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कविता आसपास : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरी, आंध्रप्रदेश]
▪️ खूबसूरत औरतें
किताबें
इतना भी झूठ बोलती हैं
बहुत बाद में
मुझे मालूम हुआ
पढ़ा था
उम्र के साथ
खूबसूरती ढल जाती है.
झूठ, सरासर झूठ लिखा था
उन काले- काले अक्षरों में।
अनुभव से जाना कि
ढलता है तो बस यौवन
खूबसूरती तो
निखर- निखर दमकती है
दिपदिपाती है सर्वत्र।
कभी देखा है
बड़ी उम्र की औरतें
कितनी खूबसूरत होती है
माँ , दादी, नानी-सी होती है
मित्र- सी
ये औरतें
खूबसूरत परी-सी
रिश्तों के छतनार
बरगद- सी होती हैं।
सर्दी में गरम
गर्मी में शीतल और
बारिश में
छतनार होती हैं ये औरतें।
लीटर, किलो और गज़
जब जहां जिसकी ज़रूरत हो
नपे-तुले व्यवहार में
कितनी खूबसूरत होती हैं
ये औरतें।
स्नेह, प्रेम, दया, करुणा
विष- अमृत को
सहजता,सरलता और पूरी सौम्यता से सहेजे
चमकती पवित्र आंखों से
निहायत सुन्दर होती हैं
ये औरतें।
पेशानी पर सिलवटें
चेहरे पर अनुभव की
आड़ी- तिरछी रेखाओं वाली
ये बड़ी उम्र की औरतें
जीवन के ढलान पर
ठिठकी-सी
अनिन्द्य सुन्दरी होती हैं
ये निर्दोष औरतें।
•कवि संपर्क –
•98265 61895
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chhattisgarhaaspaas
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