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- आचार्य नरेंद्रदेव वर्मा शोधपीठ 1 जुलाई से : हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग में आरंभ की जायेगी, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने की घोषणा :
आचार्य नरेंद्रदेव वर्मा शोधपीठ 1 जुलाई से : हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग में आरंभ की जायेगी, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने की घोषणा :
दुर्ग [छत्तीसगढ़ आसपास न्यूज़] : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के प्रथम दीक्षांत समारोह में की थी कि आगामी शिक्षण सत्र में 1 जुलाई 2023 से आचार्य नरेंद्रदेव वर्मा शोधपीठ आरंभ की जायेगी.
आचार्य नरेंद्रदेव वर्मा –
‘ अरपा पैरी के धार… ‘ राज्यगीत लिखने वाले आचार्य नरेंद्रदेव वर्मा का जन्म 4 नवम्बर 1939 को हुआ था. इन्हें सागर विश्वविद्यालय और पं. रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर से 1966 एवं 1973 में पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई थी. स्व. नरेंद्रदेव वर्मा छत्तीसगढ़ भाषा एवं अस्मिता की पहचान बनाने वाले गंभीर कवि थे. उनकी ख्याति एक कवि, नाटककार, उपन्यासकार, कथाकार, समीक्षक एवं भाषाविद् के रूप में है. डॉ. नरेंद्रदेव वर्मा द्वारा लिखे गीत ‘ अरपा पैरी के धार.. ‘ को वर्ष 2019 में छत्तीसगढ़ राज्य का ‘ राज्य गीत ‘ घोषित किया गया. डॉ. नरेंद्रदेव वर्मा ने शासकीय डीबी गर्ल्स कॉलेज रायपुर और साइंस कॉलेज दुर्ग में हिंदी के प्राध्यापक के रूप में अपनी लंबी सेवाएं दी थी.
नरेंद्र वर्मा शोधपीठ –
शोधपीठ का संचालन शोधपीठ संबंधी विनियम क्रमांक 45 के अंतर्गत किया जायेगा. शोधपीठ के अंतर्गत विश्वविद्यालय के विभिन्न महत्वपूर्ण अकादमिक कार्यक्रम में अध्यापन, अनुसंधान, प्रशिक्षण, प्रचार – प्रसार, समाज से सरोकार एवं प्रकाशन गतिविधियां शामिल होंगी.
शोधपीठ कमेटी –
डॉ. नरेंद्रदेव वर्मा शोधपीठ संचालन हेतु एक सलाहकार मंडल गठित किया जायेगा. विश्वविद्यालय की विद्यापरिषद एवं कार्यपरिषद द्वारा अनुमोदित इस शोधपीठ में कुलपति अध्यक्ष होंगे. सलाहकार मंडल में एक निदेशक, 2 बाह्य विशेषज्ञ, विवि. कार्यपरिषद के 2 सदस्य, विद्यापरिषद के 2 सदस्य, विवि. से सम्बद्ध महाविद्यालयों में से 1 आचार्य, स्व. डॉ. नरेंद्रदेव वर्मा को जानने – समझने वाले 1 व्यक्ति और कुलसचिव सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे. 3 वर्ष के कार्यकाल वाले इस सलाहकार मंडल की अनुशंसा पर निदेशक की नियुक्ति कार्यपरिषद द्वारा की जायेगी.
वित्तीय व्यवस्था –
नरेंद्र वर्मा शोधपीठ के लिए वित्तीय व्यवस्था राज्य शासन, केंद्र शासन और अन्य संस्थाओं से प्राप्त अनुदान से की जाएगी. विश्वविद्यालय द्वारा भी अपने बजट से समुचित राशि की व्यवस्था करेगी.
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