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- साहित्य : डॉ. महेशचंद्र शर्मा की पुस्तक ‘ गागर में सागर ‘ एवं ‘ साहित्य और समाज ‘ पाठकों को प्रेरणा देती है… सरयूकांत झा संस्थान ने कृतियों की सराहना की…
साहित्य : डॉ. महेशचंद्र शर्मा की पुस्तक ‘ गागर में सागर ‘ एवं ‘ साहित्य और समाज ‘ पाठकों को प्रेरणा देती है… सरयूकांत झा संस्थान ने कृतियों की सराहना की…

भिलाई [छत्तीसगढ़ आसपास] : साहित्य मनीषी आचार्य डॉ.महेश चन्द्र शर्मा की पुस्तकों ‘गागर में सागर’ तथा ‘साहित्य और समाज’ पर एक समीक्षा गोष्ठी आचार्य सरयू कान्त झा स्मृति संस्थान रायपुर में हुई। इस दौरान संस्थान के सचिव शारदेन्दु झा ने कहा कि डॉ. शर्मा की कृति ‘गागर में सागर’ गूढ़ रहस्यों को सरल भाषा में समझा देती है। कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक अर्थ व्यक्त करना इसकी विशेषता है।
साहित्य विमर्श एवं परिसंवाद प्रसंग में आचार्य डा.शर्मा के रायपुर प्रवास पर उक्त पुस्तक पर शारदेन्दु ने अपने विचारों को रखा। वहीं संस्थान की वरिष्ठ लेखिका अनिता झा ‘आद्या’ ने डा.शर्मा की पुस्तक ‘ साहित्य और समाज ‘ पर अपने विचार रखे।
उन्होंने बताया कि वे शुरू से पढ़ती आ रही हैं कि साहित्य समाज का दर्पण है। जब उन्होंने इस पुस्तक को पढ़ा तो पूर्व कथन पुनः सही सिद्ध हुआ।
आचार्य डॉ.महेश शर्मा की पुस्तक ‘साहित्य और समाज’ से यह भी ज्ञात होता कि समाज और साहित्य परस्पर पूरक हैं। ‘जहाँ न पहुँचे रवि,वहाँ पहुँचे कवि’ साहित्य की शक्ति भी ये पुस्तक हमें बताती है।
संस्थान की ओर से आचार्य डा. शर्मा को माँ नर्मदा नदी पर अमृतलाल वेगड़ की प्रसिद्ध पुस्तकों के छत्तीसगढ़ी अनुवाद ‘सुन्दरता के नदी नरबदा’ एवं ‘अमृत के नरबदा’ की प्रति सादर भेंट की गयीं। इनकी रचना कीर्तिशेष आचार्य सरयूकान्त झा ने की।श्रीमती अनीता झा ‘आद्या’ की पुस्तकें ‘लाल चौरा’ एवं ‘नादानियाँ’ भी साहित्य मनीषी डॉ. महेश चन्द्र शर्मा को ससम्मान भेंट की गयीं।
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