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जनता की जुबानी – सत्ता का रंग भगवा के संग या पंजे की डोर के साथ – राम के ननिहाल में जय श्री राम कमजोर क्यों ❓

▪️ भूपेश ह मोर सगा हे लेकिन रमन ह विकास करत रहिस हे
•संजय मिश्रा
[ पॉलिटिकल एडिटर ‘ छत्तीसगढ़ आसपास ‘ ]
हम तो वही कहेंगे जो देखेंगे और सुनेंगे!जी हां,इस वक्त छत्तीसगढ़ का मैदान राजनीतिक खेल में दांव पेंच की जुगत में लगा हुआ है.15 सालों तक भगवा रंग के झंडे इस मैदान में जीत के जश्न मनाते थे आज वे झुके झुके से नजर आते हैं क्योंकि झंडे की डोर कांग्रेस के हाथ मे है और पंजा मजबूत है.छत्तीसगढ़ अब 22 साल की नौजवानी की उम्र पार कर चुका है इस वक्त खूबसूरत नौजवान दिल रखता है और कहीं न कहीं दिग्भ्रमित भी है.हालांकि पूर्व की सरकार और वर्तमान की सरकार की तुलना जनता जब करती है तो सुकून वाली और सुनने वाली सरकार तो कुछ दिनों तक भाजपा की रही, लेकिन छत्तीसगढ़ी लोक रीति रिवाज और प्रादेशिक भेदभाव वाली सरकार अब की है.इस पर गाँव के रामगरीब कका बड़े शान से कहते हैं कि ” भुपेश ह मोर सगा हे लेकिन रमन ह विकास करत रहिस हे”. युवान राज्य के मुखिया सख्त और कड़क तो हैं लेकिन युवान के मितान की झलक अब धुंधली होती जा रही है.क्योंकि लगातार बढ़ते अपराध और उनके सहयोगियों की बढ़ती संपत्ति पर पड़ते छापे देश भर मे संदेहास्पद विचारों को जन्म दे रहे हैं जिससे प्रदेश में कोयला घोटाले और गुंडई,अपराध वाला जनाधार बढ़ता दिखने लगा है.ऐसे में भूपेश बघेल की किसानी वाली जमीनी हकीकत पर मजेदार मलाई की परत जमने लग गई है जिससे साख पर बादल मंडराने लगे हैं.हालांकि,भूपेश बघेल की छवि छत्तीसगढ़िया मूल की है और ठेठ गंवई व अंदाज वाला व्यक्तित्व आकर्षक तो है लेकिन,कका की छवि अब शिथिल पड़ गई। गुलबिया बयार से भीगी हलक पर बात दोहरी समझ आने लगी है.ऐसे में यदि भाजपा के लोग सक्रिय हो जाएं तो बात कुछ बन सकती है लेकिन नेतृत्व विहीन भाजपा करे भी तो क्या,क्योंकि उसने भी 15 सालों तक छत्तीसगढ़ को चूना लगाया है और ऐसे ऐसे नेता पैदा कर दिए जो कभी छूट भैये चोर थे उन्हें बड़ा चोर बना दिया गया रमन सरकार में! यह हम नही यह जनता कहती है,स्थानीय जन समुदाय की बात माने तो अभी भी रमन के पोस्टर बैनर व प्रचार तंत्र के सदमे से जनता उभरी नही है.

राम के ननिहाल में जय श्री राम कमजोर क्यों?
मनमानी व अंधाधुंध कांग्रेसियों की बढ़ती संपत्ति पर शनि की वक्री दृष्टि हालांकि पड़ने लगी है जो ईडी व आई टी की रेड की शक्ल में दिखाई भी पड़ रही है.कुछ भी हो लोकप्रियता तो है ही देश भर में अभी भी मोदी की ही.सुशासन की मंगल छाया जब उत्तरप्रदेश जैसे बिगड़े राज्य को सुधार सकता है तो छत्तीसगढ़ तो अभी सुधरने लायक ही है.छत्तीसगढ़ भगवान राम का ननिहाल है माता कौशल्या का मायका है,भले ही राम के ननिहाल में जय श्री राम का नारा कमजोर पड़ गया हो लेकिन मामा का घर तो अपना ही होता है.हमे लगता है कि देश भर में जब जय श्री राम का नारा बुलंद हो रहा है तो निश्चय ही छत्तीसगढ़ जैसे सांस्कृतिक व धार्मिक प्रदेश में इस बार जय श्री राम की गूंज सुनाई देगी.15 सालों तक राम का भगवाकरण और समृद्धशाली छत्तीसगढ़ की छवि सुदृढ़ और विकास की नींव डालने वाले राज्य के क्रम में शुमार था.चाउर वाले बाबा के उपनाम से तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को देश मे प्रसिद्धि मिली लेकिन जब कुनबे में ही खोट हो जावे तब खुद की दुर्दशा होनी तय हो जाती है उसी के शिकार हुए डॉ रमन सिंह.बीरगांव के बुजुर्ग दाम्पत्य रामचरण व नौराजी देवी की बात यदि माने तो अब उन्हें पुराने सरकार की याद आती है,क्योंकि उन्हें राशन मिल जाता था और पेंशन भी लेकिन मौजूदा सरकार में उनका राशन और पेंशन दोनों डकार लिया गया है.हालांकि डॉ रमन सिंह के शासन काल मे मनमानी भी हुई और धांधली भी लेकिन ऊपर बिग बॉस की छत्रछाया थी तो सब गुनाह माफ होता रहा.एक अजीब किंतु सत्य यह भी था कि आरएसएस खुद भी बदलाव चाहती थी क्योंकि लगातार तीन पंचवर्षीय मुख्यमंत्री बनने का खिताब रमन पा चुके थे,आगे बढ़ने पर केंद्र की राजनीतिक धुरी पर मजबूत पाए के रूप में बतौर विकल्प तैयार नही होने देने के फिराक में खुद की पार्टी को धरातल पर लाने का कार्य किया गया.कुल मिलाकर 2018 के चुनावी महासमर में भाजपा के बढ़ते कदम को आराम दिया गया था और अब उस कदम की रफ्तार के लिए राज्य एकजुट होने लगा है.कांग्रेस को भी अपनी रफ्तार पटरी में रहकर ही बढ़ानी चाहिए न कि अति उत्साह में डी-रेल हो जाने की भूल कर बैठना. हालाँकि वर्तमान सत्ताधीश मंझे राजनीतिक गुरु हैं जिन्हें मल्ल भी आता है भावनात्मक रुख की नयन डोर भी.

•संजय मिश्रा
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chhattisgarhaaspaas
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