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विशेष : महात्मा गौतम बुद्ध जयंती : एन एल मौर्य ‘ प्रीतम ‘
बुद्ध जयंती पर विशेष लेख —-
महात्मा बुद्ध का जन्म 563 ई0पू0 वर्तमान राष्ट्र नेपाल के लुम्बिनी में राजपरिवार में हुआ था उनके पिता का नाम शुद्धोधन एवं माता का नाम माया देवी था। उनके पिताजी शाक्य वंश के राजा थे इसलिए गौतम बुद्ध को शाक्य मुनि भी कहा जाता है।उनका विवाह राजकुमारी यशोधरा से हुआ था उनके एक पुत्र हुआ था जिसका नाम राहुल था। महात्मा बुद्ध का पहले नाम सिद्धार्थ था। उनके पिताजी राजा थे इसलिए राजकुमार सिद्धार्थ को किसी भी प्रकार का कोई तकलीफ़ न हो वे ऐसे महल का निर्माण करवाये थे जो गर्मी में ठंडक, सर्दी में गर्मी और बरसात के लिए अलग महल बनाए थे।राजा शुद्धोधन को ज्योतिषियों ने बताया था कि आपका सुपुत्र संन्यासी बनेगा जिसके कारण राजा शुद्धोधन चिन्तित रहते थे यही कारण था कि राजकुमार सिद्धार्थ को महल से बाहर नहीं जाने देते थे। एक दिन महल के पास से एक मृत व्यक्ति को लोग श्मशान घाट राम नाम सत्य है कि आवाज करते हुए जा रहे थे उन्होंने आवाज सुनकर नौकरों से कहा कि कौन लोग हैं और कहा जा रहें हैं नौकरों ने उन्हें बताया कि एक आदमी गुजर गया है उसके अंतिम संस्कार केलिए लोग जा रहें हैं। उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ तो उन्होंने नौकरों से पूछा कि ऐसा क्यों है। नौकरों ने जबाव दिया कि जो लोग पैदा हुए हैं वे बृध्द होंगे और मृत्यु को प्राप्त होंगे यह शाश्वत सत्य है। राजकुमार सिद्धार्थ चिंता में डूब गए कि आदमी इस तरह से मरता क्यों है, फिर उनको पता लगा कि यहां हर आदमी किसी न किसी रूप दुःखी है। ये बातें उनके दिल दिमाग में बैठ गई और बार -बार इसी चिंता में डूबे रहते थे कि आदमी बुढ़ा क्यों होता है क्यों मरता है क्यों दुखी हैं इसके निराकरण हेतु राजमहल से निकल कर इसी खोज में निकल पड़े बहुत लोगो से मिले लेकिन उनके समस्या का समाधान नहीं हुआ।
35 वर्ष की आयु में वर्तमान गया में निरंजना नदी के तट पर बिना अन्न जल ग्रहण किए बोधि वृक्ष के नीचे तपस्या में लीन रहे 6 वर्षों के घोर तपस्या के पश्चात उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे सिध्दार्थ से गौतम बुद्ध कहलाए ।
जिस स्थान पर उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ उसे बोध गया कहते हैं।
तथागत गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपना पहला उपदेश वाराणसी के सारनाथ में दिया था।उस दिन उपदेश सुनने वाले मात्र पांच लोग थे। और जब दूसरा उपदेश दिए तो उन दिन पांच लाख लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और बड़े धैर्य के साथ लोगों ने उपदेश को आत्मसात किया। इसके बाद जगह-जगह उपदेश दिए तथा बौद्ध ग्रंथों की रचना किए । महात्मा बुद्ध बौद्ध धर्म के संस्थापक थे।
महात्मा बुद्ध के गुरु और शिष्य
महात्मा बुद्ध के प़थम गुरु आलारकलाम थे। उनके शिष्यों में उरुवेला में पांच ब़ाहृमण थे और उनका प़िय शिष्य आनन्द था। महात्मा बुद्ध ने पाली भाषा में उपदेश दिया था।
बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने वाली पहली महिला बुद्ध की माता प़जा पति गौतमी थी।
भारतीय संस्कृति में अध्यात्मिक ज्ञान के विस्तार के लिए गुरु शिष्य की प्रशस्त परंपरा रही है । गुरु शिष्य की परंपरा का शरीर से सम्बन्ध नहीं,यह आत्मा का सम्बन्ध है।साधक का जीव गुरु के
जीव का शिष्य बनता है। इस लिए गुरु के शरीर के त्याग के पश्चात भी उनको उनसे निर्वाध प्रेरणा मिलती रहती है। गुरु आत्मा रुप है,देह रुप नहीं।
महात्मा बुद्ध ने कभी किसी को नहीं कहा कि तुम मेरी आराधना करो और मैं तुम्हें अमर लोक पहुंचाऊंगा अर्थात बार -बार जन्म -मरण से मुक्ति दिलाऊंगा बल्कि उन्होंने सभी को योग साधना करने की विधि बताए अहिंसा और सत्य मार्ग पर चलने का उपदेश दिया।
विश्व में सबसे बड़ी मूर्ति भगवान बुद्ध की बवियान में थी जिसको तालिबान ने बम से उडा दिया था लेकिन कुछ देशों में तथागत की मूर्ति लगी है जो इस प्रकार है -चीन में 163 मीटर स्पिंग टेंपल बुद्ध। म्यांमार में लेक्यून सेटक्यर 116् मीटर। जापान में उशीकू दारबुत्सु 110 मीटर। थाइलैंड में ग़ेट बुद्ध 92 मीटर। भूटान में डोडैमा 52 मीटर और श्रीलंका में बुद्ध स्टेच्यू कांडे विहार 49 मीटर अन्य देशों में भी महात्मा बुद्ध की मूर्ति लगी हुई है।
दिनांक 03-03-2023 को भगवान बुद्ध की एक प्राचीन मूर्ति मिस़ के बेरेनिस बन्द़गाह के पास मिली है। मूर्ति रोमन साम्राज्य/31 ई0पू0 से 476 ईस्वी/के शासन में भारत और मिस्र के व्यापारिक सम्बन्धों पर प़काश डालती है। पत्थर से बनी मूर्ति 71सेन्टीमीटर लम्बी है, मूर्ति में भगवान बुद्ध ने अपने कपड़े के एक हिस्से को पकड़ रखा है। इसके अलावा मूर्ति के पैरों के पास कमल का फूल है। इस प्रकार से हम देखते हैं कि महात्मा बुद्ध पूरे विश्व में सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं दुर्लभ है।
भगवान बुद्ध की मूर्ति मथुरा कला में बनाई गई है।
ओशो के शब्दों में महात्मा बुद्ध -आज दुनिया में अगर भारत की कहीं प्रतिष्ठा है तो उसकी प्रतिष्ठा में पचास हाथ तो बुद्ध का है। अगर लोग भारत को याद करते हैं तो बुद्ध के कारण याद करते हैं। अगर सारा एशिया भारत के प्रति सम्मान से देखता है और भारत को तीर्थ मानता है तो बुद्ध के कारण। भारत में बुद्ध से दूसरा बेटा पैदा नहीं लिया। कोटि -कोटि बौद्धों के मन में एकही अभिप्सा होती है कि कभी बुद्ध गया कभी भारत भूमि पर पैर पड़ जाए तो हमारा परम सौभाग्य हो।
आदरणीय प़धानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी के शब्दों में -सभी समस्याओं का हल हजारों वर्ष पहले महात्मा बुद्ध अपने ग़न्थ में लिख गए हैं। और जब प़धानमंत्री विदेश में जाते हैं तो गर्व से कहते हैं कि मैं बुद्ध की धरती से आया हूं।
महात्मा बुद्ध को भगवान विष्णु का 9 वां अवतार माना गया है।
जब 80 वर्ष की अवस्था में उनकी जीवन लीला की.
अंतिम बेला आई तो उनके प़ियशिष्यो ने उनको चारों तरफ़ से घेर लिया और कातर हो पूछा -आप तो अपनी मुक्ति के लिए प़यास कर रहे हैं। अब हमारा मार्गदर्शन कौन करेगा। बुद्ध ने उत्तर दिया -जब तक संसार में एक भी प्राणी बंधन में बंधा हुआ है,तब तक मुझे मुक्ति की कोई कामना नहीं है। मैं मानव मात्र का उत्कर्ष करने के लिए बार-बार जन्म लेता और मरता रहूंगा।
यह संदेश देकर 483 ई0पू0 कुशीनगर/उत्तर प्रदेश/में महात्मा बुद्ध अंतिम सांस लिए।
और महात्मा बुद्ध ने कहा था कि -ईच्छा को जीतकर शांति से रहना और सब जीवों पर दया करना यही सब धर्मों का मूल है।
[ •लेखक एन एल मौर्य ‘ प्रीतम ‘, सम्राट अशोक अकादमी छत्तीसगढ़ राज्य के महासचिव हैं. 83197 23617 ]
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