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रचना आसपास [अनुवाद] : •मूल लेखक – नचिकेता चक्रवर्ती •अनुवाद – तारकनाथ चौधुरी

•नचिकेता चक्रवर्ती
🌸 वृद्धआश्रम
बंगला संगीत जगत में बहुमूल्य रत्न सा सम्मानित हैं श्री नचिकेता चक्रवर्ती जो न केवल दक्ष गायक हैं वरन् कुशल संगीतकार एवं संवेदनशील गीतकार भी हैं।बीते दशक में उनके जिस गीत ने सबसे ज्यादा मन-मस्तिष्क को झकझोरा है वो है उनका वृद्धाश्रम शीर्षक से गीत।मैं चाहता हूँ उनका ये गीत भारत की प्रत्येक भाषा में अनूदित होकर सभी के मर्म को छुए।मैंने इस गीत को हिंदी में भाषान्तरित करने की धृष्टता की है।आपलोगों का आशीर्वाद पाने की आशा लिए गीत प्रस्तुत है—–
🌴बेटा मेरा बन गया है
बडा़ आॅफिसर
शहर में है उसका एक
आलीशान घर
घर का कोना-कोना मँहगी
चीजो़ं से भरा है
मैं हूँ सबसे सस्ता शायद
कहने से डरा है
आज लेकिन टूट गया
भय का सारा क्रम
कहने लगा जाना होगा
मुझे वृद्धाश्रम!
मेरी अल्मारी और कुर्सी
वो पुरानी
दोनों से जुडी़ं थीं यादें
कितनी ही सुहानी
उसने पापा की घडी़,छडी़
पेंटिंग बेच डाले
किताबें जितनी थी सारी
आग के कर दी हवाले
कहता है डॉगी के लिए
जगह बहुत कम..
मेरा अब ठिकाना होगा
एक वृद्धाश्रम!
मेरे हाथों से ही रोटी
खाया वो करता था
मेरी छाती से लिपटकर
सोया वो करता था
मैं पिता ही नहीं उसकी
माता भी तो मैं था
लोरियाँ, सुलाने उसे
गाता भी तो मैं था।
सपने सारे टूटे मेरे
आँखें हुईं नम…..
मेरा अब ठिकाना होगा
एक वृद्धाश्रम !
मेरे पोते की उमर
दो ही साल की
बेटे ने बहारें देखीं
पच्चीस साल की
मेरे प्रभु सौ वर्षों तक
मुझको जिंदा रखना
देह के पिंजरे में प्राणों का
परिन्दा रखना।
बैंसठ की जब उम्र होगी
मेरे लाल की
सवालें उठेंगी उसके
देखभाल की
पोता दुहरायेगा फिर
प्रक्रिया-प्रक्रम
मैं बुला लूँगा तब उसे
अपने वृद्धाश्रम

•तारकनाथ चौधुरी
•संपर्क – 83494 08210
🌸🌸🌸
chhattisgarhaaspaas
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