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कीर्तिशेष : स्वप्नजीविता का साकार स्वरूप : आशुतोष तिवारी
आज 14 अप्रैल है।सन् 1965 में 14 अप्रैल को आशुतोष तिवारी जी का जन्म हुआ और उनके प्रिय हिन्दी साहित्य के महान यायावर साहित्यिक राहुल सांकृत्यायन के असार-संसार से मुक्ति का दिन भी। आशुतोष का राहुल जी प्रति अनन्य अनुराग का कारण दोनों जन का जन्मभूमि आजमगढ़ जिले में होना था। आजमगढ़ से सुदूर सरगुजा जिले में उनके पिता श्री वंशीधर तिवारी नौकरी के सिलसिले आना हुआ साथ में उनकी माता जी श्रीमती बैकुंठा तिवारी भी साथ में आईं। आशुतोष जी का आजमगढ़ से अनुराग माता जी और पिताजी की स्मृतियों पर बातचीत से बचपन से ही हुआ था।साहित्यकार तो आजमगढ़ से हिन्दी-उर्दू के कई हुए हैं, लेकिन राहुल सांकृत्यायन हिन्दी के शुरुआती मार्क्सवादी साहित्यकारों में से थे। आशुतोष किशोर वय से ही कम्युनिस्ट विचारधारा बहुत आकर्षक लगती थी,सो राहुल जी उनको अपने लगते थे। आशुतोष जी का पारिवारिक वातावरण सामन्ती-कर्मकांडी था। इस वातावरण का अतिक्रमण करने का साहस उन्होनें राहुल सांकृत्यायन के वैविध्यपूर्ण जीवन से रुबरू होने के बाद किया था।
आशुतोष जी बचपन से ही मेधावी छात्र रहे। किशोरावस्था से युवावस्था में कदम रखते ही वे बचपन से जिन कर्मकांडी पद्धतियों को देखते आ रहे थे,उन से मुक्त हो गए थे। यही दौर था, जब वह स्थानीय पत्रकारिता की ओर अग्रसर हो चले थे, एक रिपोर्ट के सिलसिले में तब उन्हें हाई कोर्ट जबलपुर के चक्कर काटने पड़े थे।इन्हीं चक्करों के दौरान उन्होनें हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध मार्क्सवादी व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई से मुलाकात की और उनकी प्रेरणा से प्रगतिशील लेखक संघ में शामिल होकर आजन्म प्रगतिशील लेखक संघ के न केवल सदस्य रहे,बल्कि अम्बिकापुर प्रगतिशील लेखक संघ के अन्तिम समय तक सचिव पद पर सक्रिय भी रहे।
आशुतोष जी ने अपने लेखन की शुरुआत समाचार पत्रों के लिए रिपोतार्ज से की, इसी दरम्यान उन्होंने स्थानीय से लेकर प्रसिद्ध हस्तियों यथा- सोनाबाई जो रजवारी मूर्ति कला की स्थानीय कलाकार थीं,जिन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उनका साक्षात्कार आशुतोष तिवारी ने लिया था।यह साक्षात्कार उस समय की हिन्दी की महनीय साप्ताहिक पत्रिका धर्मयुग में प्रकाशित हुई थी। इसी क्रम में इप्टा के महत्वपूर्ण फिल्मी कलाकार ए.के.हंगल का साक्षात्कार फिल्मी पत्रिका में, सागर सरहदी का साम्य जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। अब तक अप्रकाशित प्रगतिशील कवि त्रयी के कवि त्रिलोचन से लिया उनका साक्षात्कार भी शामिल है।
आशुतोष तिवारी ने कविता-कहानी के स्थान पर समालोचना को अपने लेखन का आधार बनाया। उनका सबसे महत्वपूर्ण आलेख आचार्य किशोरीदास वाजपेयी पर हिन्दी की नामचीन लघुपत्रिका साम्य में प्रकाशित और किशोरीदास वाजपेयी जी के शताब्दी वर्ष में चर्चित हुई थी।
आशुतोष तिवारी 25 नवम्बर सन् 2014 को ब्लड कैंसर से संघर्ष करते हुए अंतिम साँसे रायपुर हॉस्पिटल में लीं।
आशुतोष को और उनके लेखकीय व्यक्तित्व को आज संकीर्णता और पूँजीवादी दौर में याद किया जाना चाहिए।और बेहतर समाज और समानता से ओत:प्रोत विश्व के सपने देखने वालों को आशुतोष की प्रतिबद्धता से प्रेरणा लेना चाहिए।
[ •प्रस्तुत : राजेश कुमार मिश्र, अंबिकापुर छत्तीसगढ़ ]
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