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संगोष्ठी : ‘ मैं भारत हूँ फाउंडेशन ‘ की हिंदी संगोष्ठी : हिंदी ओढ़कर बैठी है उर्दू का भी दोशाला…

रायपुर [छत्तीसगढ़ आसपास] : मैं भारत हूँ फाउंडेशन के द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर विगत दिनों वृंदावन हॉल रायपुर में राजभाषा हिंदी का बढ़ता वैश्विक स्तर विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई.
संयोजक कैलाश रारा ने बतलाया कि आज विश्व में सर्वाधिक 1 अरब 35 करोड़ लोग हिंदी बोलते हैं। हिंदी की इस लोकप्रियता के पीछे मुख्य कारण इसकी जन स्वीकृति है। मुख्य वक्ता गिरीश पंकज ने कहा कि आज तमिलनाडु एवं कर्नाटक जैसे प्रदेश के पाठ्यक्रम में मुझ हिंदी भाषी प्रदेश के साहित्यकार की रचनाएं पढ़ाये जाना इस देश में हिंदी के विस्तार का एक जीता जागता प्रमाण है।
साहित्यकार गिरीश पंकज के इस मुक्तक –
“जिसे खुसरो ने दुलराया, कबीरा ने जिसे पाला।
जो तुलसी के यहाँ विकसी, जिसे रसखान ने ढाला।
मोहम्मद जायसी की और रहिमन की धरोहर है।
ये हिंदी ओढ़ कर बैठी है, उर्दू का भी दोशाला।” को खूब सराहा गया।
कवयित्री उर्मिला उर्मि ने विश्व हिंदी सम्मेलन में लोगों की भारतीय भाषा हिंदी के प्रति उत्सुकता एवं लगाव के संस्मरणो को सदन के साथ साझा किया। सामाजिक कार्यकर्ता उषा गंगवाल ने हिंदी दिवस के प्रसंग पर हिंदी में हस्ताक्षर करने के संकल्प पर जोर दिया। कवि राजेश जैन ‘राही’ की कविता ‘शब्द देना शारदे मां’ की प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरी। अंतराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के महामंत्री राजकुमार राठी ने हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए जन आंदोलन की आवश्यकता पर बल दिया। पाटनी फाउंडेशन के सुरेंद्र पाटनी ने हिंदी की राह में आने वाली हर रुकावट को दूर करने का संकल्प व्यक्त किया। एयरपोर्ट अथॉरिटी के डायरेक्टर प्रवीण जैन ने कहा कि हम अधिकांश काम हिंदी भाषा में करते हैं तथा हमें गर्व है कि हमारे एयरपोर्ट का नाम भी हिंदी के पुरोधा स्वामी विवेकानंद के नाम पर है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता दिलीप अग्रवाल और संचालन लक्ष्मी नारायण लाहोटी ने किया.
मंचस्थ लोगों को हिंदी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया.

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