

रचना और रचनाकार- पल्लव चटर्जी

होली विशेष [दो फागुनी रचना यें] – तारकनाथ चौधुरी
poetry

होली विशेष [दो फागुनी रचना यें] – तारकनाथ चौधुरी

इस माह के कवि और कविता – महेश राठौर ‘मलय’
poetry

इस माह के कवि और कविता – महेश राठौर ‘मलय’

रंग पर्व पर विशेष- डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’
poetry

रंग पर्व पर विशेष- डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’

रंग पर्व होली पर विशेष- नुरूस्सबाह ‘सबा’
poetry

रंग पर्व होली पर विशेष- नुरूस्सबाह ‘सबा’

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – विद्या गुप्ता
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – विद्या गुप्ता

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – मिताली श्रीवास्तव वर्मा
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – मिताली श्रीवास्तव वर्मा

संस्मरण : ‘धरा का श्रृंगार उल्टा पानी’ – दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

संस्मरण : ‘धरा का श्रृंगार उल्टा पानी’ – दीप्ति श्रीवास्तव

स्तम्भ : कविता आसपास ‘ आरंभ’ – अमृता मिश्रा
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘ आरंभ’ – अमृता मिश्रा

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – पं. अंजू पाण्डेय ‘अश्रु’
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – पं. अंजू पाण्डेय ‘अश्रु’

अब मैं क्या करूँ… क्योंकि वह किसी की – कैलाश जैन बरमेचा
poetry

अब मैं क्या करूँ… क्योंकि वह किसी की – कैलाश जैन बरमेचा

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – प्रकाशचंद्र मण्डल
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – प्रकाशचंद्र मण्डल

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – तारकनाथ चौधुरी
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – तारकनाथ चौधुरी

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – सुष्मा बग्गा
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – सुष्मा बग्गा

यात्रा संस्मरण : विद्या गुप्ता
poetry

यात्रा संस्मरण : विद्या गुप्ता

कविता आसपास : बसंत पंचमी पर महाकवि ‘निराला’ को याद करते हुए… महाकवि की वेदना…!! – विद्या गुप्ता [छत्तीसगढ़-दुर्ग]
poetry

कविता आसपास : बसंत पंचमी पर महाकवि ‘निराला’ को याद करते हुए… महाकवि की वेदना…!! – विद्या गुप्ता [छत्तीसगढ़-दुर्ग]

मकर संक्रांति पर विशेष : अमृता मिश्रा
poetry

मकर संक्रांति पर विशेष : अमृता मिश्रा

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी
poetry

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी

नव वर्ष पर विशेष ग़ज़ल : नूरुस्सबाह खान ‘सबा’
poetry

नव वर्ष पर विशेष ग़ज़ल : नूरुस्सबाह खान ‘सबा’

नव वर्ष पर विशेष ग़ज़ल : सुशील यादव
poetry

नव वर्ष पर विशेष ग़ज़ल : सुशील यादव

कहानी

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
story

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
story

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
story

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
story

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
story

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
story

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
story

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
story

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
story

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

story

रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

story

रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

story

कहानी : संतोष झांझी

story

कहानी : ‘ पानी के लिए ‘ – उर्मिला शुक्ल

story

व्यंग्य : ‘ घूमता ब्रम्हांड ‘ – श्रीमती दीप्ति श्रीवास्तव [भिलाई छत्तीसगढ़]

दुर्गाप्रसाद पारकर की कविता संग्रह ‘ सिधवा झन समझव ‘ : समीक्षा – डॉ. सत्यभामा आडिल
story

दुर्गाप्रसाद पारकर की कविता संग्रह ‘ सिधवा झन समझव ‘ : समीक्षा – डॉ. सत्यभामा आडिल

story

लघुकथा : रौनक जमाल [दुर्ग छत्तीसगढ़]

लेख

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
Article

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

Article

तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

Article

लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
Article

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
Article

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
Article

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
Article

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
Article

🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
Article

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
Article

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
Article

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

Article

🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

Article

🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

Article

🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

⏩ 12 अगस्त-  भोजली पर्व पर विशेष
Article

⏩ 12 अगस्त- भोजली पर्व पर विशेष

Article

■पर्यावरण दिवस पर चिंतन : संजय मिश्रा [ शिवनाथ बचाओ आंदोलन के संयोजक एवं जनसुनवाई फाउंडेशन के छत्तीसगढ़ प्रमुख ]

Article

■पर्यावरण दिवस पर विशेष लघुकथा : महेश राजा.

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

Politics

भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

breaking Politics

भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

Politics

स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

Politics

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

breaking Politics

राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
Politics

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
Politics

मरवाही उपचुनाव

Politics

प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

Politics

ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

breaking Politics

अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
breaking National Politics

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

breaking Politics

हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

breaking Politics

पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन