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- विशेष : लता मंगेशकर की प्रथम पुण्यतिथि 6 फरवरी पर : तुम ना जाने किस जहाँ में खो गये – जयदेब गुप्ता मनोज
विशेष : लता मंगेशकर की प्रथम पुण्यतिथि 6 फरवरी पर : तुम ना जाने किस जहाँ में खो गये – जयदेब गुप्ता मनोज
देखते देखते एक वर्ष बीत गया कोकिला कंठी भारत रत्न सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित लता मंगेशकर हमसे बिछड़े हुए अभी भी मन नहीं मान रहा है कि लता जी हमारे बीच मौजूद नहीं है लता जी की लोकप्रियता को देखते हुए सन 1962 फिल्म बीस साल बाद की एक गाने की रिकॉर्डिंग के पहले लताजी को धीमी जहर( स्लो प्वाइजन )देकर मारने की कोशिश की गई थी फिल्म बीस साल बाद के संगीतकार थे हेमंत कुमार रिकॉर्ड करने के लिए तैयारथे लेकिन अचानक लता जी की तबीयत बिगड़ गई उस समय लताजी कुछ खाना खा नहीं पा रही थी हिंदी फिल्मों के महानायक अमिताभ बच्चन ने एक बार लता जी के बारे में कहां था दूसरे देशों के मेरे दोस्त मुझसे कहते हैं क्या मेरे देश में वह सब कुछ है सिर्फ ताजमहल और लता मंगेशकर को छोड़कर ।तभी तो महान अभिनेता दिलीप कुमार लता जी के बारे में कहा था जिस तरफ फूल की खुशबू का कोई रंग नहीं होता जिस तरह पानीके झड़ने या ठंडी हवाओं के कोई घर नहीं होता जिस तरह उभरते हुए सूरज की किरणों का या किसी मासूम बच्चों की मुस्कुराहट का कोई मजहब या भेदभाव नहीं होता वैसे ही लता जी की आवाज कुदरत की तकलीफ का एक करिश्मा है सच कहिए तो लता मंगेशकर किसि तारिफ की नहीं बल्कि परतोश के काबिल है उनकी आवाज सुनने के बाद कुछ ऐसा आलम हो जाता है जिसे वया करना मुश्किल है यू समझिए जैसे कोई दरगाह या मंदिर मे जाए तो वहां पहुंच कर इबादत के लिए खुद ब खुद सर झुक जाता है और आँखो से बेशक आंसू बहने लगते है।लता जी के अनगिनत चाहनेवाले को शायद यह मालूम नहीं होगा कि लता जी की शुरुआती दोड मे प्रथम भारतीय संगीतकार जोड़ी हुस्न लाल भगतराम ने लता से गवाकर बहुत अच्छे _अच्छे गीतो को
जन्म दिया ।1948 के लगभग कई ऐसे मधुर गीत है जो आज भी करोड़ों दिलों की धड़कन बने हूए हैँ फिल्म _प्यार की मंजिल मे कई मधुर गीत गाकर फिल्म को अमर बना दिया था।फिल्म बडी बहन मे उस समय की नई गायिका प्रेम लता के साथ अमर गीत _छुप छुप खडी हो जरूर कोई बात है,,गाकर अमर बना दिया।
यह सुरिला गीत आज भी घर घर मे सुना जाता है।फिल्म आसू जल तरंग बिरहा की रात मे रफी साहब के साथ युगल गीत जब भी मौका मिले अपने एलवम से निकाल कर सुन लीजिएगा मन प्रसन्न हो जाएगा। अमर गायक व संगीतकार चितलकर _रामचंद्र उर्फ अन्ना साहब को कोन भूल सकता ।अन्ना साहब अच्छे गायक के साथ साथ बहुत लोकप्रिय संगीतकार भी थे उनके संगीत निर्देशन मे लता जी ने बहुत सारे युगल गीत गाये है आईए सुनते है
फिल्म__आजाद मे _कितना हसीन है ये मौसम,,,,
,,शहनाई,पतंगा,ओर अलवेला फिल्मोके गीत आज भी सुने जाते है
दर्जनो गाने है कभी सुनकर देखिएगा बहुत मजा आएगा।
संगीतकार लछ्मी कांत प्यारेलाल के साथ पहलीबार फिल्म पारसमनी मे आशा भोसले के साथ युगल गीत _हंसता हुआ,,,, जरूर सुनिएगा बादमे इस सगींतकार के साथ सैकडो गीत लता ने गाये।संगीत निर्देशक शंकर जय किशन जी के साथ पहली फिल्म ,बरसात के गीत जिसे लता के स्वर पाकर अमर गीत बन गया।आज वर्षो बीत जाने के बादजूद लता के गाए _हवा मे ऊडता जाये मेरा लाल दुपट्टा ,,,,,,,,ओर बरसात मे हमसे मिलो तुम ,,,,घर घर मे सुने जाते है।लता जी के गीतोका चर्चा हो ओर गजल संम्राट संगीत निर्देशक मदन मोहन जी का चर्चा ना किया जाये तो बिल्कुल गलत होगा।मदन मोहन अपने फिल्मी कैरिसर मे सबसे ज्यादा गाने लता जी से गवाये है जिसमे फिल्म अनपढ के गाने_आपकी नजरो ने समझा प्यार के काबिल मुझे,_फिल्म अदालत, के गानेजाना था हमको दूर___
वो कोन थी के गानेजो हमने दांस्ता अपनी सुनाई,__
फिल्ममेरा साया मे नैनो मे बदरा छाये_संगीत निर्देशक नौशाद साहब के साथ के साथ कई मधुर गीत है विशेष कर फिल्म मुगलेआजम मे_प्यार किया तो डरना किया,,_एक अमर गीत है।संगीत निर्देशक सलील चौधरी के साथ लता जी के बंगला और हिन्दी मे सैकडो गाने है जिसमे फिल्ममधुमती के गानेआजा रे परदेशी_और _जुल्मी संग ऑख लडी रे ,,अमर गीत है।हेमन्त कुमार के साथ भी कई मधुर बंगला ओर हिन्दी गाने है विशेष कर फिल्मनागिन के गाने_मन डोले तन डोले,,,,,,संगीतकार कल्याणजी आनन्द जी,जयदेब, एस,एन, त्रिपाठी,रवि, गुलाम मोहम्मत,राहूल देव वर्मन रविंद्र जैन,रौशनओर बप्पी लाहेरी जैसे मंगीतकारो के साथ सैकडो गाने है।
शास्त्रीय रागो पर भी लता जी की अच्छी पकड थी
फिल्म रेशमा ओर शेरा मे_(रागमोड)तु चन्दा मै चांदनी,,,फिल्म_हीर रांझा मे (राग भैरवी) डोली चढती ही हीर ने,,,,,
फिल्म _बीस साल बाद मे राग (आभोगी कान्हरा) जिया नाही लगे
फिल्म_अनपढ मे (राग भैरवी) है इसी मे प्यार की आबरू,,,,,,फिल्म अलवेला मे (राग पीलू) धीरे सेआजा री अखियन आदि।लता जी का तारीफ करना सुरज के सामने मोमबत्ती जलाना है जैसे।
एक कहावत है दुनिया मे एक चॉद,एक सुरज एक ताजमहल ओर एक लता मंगेशकर है जो बिल्कुल सच है किन्तु बाकी सभी को तो हम देख पाते लेकिन लता जी के गाने सुनकर हम महसूस करते लता जी हमारे बीच मौजूद है ओर जिन्दगी भर रहेंगे।
भोजपुरी गाने मे भी लताजी की अच्छी पकड थी।निर्माता_विश्वनाथ शाहाबादी की
वहूचर्चित फिल्मगंगा मईया तोहे पिहरी चढईवो के अमर गीतो को कोन भूल सकता है_जिसमे ओ गंगा मईया तोहे पिहरी चढईवो,,,,,काफी लोकप्रिय गीत है।
लता जी पसंद
लता जी के,एल,सहगल ओर किशोर कुमार के गाने काफी पसंद करती थी साथ साथ फोटोग्राफी करना विशेष शोक था।ओर क्रिकेट मैच देखना कभी नही भूलती थी। लता जी गाने केअलावा फिल्म मेे अभिनय ओर फिल्मोमे संगीतकार हैसियत से संगीत भी दे चुकी है।ओर फिल्मो का निर्माण किया। लेकिन लता ने फिल्मो मे संगीत निर्देशन का काम लता नामसे ना करके आंन्दधन छद्म नामसे किया था। जिसमे १९५० मे राम राम पहूने(मराठी) १९६२मे मोहित्याची मंजुला (मराठी) १९६४ मे मराठ ठिठुका मेलवावा(मराठी) १९६५ मे सादी मान से(मराठी) ओर १९६९ मे तावाडी माटी(मराठी)
लता द्वारा अभिनीत फिल्मे १९४२ पहली मंगला मोर (मराठी)
कवि प्रदीप द्वारा लिखिद गीत ओर चितलकर रामचंद्र द्वारा संंगीत से सजाया गया गैर फिल्मी गीत एै मेरे वतन के लोगो जरा अॉख मे भरलो पानी___आज वर्षो बीतने के वावजूद इस अमर गीत को हमेशा याद किया जाता है फिल्मी जगत मे संगीत निर्देशक ओ,पी,नैयर साहब एकमात्र एैसे संगीतकार रहे जो अपनी सफल फिल्मी कैरियर मे लता से एक भी गीत नही गवाया फिरभी चोटी के संगीतकार रहे।
लता ने अपने समय के लगभग
सभी गायकोके साथ गाना गाये है लेकिन रफी साहब के साथ लबसे ज्यादा ४४० गाने गाये है।किशोर कुमार के साथ ३२७
मुकेश के साथ १६१, मन्ना डे के साथ १०७, तलत मेहमुद के साथ०६५,हेमंत कुमार के साथ०५२,आशा भोसले के साथ ०७४,उषा मंगेशकर के साथ ०६२
वैसे नए गायकोमे नितीन मुकेश,एप,पी,वालासुबरीयम,शब्बीर कुमार, कुमार शानू शैलेंद्र सिंह ओर उदित नारायण के साथ भी कई गाने गाये है।लता का जन्म २८ सितंवर १९२९ मध्य प्रदेश के इंदोर मे हुआ था।
एक भाई चार बहनो मे सबसे
बडी थी।आज लता की पहली पुण्यतिथि पर नमन करते है ओर फिल्म सजा मे उनके द्वारा गाये गीत __तुम ना जाने किस जहां में खो गये,हम भरी दुनिया में तन्हा हो गये ,,,,गाते हूए उन्हे याद करते है।
•पता : हरिगोपाल मजुमदार रोड, धनबाद [झारखंड]
•संपर्क : 94311 51220
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chhattisgarhaaspaas
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