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कृति : नव्य हिंदी बाल कविता संग्रह ‘ पंछी गाएँ आसमान में ‘ : कृतिकार बलदाऊ राम साहू.

बलदाऊ राम साहू छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ बाल साहित्यकार हैं।उनकी अब तक बारह बाल कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें छः हिन्दी बाल कविता संग्रह , चार छत्तीसगढ़ी बाल कविता संग्रह एवं दो बाल कहानी संग्रह शामिल हैं। बाल साहित्य के अलावा उनकी प्रकाशित कृतियों में तीन लोक कथा संग्रह , दो छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल संग्रह एवं छत्तीसगढ़ के महापुरुषों पर आधारित एक कथा चित्र साहित्य संग्रह प्रमुख है। वे सन् 1977 से हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी भाषा में बाल साहित्य सृजन कर रहे हैं। पंछी गाएँ आसमान में बलदाऊ राम साहू द्वारा रचित नव्य हिन्दी बाल कविता संग्रह हैं। इस संग्रह की सभी कविताएँ रचना प्रक्रिया की बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करती हैं। भाषा सरल,सहज एवं पठनीय है एवं उनमें यथार्थ बोध,भाव बोध एवं शब्द बोध का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। दूसरे शब्दों में कहें तो भाव,भाषा एवं कथ्य की दृष्टि से सभी बाल रचनाओं की मौलिकता असंदिग्ध है। बच्चों के मानसिक विकास की दृष्टि से बलदाऊ राम साहू का चिंतन बहुआयामी, प्रासंगिक एवं ज्ञानवर्धक है। उनकी कल्पनाशीलता सहज स्वभाविकता से आप्लावित है। उनकी बाल कविताओं को पढ़ने से लगता है कि वे बच्चों के मन में उठने वाले भावों के सहयात्री हैं। दरअसल बाल कविताएँ वही सार्थक मानी जाती हैं जिनका सरोकार बच्चों के मनोभावों से होता है, जो मनोरंजक होने के साथ-साथ ज्ञानवर्धक भी होती हैं, बच्चों के बौद्धिक विकास में सहायक होती हैं एवं समझने-बूझने के लिए मानसिक कसरत नहीं करातीं, बल्कि उनमें पढ़ने की रुचि जागृत करती हैं। बलदाऊ राम साहू की अधिकांश कविताओं में ये बात दिखाई देती है। पंछी गाएँ आसमान में की कुछ पंक्तियाँ दृष्टव्य हैं जिसमें उन्होंने सहज एवं शब्दों में बच्चों को सार्थक काम करने की सीख दी है, ताकि जीवन मे वे स्वभिमानी, कर्मठ एवं संस्कारित बनें एवं नैतिक मूल्यों का विकास हो-
◆ हरपल अगर प्रयास करोगे ,ख़ुद पर जब विश्वास करोगे
सहज ,सरल व्यवहार रहेगा, सबके दिल में वास करोगे ।
◆ गीत ख़ुशी के गाएँ हम , मानव धर्म निभाएँ हम
जो है राही भूले-भटके , उनको राह दिखाएँ हम।
◆ पंछी गाएँ आसमान में, पर फैलाए आसमान में
कभी झगड़ते, मिलते-जुलते, प्यार लुटाएँ आसमान में।
प्रख्यात बाल साहित्यकार नारायण पंडित की तरह बच्चों को शिक्षित करने एवं उनका मन बहलाने के लिए बलदाऊ राम साहू ने बाल कविताओं में पालतू जानवरों का ख़ूबसूरती से प्रयोग किया है । बानगी के तौर पर –
◆ घर में आती -जाती बिल्ली,उधम ख़ूब मचाती बिल्ली
चूहों पर वह रौब जमाती, कुत्तों से भय खाती बिल्ली।
◆ मक्खी रानी बड़ी सयानी,तुम करती हो क्यों मनमानी
गंदगी से है तुमको प्यार, तुमसे कौन करे तकरार।
गंदगी से दूर रहने का संदेश देती इन पंक्तियों में अभिव्यक्ति की कलात्मकता भी दिखाई देती है।
बच्चों में अनुकरणशीलता, जिज्ञासा एवं कल्पनाशीलता बहुत अधिक होती है। उदाहरण स्वरूप इससे संबंधित कुछ पंक्तियाँ देखें-
◆ चलो तिरंगे को फहराएँ, जन-गण-मन सब मिलकर गाएँ
सबके मन में बड़ी आस है, सोने की चिड़िया कहलाएँ।
◆ नील गगन के बादल काले, जैसे हों हाथी मतवाले।
शीतल जल बरसाने वाले,धरती को नहलाने वाले।
बच्चों की सीख के अलावा मनोरंजन के तत्व भी बलदाऊ राम साहू की बाल कविताओं में दिखाई देते हैं तथा-
◆ आसमान में काले बादल ,बच्चों-सा इतराते हैं
कभी-कभी आते समूह में, और कभी छिप जाते हैं।
◆ आओ -आओ सूरज भाई, चिड़ियों ने आवाज़ लगाई
धूप खड़ी चौखट पर आकर ,बच्चों छोड़ो गरम रजाई।
औरों की तुलना में बच्चे परिवार में माँ के बेहद करीब होते हैं। माँ के महत्व को रेखांकित करती सुन्दर पंक्तियाँ –
मेरे मन का मीत है माँ ,कभी न हारे जीत है माँ
त्याग तपस्या की मूरत है, ऐसी अनुपम प्रीत है माँ।
बच्चे ईश्वर का रूप होते हैं। उस कच्ची मिट्टी के समान होते हैं, जिन्हें किसी भी रूप में ढाला जा सकता है। उनका बचपन आज विकास की अंधी दौड़ में समाप्त हो रहा है। बाल साहित्य को बच्चों का बौद्धिक आहार माना जाता है। वह उन्हें भावों को परिष्कृत करके सुसंस्कृत बनाता है। हिन्दी बाल कविता संग्रह ‘पंछी गाएँ आसमान’ में की कविताएँ बच्चों के लिए ही नहीं बड़ों के लिए भी रोचक एवं लाभदायक हैं। पाठकगण को इसे ज़रूर पढ़ना चाहिए।
•समीक्षक –
•डॉ.माणिक विश्वकर्मा ‘ नवरंग ‘
•संपर्क : 94241 41875
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